ऋषि सुनक की वीजा पॉलिसी ने UK से तोड़ा विदेशी छात्रों का दिल, यूनिवर्सिटीज में रिकॉर्ड संख्या में कम एडमिशन
Youth Mobility VISA UK: ब्रिटेन सरकार की ओर से वीजा पर सख्ती लगाए जाना अब यूके के यूनिवर्सिटीज पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। माइग्रेशन रोकने के लिए तैयार की गई ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के फैसले का अब बुरा असर दिखाई दे रहा है। वीजा प्रतिबंध के बीच यूके यूनिवर्सिटीज में इंटरनेशनल छात्रों के आवेदनों में 28 फीसदी की चौंकाने वाली गिरावट देखने को मिली है।
यूनाइटेड किंगडम (यूके) के विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए अंतर्राष्ट्रीय छात्र आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है। आवेदनों में इस गिरावट की वजह से विश्वविद्यालयों को सबसे अहम वित्तीय यानी पैसों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

गृह कार्यालय, यूके के हालिया डेटा से इसका पता चला है कि आगामी वर्ष के लिए प्रायोजित अध्ययन वीजा (sponsored study visa) के लिए आवेदनों में 28 प्रतिशत की कमी आई है। जून 2024 में गृह कार्यालय को 28,200 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि जून 2023 में यह संख्या 38,900 थी।
बताया जा जाता है कि ज्यादातर छात्र वीजा आवेदन आमतौर पर गर्मियों में मिलते हैं, जिसको लेकर विश्वविद्यालयों को उम्मीद है कि सितंबर तक स्थिति में सुधार होगा। लेकिन द गार्जियन के डेटा से पता चला है कि उनको संघर्ष जारी रहेगा।
31 यूके यूनिवर्सिटीज में 41 प्रतिशत गिरावट
एनरोली, एक ऐसी सर्विस है, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को उनके विश्वविद्यालय नामांकन का मैनेजमेंट करने में मदद करती है, उसने जुलाई के अंत तक 31 यूके विश्वविद्यालयों में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की ओर से जमा और स्वीकृतियों में 41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। यह गिरावट खासतौर स्नातकोत्तर पढ़ाए जाने वाले मास्टर पाठ्यक्रमों में थी, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत की कमी देखी गई, जबकि स्नातक की संख्या में 23 प्रतिशत की गिरावट आई।
जनवरी से पढ़ाए जाने वाले स्नातकोत्तर या स्नातक पाठ्यक्रमों में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय छात्र छात्र वीजा पर अपने साथ परिवार के सदस्यों या आश्रितों को लाने में असमर्थ हैं। एनरोली के सीईओ जेफ विलियम्स ने कहा कि वर्ष की शुरुआत से ही अंतर्राष्ट्रीय छात्र भर्ती में गिरावट का रुख रहा है।
2021-22 शैक्षणिक वर्ष में 240,000 से अधिक पूर्णकालिक अंतर्राष्ट्रीय छात्र स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और 104,000 स्नातक पाठ्यक्रम शुरू कर रहे थे। ऐसे में अगर एनरोली के आंकड़े पर नजर डालें तो इस सर्दी में लगभग 150,000 कम अंतर्राष्ट्रीय छात्र आएंगे। यह गिरावट विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि कई विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय ट्यूशन फीस से होने वाली आय पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, जबकि इंग्लैंड में घरेलू ट्यूशन फीस स्थिर बनी हुई है।
भारतीय छात्रों पर बड़ा असर
बता दें कि ग्रेजुएट रूट वीजा कई कारणों से भारतीय छात्रों के लिए अहम रहा है, क्योंकि साल 2021 और 2023 के बीच दिए गए कुल ग्रेजुएट रूट वीजा में से 42 फीसदी भारतीय छात्र हैं। इस गिरावट में सबसे ज्यादा भारतीय छात्रों का असर पड़ा है।












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