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आखिरकार मिल गया इंडोनेशिया के क्रैश लॉयन एयर जेट का ब्‍लैक बॉक्‍स, अब पता लगेगा क्रैश से पहले क्‍या हुआ था

जकार्ता। इंडोनेशिया में सोमवार को लॉयन एयर का जेट क्‍यों क्रैश हुआ, अब इसका पता लग सकेगा। गोताखोरों ने इस क्रैश हुए जेट का ब्‍लैक बॉक्‍स आखिरकार तलाश लिया है। इस क्रैश में 189 लोगों की मौत हो गई थी। गुरुवार को एक गोताखोर की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। सोमवार को लॉयन एयर की फ्लाइट 610 जकार्ता से टेक ऑफ करने के 13 मिनट बाद ही रडार से गायब हो गई थी। कुछ मिनटों बाद ही इसके क्रैश होने की खबरें आई थीं। पायटॉट ट्यूब एयरस्‍पीड को मापने के काम में आती है और माना जा रहा है कि इसमें खराबी आने की वजह से ही जेट क्रैश हो गया। यह जेट पंगकल पिनांग सिटी के लिए निकला था जो कि बांग्‍का द्वीप पर है। यह भी पढ़ें-एक छोटी सी ट्यूब की वजह से क्रैश हो गया इंडोनेशिया के लॉयन एयर का जेट

एकदम नया था क्रैश हुआ जेट

एकदम नया था क्रैश हुआ जेट

ब्‍लैक बॉक्‍स मिलने के बाद अब इस बात का पता लगाया जा सकता है कि आखिर जेट के क्रैश होने से पहले क्‍या हुआ था। जो जेट सोमवार को क्रैश हुआ है, वह एकदम नया प्‍लेन था और सिर्फ 13 मिनट के अंदर इसके क्रैश हो जाने से हर कोई हैरान है। गोताखोर जिसका नाम हेंद्रा बताया जा रहा है, उसने बताया, 'हमने खोदते गए और फिर हमें ब्‍लैक बॉक्‍स मिल गया।' हेंद्रा ने यह बात मेट्रो टीवी को बताई। हेंद्रा ने बताया कि ब्‍लैक बॉक्‍स नारंगी रंग का है और पूरी तरह से ठीक है। हालांकि उसने यह नहीं बताया कि यह फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर है या फिर कॉकपिट व्‍याइस रिकॉर्डर है जिसे साधारणतौर पर ब्‍लैक बॉक्‍सेज के तौर पर बताया जाता है। डाइवर ने बताया कि एयरक्राफ्ट के काफी छोटे टुकड़े ही हासिल हो सकें है। ब्‍लैक बॉक्‍स मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन को बंद कर दिया गया है।

क्या होता है ब्‍लैक बॉक्‍स

क्या होता है ब्‍लैक बॉक्‍स

ब्‍लैक बॉक्‍स वह इलेक्‍ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग डिवाइस होती है जिसे प्‍लेन में लगाया जाता है। इसे लगाने का मकसद ही यह होता है कि किसी दुर्घटना के बाद जांच में सुविधा हो और क्रैश या दुर्घटना के कारणों का पता लग सके। आपको यह जानकर हैरानी होगी ब्‍लैक बॉक्‍स, इस शब्‍द का प्रयोग कभी भी फ्लाइट सेफ्टी इंडस्‍ट्री में नहीं किया जाता है। आधिकारिक तौर पर एविएशन इंडस्‍ट्री फ्लाइट रिकॉर्डर शब्‍द का ही प्रयोग करती है। रिकॉर्डर के लिए काले रंग की मंजूरी नहीं है और यह सिर्फ नारंगी रंग का ही हो सकता है। यह रंग इसलिए तय किया गया है ताकि क्रैश के बाद इसे आसानी से रिकवर किया जा सके। इसे ब्‍लैक बॉक्‍स इसके काम करने के तरीकों की वजह से दिया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोई यह नहीं जाना पाता है कि आखिर यह काम कैसे करता है, इस वजह से ही इसे ब्‍लैक बॉक्‍स भी कहा जाने लगा। कमर्शियल एयरक्राफ्ट में दो ब्‍लैक बॉक्‍स होते हैं। एक ब्‍लैक बॉक्‍स को फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर कहते हैं जिसमें प्‍लेन का सारा डाटा जिसमें इसकी स्‍पीड, क्रैश के समय किस ऊंचाई पर था, इंजन स्‍पीड से लेकर एयर प्रेशर जैसा डाटा होता है।

क्‍या बोले रेस्‍क्‍यू एजेंसी के मुखिया

क्‍या बोले रेस्‍क्‍यू एजेंसी के मुखिया

इंडोनेशिया की सर्च एंड रेस्‍क्‍यू एजेंसी के प्रवक्‍ता युसूफ लतीफ ने भी इस बात की पुष्टि तो नहीं की कि जेट का ब्‍लैक बॉक्‍स मिल गया है लेकिन इतना कहा कि उन्‍हें एक नारंगी रंग की चीज मिली है। नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी के डिप्‍टी चीफ हारयो सतमिको ने बताया कि प्‍लेन का ब्‍लैक बॉक्‍स अब यह बता सकता है कि जकार्ता से टेक ऑफ करने के बाद बोइंग 737 मैक्‍स8 जेट क्‍यों क्रैश हो गया। एक ब्‍लैक बॉक्‍स से पिंग की आवाज आ रही है। एक अंडरवॉटर ड्रोन ने नारंगी रंग की चीज का पता लगाया था और माना गया कि विमान के धड़ का कोई हिस्‍सा हो सकता है। इंडो‍नेशिया के समयानुसर सुबह पांच बजे गोताखोरों की एक टीम समंदर में उतरी थी।

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