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इंडोनेशिया के नये सेक्स कानून पर क्यों हो रहा है विवाद, जानें सरकार ने क्या-क्या नियम बनाए?

इंडोनेशिया एक मुस्लिम देश होकर भी धार्मिक स्वतंत्रता के लिहाज से सभी मुस्लिम देशों में सबसे आगे है, जो अपनी धार्मिक सहिष्णुता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन, नये सेक्स कानून पर आलोचकों को गहरी आपत्ति है।
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Indonesia passes outlaws sex outside marriage: दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले मुस्लिम देश इंडोनेशिया में विवाह के बाद अपने पार्टनर के अलावा किसी और से शारीरिक संबंध बनाना गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। यानि, शादी के बाद अगर कोई पति, किसी गैर महिला से संबंध बनाता है, या फिर अगर कोई पत्नी, किसी गैर मर्द से संबंध बनाता है, तो वो कानूनन अपराध माना जाएगा और अदालत में साबित होने पर वो सख्त सजा का हकदार होगा। इंडोनेशियाई सरकार ने विवादित बिल को संसद में पारित कर दिया है, जिसकी आलोचना की जा रही है। ऐसे में आइये समझते हैं, कि क्या है इंडोनेशिया का विवादित कानून और विश्लेषक इस बिल की आलोचना क्यों कर रहे हैं?

इंडोनेशिया का नया कानून क्या है?

इंडोनेशिया का नया कानून क्या है?

इंडोनेशिया ने संसद में एक कानून पास किया है, जिसमें विवाह के बाद अपने पार्टनर के अलावा किसी और से सहवास को आपराधिक मामला बताया है, जिसको लेकर आलोचकों का कहना है, कि इंडोनेशिया का ये नया कानून लोगों की स्वतंत्रता के अधिकार को कमजोर करता है। इंडोनेशिया का नया कानून देश के लोगों के अलावा देश में आए विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है। इस कानून के अलावा इंडोनेशिया में एक और कानून पास किया गया है, जिसमें राष्ट्रपति के अपमान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इंडोनेशिया की राष्ट्रीय विचारधारा जिसे पंकसिला कहा जाता है, उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां भी आपराधिक होगा। इंडोनेशिया की संसद में मंगलवार को सर्वसम्मति से इस बिल को पारित कर दिया गया। इंडोनेशिया का नया कानून, 1946 में पारित हुए उस कानून की जगह लेगा, जो डच कानून और इंडोनेशिया के नये कानून का मिश्रण था, जिसे हुकुम आदत कहा जाता था।"

विवावित माना जाता है नया कानून

विवावित माना जाता है नया कानून

इंडोनेशिया के कानून और मानवाधिकार मंत्री यासोना लाओली ने मतदान से पहले संसद को बताया कि, "हमने महत्वपूर्ण मुद्दों और अलग-अलग रायों को समायोजित करने की पूरी कोशिश की है, जिन पर बहस हुई थी। हालांकि, यह हमारे लिए दंड संहिता संशोधन पर एक ऐतिहासिक निर्णय लेने और औपनिवेशिक आपराधिक संहिता को पीछे छोड़ने का समय है"। वहीं, इंडोनेशिया में राष्ट्रपति के अपमान को लेकर जो कानून पास किया गया है, वो काफी विवादित है और सरकार पिछले कई सालों से इस कानून को पारित करवाने की कोशिश कर रही थी। इससे पहले साल 2019 में भी इस कानून को पास करवाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कानून का ड्राफ्ट जारी होते ही पूरे देश में छात्रों ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था और संघर्ष में 300 से ज्यादा छात्र घायल हो गया थे। आलोचकों का कहना है, कि राष्ट्रपति पर अपमान के बहाने अब सरकार हर स्वतंत्र आवाज को कुचलने की कोशिश करेगी। (इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो- बीच में)

सेक्स संबंधित कानून पर विवाद

सेक्स संबंधित कानून पर विवाद

नया कानून पारित होने से पहले इंडोनेशिया में शादी से पहले सेक्स अवैध नहीं था, हालांकि उसे व्यभिचार जरूर कहा जाता था। लेकिन अब, इंडोनेशिया के नये कानून के तहत मां-बाप को अगर लगता है, कि उनका बच्चा विवाह से पहले सेक्स संबंधों में शामिल है, तो वो पुलिस में शिकायत कर सकते हैं। वहीं, अगर बच्चों को लगता है, कि उनके मां या बाप में से कोई भी किसी 'अवैध संबंध' में शामिल है, तो वो भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की तहकीकात करेगी और आरोप सच साबित करने पर वो दंड के भागीदार होंगे।

कानून का किया जाएगा दुरुपयोग?

कानून का किया जाएगा दुरुपयोग?

आलोचकों का कहना है, कि पहले तो अब इस कानून का भारी दुरुपयोग किया जाएगा, वहीं इस कानून का मतलब ये है, कि अब सरकार ने नैतिक पुलिसिंग की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। और सरकार अपने इस कानून के जरिए एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने के लिए भी इस कानून का उपयोग करेगी। नये पारित कानून के तहत विवाह से पहले सेक्स और विवाह के बाद पार्टनर के अलावा किसी और से सेक्क, दोनों ही मामले कानूनन अपराध होंगे, जिसके लिए एक साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जाएगा।

धार्मिक असहिष्णुता की तरफ बढ़ता देश

धार्मिक असहिष्णुता की तरफ बढ़ता देश

इंडोनेशिया के पारित हुए नये कानून में दंड को लेकर अलग अलग प्रावधान किए गये हैं, जिसमें 6 महीने से एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसकी शिकायत माता-पिता के अलावा बच्चे या फिर पति या पत्नी कर सकते हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि, सरकार का ये कानून लोगों के मानवाधिकार का सख्त उल्लंगन है और रूढ़िवाद की तरह बढ़ने के निशान हैं। इंडोनेशिया लंबे समय से धार्मिक सहिष्णुता के लिए प्रसिद्ध है और इंडोनेशिया के संविधान में धर्मनिरपेक्षता निहित है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडोनेशिया के डायरेक्टर उस्मान हामिद ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया कि, "हमारा देश पीछे जा रहा है... दमनकारी कानूनों को समाप्त कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन ये बिल दिखाता है कि, हमारे लोकतंत्र में निर्विवाद रूप से गिरावट आ रही है।"

अदालत में दी जा सकती है चुनौती

अदालत में दी जा सकती है चुनौती

वहीं, संसद में पास इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और अदालत की संवैधानिक बेंच मामले का सुनवाई कर सकती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि, इसे पारित करने से पहले सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। इससे पहले भी मजदूरों को लेकर अक्टूबर 2020 में पारित किया गया जॉब क्रिएशन कानून को अदालत में चुनौती दी गई थी और कोर्ट ने अपने फैसले में कानून को 'असंवैधानिक' करार दिया था और सरकार को उस कानून में संशोधिन के लिए 2 सालों का वक्त दिया गया था।

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English summary
Indonesia News: Controversial law has been passed regarding making physical relations in Indonesia.
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