हर बार फेल क्यों हो जाते हो... भारत ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल को लगाई लताड़, जानिए भड़कने की वजह?
India UNSC News: भारत ने तीखा सवाल करते हुए यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) से पूछा है, कि आखिर यूएनएससी रूस-यूक्रेन संघर्ष को हल करने में "पूरी तरह से अप्रभावी" क्यों हो गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे साल भी जारी है और अभी तक इस युद्ध को रोकने में यूएनएससी पूरी तरह से नाकाम रहा है।
लिहाजा, यूएनएससी को लताड़ लगाते हुए भारत बहुपक्षवाद को प्रभावी बनाते हुए पुरानी संरचना में सुधार करने की जरूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्ण बैठक में यह सवाल उठाया है।

यूएनएससी में भारत के तीखे तेवर
रूचिरा कंबोज ने यूक्रेन संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा, कि "चूंकि संघर्ष दो साल से बेरोकटोक जारी है, इसलिए हमें, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के समूह को थोड़ा ठहरकर सोचना चाहिए और खुद से दो जरूरी सवाल पूछने चाहिए। कि क्या हम कहीं भी किसी स्वीकार्य समाधान को खोजने के करीब हैं? और यदि नहीं, तो ऐसा क्यों है, कि संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, विशेष रूप से इसके प्रमुख अंग, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जिसका मुख्य काम अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है, वो चल रहे संघर्ष का समाधान तलाशने में पूरी तरह से नाकाम रहा है?"
इससे पहले, पिछले शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 'यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थिति' पर एक पूर्ण बहस आयोजित की थी। सोमवार को फिर से शुरू होने के बाद बहस को संबोधित करते हुए, कम्बोज ने जोर देकर कहा, कि बहुपक्षवाद को प्रभावी बनाने के लिए, "पुरानी और पुरातन संरचनाओं में सुधार और पुनर्निमाण की आवश्यकता है, अन्यथा उनकी विश्वसनीयता हमेशा कम होती रहेगी। और जब तक हम उस प्रणालीगत दोष को ठीक नहीं कर लेते, हम अभावग्रस्त बने रहेंगे।"
यूक्रेन संघर्ष पर भारत ने फिर जताई चिंता
रूचिरा कंबोज ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दावे को दोहराया, कि यह "युद्ध का युग" नहीं है। ये टिप्पणी जो भारतीय प्रधानममंत्री नरेन्द्र मोदी ने सितंबर 2022 में समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी बैठक के दौरान की थी।
कंबोज ने महासभा को बताया, कि भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर लगातार चिंतित है। उन्होंने कहा, कि "हमने लगातार यह रुख अपनाया है कि कोई भी समाधान मानव जीवन की कीमत पर कभी नहीं आ सकता है। शत्रुता और हिंसा का बढ़ना किसी के हित में नहीं है।"
उन्होंने एक बार फिर जोर देते हुए आग्रह किया, कि शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर तत्काल वापसी के लिए सभी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि संघर्षों को हल करने के लिए बातचीत में शामिल होना "एकमात्र रास्ता" है।
Indias statement today at the United Nations General Assembly on the situation in Ukraine pic.twitter.com/EpzfylYLIL
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) February 27, 2024
यूएनएससी पर क्यों भड़का है भारत?
आपको बता दें, कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता चाहता है, लेकिन चीन बार बार भारत की दावेदारी को रोक दे रहा है, जिससे भारत काफी गुस्से में है, जिसकी वजह से भारत ने यूएनएससी की फंडिंग भी आधी कर दी है।
इसी महीने ग्लोबल सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस (सास) की दिग्गज कंपनी ज़ोहो कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर वेम्बू ने 15 फरवरी को ट्वीट करते हुए कहा, कि कि संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग को कम करने का भारत का कदम "एक स्वागत योग्य कदम" है और उन्होंने भारत से संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन का हिस्सा ने बनने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा, कि जब संयुक्त राष्ट्र की शक्तियां दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश को मान्यता नहीं देती हैं तो भारतीयों को इस निकाय के साथ "अपना समय और पैसा बर्बाद" नहीं करना चाहिए।
संसद में पेश किए गए 2024-25 के अंतरिम बजट में, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023-24 के संशोधित अनुमान की तुलना में संयुक्त राष्ट्र सहित अलग अलग अंतरराष्ट्रीय निकायों के लिए फंडिंग में 35.16 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव रखा है।
भारत 4.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 7 फरवरी, 2024 के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार, यह अमेरिका (US$27.9 ट्रिलियन), चीन (US$18 ट्रिलियन), जर्मनी (US$4.7 ट्रिलियन) और जापान (US$4.2 ट्रिलियन) से ठीक पीछे है और एक से 2 सालों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।
बावजूद भारत का यूएनएससी का स्थायी सदस्य नहीं होना आश्चर्य करने वाली बात है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस, यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं, लेकिन चीन के वीटो की वजह से भारत को यूएनएससी की स्थाई सदस्यता नहीं मिल पाती है।












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