अमेरिकी THAAD जैसा शक्तिशाली, रूसी S-400 का पार्टनर! DRDO के नये इंटरसेप्टर के टेस्ट से क्यों डरे चीन-PAK?

AD-1 Interceptor Missile: भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने AD-1 इंटरसेप्टर मिसाइल का कामयाब परीक्षण करके चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों को करार संदेश दिया है। AD-1 इंटरसेप्टर सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) फेज-2 सिस्टम का हिस्सा है।

DRDO पहले ही BMD फेज-1 सिस्टम का डेवलपमेंट कर चुका है, जो 2,000 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों के खिलाफ एयर डिफेंस तैयार करता है। फेज-1 में DRDO ने जो इंटरसेप्टर तैयार किया था, उसे पाकिस्तान की गौरी और शाहीन मिसाइलों और चीन की सॉलिड ईंधन वाली Dongfeng-21 मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन AD-1 से भारत की क्षमता में ना सिर्फ अभूतपूर्व इजाफा होता है, बल्कि भारत उस खास क्लब में शामिल हो जाता है, जिसने ये क्षमता हासिल की है।

AD-1 Interceptor Missile

AD-1 इंटरसेप्टर सिस्टम की खासियत समझिए

AD-1 इंटरसेप्टर सिस्टम, भारत को 5,000 किलोमीटर तक की रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ अभेद्य सुरक्षा सिस्टम का निर्माण करेगी।

फेज-2 सिस्टम को लंबी दूरी के रडार (चरण 1 के रडार के लिए 600 किमी की तुलना में 1,500 किमी की ट्रैकिंग सीमा) और मैक 6-7 (चरण 1 मिसाइलों के लिए मैक 4-5 के विपरीत) पर उड़ने वाली नई हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की जरूरत होती है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को भी मार गिराने की क्षमता रखता है।

24 जुलाई को BMD फेज-2 AD-1 इंटरसेप्टर का दूसरा फ्लाइट टेस्ट किया गया, जिसमें मुख्य रूप से रडार ट्रैकिंग, मिसाइल गाइडेंस और BMD फेज-2 की कम्युनिकेशन का टेस्ट किया गया। टेस्ट के बाद DRDO के बयान में कहा गया, कि इस टेस्ट ने "पूरी तरह से नेटवर्क केंद्रित युद्ध हथियार प्रणाली को मान्य करने वाले सभी परीक्षण उद्देश्यों को हासिल कर लिया है, जिसमें लंबी दूरी के सेंसर, कम विलंबता कम्युनिकेशन सिस्टम और MCC (मिसाइल नियंत्रण केंद्र) और एडवांस इंटरसेप्टर मिसाइल शामिल हैं।"

नवंबर 2022 में इंटरसेप्टर के पहले टेस्ट के विपरीत, दूसरे परीक्षण में सिस्टम से पृथ्वी मिसाइल को भी लॉन्च किया गया है। पहले टेस्ट में इस सिस्टम की अलग अलग स्थानों पर तैनाती के दौरान उसके रडार, लॉन्चर और दूसरी क्षमताओं के कार्य करने की क्षमता का टेस्ट किया गया था।

स्वोर्डफ़िश रडार

BMD फेज-2 लक्ष्य ट्रैकिंग के लिए स्वदेशी रूप से विकसित स्वोर्डफ़िश लॉन्ग रेंज ट्रैकिंग रडार (LRTR) का इस्तेमाल करता है। L-बैंड AESA रडार BMD फेज-I को विकसित करते समय इस्तेमाल किए जाने वाले इजराइली EL/M-2080 ग्रीन पाइन लॉन्ग-रेंज रडार का म्यूटेंट है। स्वोर्डफ़िश के लेटेस्ट वेरिएंट टारगेट की पहचान करने की क्षमता 1500 किलोमीटर बताई जा रही है।

इस मिसाइल सिस्टम से निकलने वाली मिसाइल पहले पृथ्वी की निचली कक्षा में जाएगी और फिर वहां से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करेगी। फायर होने के बाद ये मिसाइल LEO (पृथ्वी की निचली कक्षा-200 से 600 किमी) सैटेलाइट का इस्तेमाल करता है, जिसकी वजह से ये अत्यधिक सटीकता से हमला करने में सक्षम हो पाता है।

ये मिसाइल सिस्टम GEO (35,786 किमी) कक्षाओं में रखे गए कम्युनिकेशन सैटेलाइट का इस्तेमाल करता है।

AD-1 इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए DRDO की लगातार कोशिशों का नतीजा है।

अमेरिकी THAAD के समान ही शक्तिशाली

कई मायनों में, AD-1 अमेरिकी THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम इंटरसेप्टर मिसाइल के समान है, जिसे टर्मिनल फेज के दौरान वायुमंडल के भीतर उच्च ऊंचाई पर लक्ष्य मिसाइलों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। THAAD 200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकता है और 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर मौजूद लक्ष्य को ट्रैक कर सकता है।

हालांकि, AD-1 के विपरीत, THAAD इंटरसेप्टर एक सिंगल-स्टेज मिसाइल है।

2-स्टेज इंटरसेप्टर के सिंगल-स्टेज इंटरसेप्टर की तुलना में कई फायदे हैं, जैसे कि रेंज काफी ज्यादा होना, स्पीड ज्यादा होना और तेज स्पीड के साथ अपने टारगेट की तरफ बढ़ना।

एरोडायनामिक लक्ष्यों के लिए लंबी दूरी का इंटरसेप्टर?

यह कल्पना की जा सकती है, कि AD-1 इंटरसेप्टर का एक वेरिएंट S-400 जैसे IADS के साथ उपयोग के लिए अनुकूलित किया जाएगा। इस मामले में, इंटरसेप्टर में एक सक्रिय रडार-होमिंग सीकर की सुविधा होनी चाहिए, ताकि हर मौसम में काम करने और वातावरण बदलने से इसपर असर ना पड़े।

एस-400 में टू स्टेज 40N6 इंटरसेप्टर का उपयोग किया गया है, जिसकी रेंज 400 किलोमीटर है और लक्ष्य पर 185 किलोमीटर की दूरी पर ही किसी ऑब्जेक्ट को मार गिराने की क्षमता है। भारत अपनी खुद की एस-400 सीरिज के एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसे "प्रोजेक्ट कुशा" के नाम से जाना जाता है।

3 अक्टूबर 2023 को वायु सेना दिवस (8 अक्टूबर) के मौके पर वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, भारतीय वायु सेना (IAF) के चीफ ऑफ एयर स्टाफ (CAS), एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने घोषणा की थी, कि भारत प्रोजेक्ट कुशा के तहत अपनी खुद की लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करेगा।

24 जुलाई को बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस परीक्षण ने DRDO द्वारा विकसित स्वोर्डफ़िश लॉन्ग-रेंज ट्रैकिंग रडार, लो-लेटेंसी कम्युनिकेशन लेयर और एमसीसी मार्गदर्शन क्षमता को लेकर भारत के बन रहे प्रभाव की पुष्टि की है। वहीं, बीएमडी फेज-2 के काम भी चल रहे हैं और माना जा रहा है, कि अगले एक दशक इसे ऑपरेशन के लिए तैनाती कर दिया जाएगा।

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