Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

भारत में होने वाली QUAD बैठक पर संकट के बादल, बहाना बनाकर बाइडेन टाल सकते हैं दिल्ली दौरा! संबंधों में आई खटास

QUAD Meetin India: भारत की योजना अगले साल जनवरी में गणतंत्र दिवस समारोह के ठीक बाद क्वाड बैठक की मेजबानी करने की है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो सकते हैं। लेकिन, अब जबकि अमेरिका की तरफ से भारत के ऊपर विस्फोटक आरोप लगाए गये हैं, उससे भारत और अमेरिका के बीच संबंध खतरे में पड़ते दिख रहे हैं।

अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने दावा किया है, कि उसने खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश रचने वाले एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है, जिसे एक भारतीय अधिकारी से लगातार ऑर्डर मिल रहे थे। हालांकि, भारत ने अमेरिका के आरोपों को नकारा नहीं है, बल्कि भारत ने अमेरिका के आरोपों को गंभीर मानते हुए, हाई प्रोफाइल जांच के लिए टीम के गठन का ऐलान किया है, लेकिन ऐसा लग रहा है, कि ये मामला यहीं थमने वाला नहीं है।

QUAD News

अमेरिका के भारत के खिलाफ आरोप क्या हैं?

संयुक्त राज्य अमेरिका के अभियोजकों ने 29 नवंबर को घोषणा की थी, कि न्यूयॉर्क शहर में रहने वाले सिख नेता की हत्या की साजिश कथित तौर पर एक भारत सरकार के अधिकारी द्वारा रची गई थी। अभियोजकों ने एक व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की घोषणा करते हुए कहा, कि निखिल गुप्ता नाम के एक भारतीय नागरिक को चेक गणराज्य से गिरफ्तार किया गया, जिसने अमेरिका के एक सीक्रेट एजेंट को पन्नून की हत्या की सुपारी दी थी।

कथित तौर पर, भारतीय अधिकारी ने योजनाबद्ध हत्या के बदले में अंडरकवर एजेंट को 100,000 अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया था। इस कथित साजिश का शिकार न्यूयॉर्क स्थित एक समूह "सिख फॉर जस्टिस" के नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून है, जिसने खालिस्तान नामक एक अलग सिख राज्य के पक्ष में जनमत संग्रह का आयोजन किया है। भारत ने कथित तौर पर संगठित अपराध, बंदूक चलाने और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले आतंकवादियों के बीच सांठगांठ के अमेरिकी आरोपों की उच्च स्तरीय जांच शुरू की है।

लेकिन, संयुक्त राज्य अमेरिका के लगाए गए विस्फोटक आरोपों के साथ, चिंता इस बात की है, कि ऐसा ही हश्र भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों का भी हो सकता है, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन को काउंटर करने के लिए पिछले काफी दिनों से एक साथ आने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा, भारत-अमेरिका संबंधों में कोई भी तनाव भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान वाले क्वाड समूह में बड़े दरार का कारण बनेगा।

भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में "मुख्य अतिथि" के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, जिसके अगले दिन नई दिल्ली में क्वाड नेताओं का सम्मेलन होना है। हालांकि, सूत्रों का कहना है, कि यदि बाइडेन का स्टेट ऑफ़ द यूनियन संबोधन उसी दिन होता है, तो उनकी भारत यात्रा रद्द कर दी जाएगी।

क्वाड पर छाए संकट के बादल

हालांकि अभी भी इस बात की कोई निश्चितता नहीं है, कि क्वाड बैठक भारत में दिन का उजाला देख पाएगी या नहीं, विश्लेषकों का कहना है, कि यह क्वाड की एक तरह की परीक्षा होगी, जिसमें यह देखा जाएगा, कि बाइडेन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस, जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा भारत की यात्रा करते हैं या नहीं।

हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आरोपों के मद्देनजर, ऐसी अटकलें हैं, कि नई दिल्ली में क्वाड बैठक के रास्ते में बाइडेन का व्यस्त कार्यक्रम आड़े आ सकता है।

सिडनी यूनिवर्सिटी के यूनाइटेड स्टेट्स स्टडीज सेंटर के सीईओ माइकल ग्रीन ने अनुमान लगाया है, कि ये आरोप क्वाड के मामले को और अधिक कठिन बना सकते हैं। निक्केई एशिया ने हाल ही में उनके हवाले से कहा, "हमारे 'सामान्य मूल्य' क्वाड के लिए गोंद का एक हिस्सा हैं, लेकिन अब यह तर्क देना पहले की तुलना में कठिन होगा।"

वहीं, भारत में भी खालिस्तान को लेकर अमेरिका के आक्रोश ही है। लोकप्रिय भारतीय विदेश नीति टिप्पणीकार ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "अमेरिका ने फाइनेंशियल टाइम्स में भारत विरोधी स्टोरी को ट्रांसप्लांट किया है, जिसमें सिख अलगाववादी की हत्या की साजिश में भारत पर आरोप लगाए गये हैं, जबकि वो अमेरिका की धरती से लगातार भारत के खिलाफ आतंकवादी धमकियां दे रहा है, जिससे भारतीय लोगों के मन में गुस्सा है और शक बढ़ रहा है, कि क्या बाइडेन प्रशासन एक विश्वसनीय भागीदार हो सकता है?"

लिहाजा, मौजूदा हालात में क्वाड के भविष्य पर अंधकारमय बादल मंडरा रहे हैं, जिसे चीन पहले से ही दंतहीन संगठन कहता रहा है। चीन ने हमेशा से कहा है, कि क्वाड कभी कामयाब नहीं हो पाएगा।

QUAD News

क्वाड को लेकर चीन की भविष्यवाणी

क्वाड का मकसद अब तक बहुत सरल रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन द्वारा अक्सर दोहराया जाने वाला एक बयान इसे सबसे अच्छी तरह से समझाता है, कि "हम एक ऐसा क्षेत्र चाहते हैं, जहां किसी भी देश का प्रभुत्व न हो, और जहां, सभी देश जबरदस्ती से मुक्त हों..."

हालांकि, चीन ने नियमित रूप से इस समूह की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि इसका लक्ष्य बीजिंग है। चीन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया क्वाड का एकमात्र सदस्य है जो एक वास्तविक भौगोलिक इंडो-पैसिफिक राष्ट्र है, जो हिंद और प्रशांत महासागरों की सीमा पर है। बीजिंग ने अमेरिका के इस दावे को चुनौती दी है कि वह एक "इंडो" राष्ट्र है।

संक्षेप में, चीन का तर्क यह है, कि क्वाड समूह राष्ट्रों का एक अपरिभाषित गठबंधन है, जिसे अमेरिका ने चीन को घेरने के अपने अभियान के हिस्से के रूप में इकट्ठा किया है। विश्लेषकों के अनुसार, इसके विपरीत दावों के बावजूद, समूह कुछ हद तक चीन के खिलाफ प्रतिरोध का गढ़ बन गया है। लेकिन, अब सवाल ये हैं, कि क्या खालिस्तानी अलगाववादियों की वजह से अमेरिका, क्वाड संगठन को कुर्बान कर देगा?

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+