इजरायल-फिलिस्तीन में विवाद सुलझाने का भारत ने पेश किया फॉर्मूला, जानें संयुक्त राष्ट्र में क्या कहा?
इजरायल और फिलिस्तीन लंबे वक्त से विवादों में हैं और दोनों देशों के बीच कई बार जंग हो चुके हैं। इजरायल पर अकसर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहते हैं, जबकि फिलिस्तीन की तरफ से रॉकेट दागे जाते हैं।
Indian on Israel Palestine Conflict at UN: संयुक्त राष्ट्र में आज भारत ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद सुलधझाने को लेकर अपना पक्ष रखा है और भारत ने जोर देकर कहा है, कि दो-राज्य समाधान का कोई विकल्प इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति की गारंटी नहीं दे सकता है। भारत ने यूएन में कहा कि, सीधी बातचीत ही शांति का एकमात्र रास्ता है।

भारत ने सुझाया फॉर्मूला
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारतीय स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि, "इजरायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति की गारंटी के लिए दो-राज्य समाधान का कोई विकल्प नहीं है और सीधी बातचीत ही एकमात्र रास्ता है, जो हमें वहां ले जा सकता है।" उन्होंने कहा कि,"भारत ने हिंसा के सभी कृत्यों के खिलाफ लगातार वकालत की है।" भारत की स्थायी प्रतिनिधि कंबोज ने दोहराया कि, भारत वेस्ट बैंक, यरुशलम और काजी में विकास को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। हिंसक हमलों और नागरिकों की हत्या ने कई फिलिस्तीनी और इजरायली लोगों की जान ले ली है। मध्य पूर्व पर यूएनएससी को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि, तबाही और उकसावे की कार्रवाई भी जारी है।

'हिंसा के कृत्यों को रोकने का हो काम'
भारत की स्थाई प्रतिनिधि ने यूएन में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि, "संकल्प 2334 को इस परिषद द्वारा दो-राज्य समाधान के क्षरण को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए अपनाया गया था। यह दोनों पार्टियों को नागरिकों के खिलाफ हिंसा के कृत्यों को रोकने के लिए कहता है और जोर देता है, कि सभी निपटान गतिविधियों को बंद करना चाहिए और आवश्यकता को रेखांकित करना चाहिए। विश्वसनीय वार्ता शुरू करने के लिए सामूहिक प्रयास करें।" आपको बता दें कि, यूएनएससी ने साल 2016 में 14 मतों से संकल्प 2334 को अपनाया गया था, जहां परिषद ने अपनी मांग दोहराई, कि इजरायल पूर्वी यरुशलम सहित कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में सभी बंदोबस्त गतिविधियों को तुरंत और पूरी तरह से बंद कर दे। संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा कि, यह रेखांकित किया गया है कि यह 4 जून 1967 की रेखाओं में किसी भी बदलाव को मान्यता नहीं देगा, जिसमें यरुशलम के संबंध में दोनों पक्षों द्वारा बातचीत के माध्यम से सहमति व्यक्त की गई है।

'दोनों पक्षों से शांति बरतने का अनुरोध'
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नागरिकों के खिलाफ हिंसा के सभी कृत्यों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया है। जिसमें आतंक के कृत्यों के साथ-साथ उकसावे और विनाश के सभी कार्य शामिल हैं। इसने आतंकवाद से निपटने के लिए चल रहे प्रयासों को मजबूत करने, मौजूदा सुरक्षा समन्वय बढ़ाने, और आतंकवाद के सभी कृत्यों की स्पष्ट रूप से निंदा करने का आह्वान किया है। परिषद ने दोनों पक्षों से शांत और संयम बरतने और उकसाने वाले कदम उठाने से परहेज करने के लिए कहा है। यूएनएससी ने दोनों पक्षों से कहा कि, उकसावे और भड़काऊ बयानबाजी से बचा जाए, ताकि जमीन पर तनाव की स्थिति को कम किया जा सके और विश्वास का पुनर्निर्माण किया जा सके।












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