Explainer Defence Budget: चीन से 10 गुना कम डिफेंस बजट, आत्मनिर्भरता और हथियारों की जरूरत पूरा कर पाएगा भारत?
Defence Budget Explainer: मोदी सरकार की तरफ से साल 2024-25 के लिए पेश किए गये बजट में प्रस्ताव रखा गया है, कि भारत अपनी सेना पर करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर (6.21 ट्रिलियन रुपये) खर्च किया जाएगा, जिसमें 20 अरब अमेरिकी डॉलर (1.72 ट्रिलियन रुपये) का मॉडर्नाइजेशन बजट भी शामिल है।
मॉडर्नाइजेशन यानि आधुनिकीकरण का पैसा, लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों और मशीनीकृत लड़ाकू वाहनों की खरीद पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा, बाकी धनराशि मौजूदा हथियारों के मेंटिनेंस और सैन्य कर्मियों के वेतन और पेंशन पर खर्च किए जाएंगे।

लिहाजा, आइये जानते हैं, कि इन पैसों में भारत सरकार के पास अपनी सेना के मॉडर्नाइजेशन के साथ साथ डिफेंस की तमाम जरूरतों को पूरा करने के लिए कितना विकल्प बचता है, जिसमें भारतीय वायुसेना के लिए स्टील्फ फाइटर जेट की जरूरतों को पूरा करना, नेवी के लिए पनडुब्बियों की जरूरत पूरा करना और चीन-पाकिस्तान से तनाव के बीच सीमा पर अपनी ताकत को और बढ़ाना शामिल है।
भारतीय डिफेंस बजट का विश्लेषण
अमेरिकी थिंक-टैंक, द हेरिटेज फाउंडेशन ने सितंबर 2023 के अपने स्टडी में आकलन किया है, कि 75 अरब डॉलर का भारतीय सैन्य बजट, चीन के 700 अरब डॉलर के अनौपचारिक खर्च से दस गुना कम होने का अनुमान है। संयुक्त राज्य अमेरिका रक्षा पर 800 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करता है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 1 फरवरी को भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट डिफेंस सेक्टर के लिए आवंटित किए हैं, वो "वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य" को पूरा करेगा और "आत्मनिर्भरता और हथियार निर्यात को बढ़ावा देने के दोहरे उद्देश्यों" को पूरा करेगा।"
यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट था, और इसलिए इसे बोलचाल की भाषा में "अंतरिम बजट" या आधिकारिक तौर पर "वोट ऑन अकाउंट" के रूप में भी जाना जाता है।
वहीं, लोकसभा चुनाव के बाद, जब नई सरकार का गठन होगा, तो फिर पूर्णकालिक बजट बनाया जाएगा और इस बात की संभावना है, कि संसद के मॉनसून सेशन में पेश होने वाले पूर्ण बजट में रक्षा बजट के लिए नई घोषणाएं की जाएं।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा गया है, कि 2024-25 का अंतरिम रक्षा बजट भारत सरकार के कुल बजट का 13.04% है। बयान में आगे कहा गया है, कि "रक्षा मंत्रालय को बाकी के तमाम मंत्रालयों के बीच सबसे ज्यादा आवंटन प्राप्त होता रहता है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा के लिए बजटीय आवंटन वित्त वर्ष 2022-23 के आवंटन से लगभग एक लाख करोड़ (INR 1 ट्रिलियन) या 18.35% ज्यादा है और वित्त वर्ष 23-24 के आवंटन से 4.72% ज्यादा है।
भारत सरकार की तरफ से जो बजट आवंटित किया गया है, उसमें से 27.67% का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नए हथियारों और सैन्य प्रणालियों को खरीदने के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर खर्च में जाएगा, जबकि 14.82% हथियारों और गोला-बारूद के रखरखाव और ऑपरेशनल तैयारियों पर खर्च किया जाएगा, 30.68% हिस्सा रक्षा कर्मियों के वेतन और भत्ते के लिए, सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन पर 22.72% खर्च किया जाएगा, वहीं नागरिक संगठनों के लिए ये खर्च 4.11% है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर में खर्च ज्यादा
बहुत सरलता से समझें, तो डिफेंस बजट के तीन हिस्से होते हैं, रेवेन्यू, कैपिटल एक्सपैंडिचर और पेंशन फंड।
इस साल के बजट में कैपिटल एक्वीजिशन यानि हथियारों की खरीददारी के लिए 1.62 लाख करोड़ रुपये दिए गये हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 10 हजार 231 करोड़ रुपये ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने डिफेंस बजट में हथियारों की खरीद के लिए 1 लाख 52 लाख करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था।
खासकर इस बजट में फिफ्थ जेनरेशनल फाइटर जेट और पनडुब्बियों के लिए ज्यादा खर्च किए जाने की संभावना है। जिसके लिए एयरफोर्स को 57 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं, जबकि इंडियन नेवी के लिए 52 हजार करोड़ रुपये और इंडियन आर्मी के लिए 37 हजार करोड़ रुपये जारी किए गये हैं, जिनसे गोला बारूद और दूसरे तरह के हथियार खरीदे जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की तीनों सेनाओं की योजना मिसाइल डिफेंस सिस्टम, अत्याधुनिक काउंटर वीपन्स, एडवांस टेक्नोलॉजी वाले घातक हथियार, फाइटर जेट्स, जहाज, ड्रोन खरीदने की है।
जबकि, अगले वित्त वर्ष में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम के साथ छह पारंपरिक पनडुब्बियां, 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू जेट, तीन सशस्त्र बलों के लिए प्रीडेटर ड्रोन वेरिएंट और युद्धपोत खरीदने की योजना शामिल हो सकते हैं।
रेवेन्यू में खर्च को समझिए
भारत सरकार ने तीनों सेनाओं के जवानों को सैलरी देने में 2 लाख 82 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले, 12 हजार 652 करोड़ रुपये ज्यादा हैं। पिछले वित्त वर्ष में सैलरी देने में रेवेन्यू बजट के लिए 2.77 लाख करोड़ रुपए सरकार की तरफ से दिए गये थे।
पेंशन में कितना खर्च
भारत सरकार की तरफ से इस साल सेना के रिटायर्ड जवानों के पेंशन पर 1 लाख 41 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया गया है। जबकि, पिछले साल सरकार की तरफ से पेंशन देने के लिए 1 लाख 38 हजार करोड़ रुपये दिए गये थे। यानि, इस साल 3 हजार करोड़ रुपये ज्यादा दिए गये हैं।
इस साल के बजटीय विश्लेषण से पता चलता है, कि इंडियन आर्मी को पेंशन के लिए सबसे ज्यादा एक लाख 27 हजार 36 करोड़ रुपये दिए गये हैं, जबकि एयरफोर्स को 13 हजार 813 करोड़ रुपये और इंडियन नेवी को 7 हजार 731 करोड़ रुपये जारी किए गये हैं। आंकड़ों से पता चलता है, कि भारत में रिटायर्ड सैनिकों की संख्या करीब 26 लाख है।












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