क्या अमेरिका को 2024 में मिलेगा पहला भारतीय मूल का राष्ट्रपति? रो खन्ना के नाम पर चर्चा तेज
रो खन्ना भारत के बहुत बड़े समर्थक माने जाते हैं और भारत को काट्सा प्रतिबंध से बचाने के लिए उन्होंने ही अमेरिकी संसद में बिल पेश किया था और फिर उसे पारित करवाया था।

Ro Khanna US President Race: अमेरिका में पिछले राष्ट्रपति चुनाव के बाद पहली बार भारतीय मूल की एक महिला कमला हैरिस अमेरिका की उप-राष्ट्रपति बनीं, लेकिन क्या 2024 वो साल होने वाला है, जब भारतीय मूल का कोई नेता अमेरिका का राष्ट्रपति बनेगा? भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का नाम अमेरिका की राजनीति में काफी तेजी से ऊपर आया है और जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद रो खन्ना ने अमेरिकी सीनेट में अपनी सीट तलाशनी शुरू कर दी है।

अमेरिका में रो खन्ना पर चर्चा तेज
डेमोक्रेटिक पार्टी से सीनेटर बनने की रेस में शामिल होने वाले रो खन्ना को लेकर कहा जा रहा है, कि उनका राजनीतिक मकसद काफी ऊंचा हो सकता है। अमेरिकी समाचार आउटलेट पोलिटिको ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है, कि भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए एक मजदूर दावेदार हो सकते हैं, लेकिन अमेरिकी अखबार ने आगे ये लिखा है, कि अगर जो बाइडेन साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी नहीं जताते हैं, तो रो खन्ना राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर जो बाइडेन डेमोक्रेट के टिकट पर अगले राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी नहीं जताते हैं, तो रो खन्ना एक "प्रशंसनीय उम्मीदवार" हो सकते हैं।

रो खन्ना बन सकते हैं उम्मीदवार
पोलिटिको ने अपनी रिपोर्ट में एक डेमोक्रेटिक रणनीतिकार, मार्क लोंगबॉघ के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि रो खन्ना अमेरिका के एक बेहतरीन सीनेटर भी बनेंगे। आपको बता दें कि, मार्क लोंगबॉघ वो डेमोक्रेटिक रणनीतिकार हैं, जिन्होंने रो खन्ना के लिए मीडिया कंसल्टिंग का काम किया था। हालांकि, इससे पहले खुद रो खन्ना कह चुके हैं, कि वो अगले राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन का समर्थ करेंगे, अगर वो चुनाव में लड़ने का फैसला करते हैं। रो खन्ना ने अमेरिकी मीडिया पोलिटिको को बताया, कि डेमोक्रेटिक पार्टी के बन्री सैंडर्स के समर्थकों ने उनसे मुलाकात की थी और उन्हें सीनेट के लिए अपनी उम्मीदवारी जताने का आग्रह किया था। पोलिटिको के मुताबिक, रो खन्ना ने अखबार से कहा, कि वो अगले कुछ महीनों में सीनेटर के लिए अपनी दावेदारी जता सकते हैं।

कौन हैं भारतीय मूल के नेता रो खन्ना?
आपको बता दें कि, रो खन्ना भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद होने के साथ साथ बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य और सांसद भी हैं। इसके साथ ही वे चर्चित वकील और 'हाउस आर्म्ड सर्विस एक्ट' के सदस्य भी हैं। वह 2017 से कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं। उनका जन्म 13 सितंबर 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता पंजाब से यू.एस. में आकर बस गए। रो खन्ना के पिता एक केमिकल इंजीनियर हैं, जिन्होंने भारत में ही IIT से पढ़ाई की है और फिर मिशिगन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। उनकी मां एक टीचर रही हैं। रो खन्ना ने 8 अगस्त 2009 से अगस्त 2011 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में अमेरिका के वाणिज्य विभाग में उप सहायक सचिव के रूप में भी काम किया है।

भारत के हित की हमेशा करते हैं बात
आपको बता दें कि, अमेरिकी कांग्रेस में रो खन्ना काफी आक्रामक तरीके से भारत के पक्ष में राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं और पिछले साल उन्होंने ही अमेरिकी कांग्रेस में एक बिल पेश किया था, जिसमें रूसी हथियार खरीदने के बाद भारत के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने, और काट्सा कानून को लागू नहीं करने का प्रस्ताव रखा था। इस बिल को बाद में अमेरिकी कांग्रेस में पास किया गया था और भारत को रूसी हथियार खरीदने पर बहुत बड़ी राहत मिल गई थी। इसके अलावा, पिछले साल जुलाई महीने में सांसद रो खन्ना ने कहा था, कि अमेरिका, भारत को नाटो प्लस में जोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा था, कि अगर भारत को नाटो प्लस में शामिल किया जाता है, तो देश को अमेरिका के साथ रक्षा-सुरक्षा से आसानी से जोड़ा जा सकेगा।
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भारत के साथ करना चाहते हैं संबंध मजबूत
आपको बता दें, कि पिछसे साल सांसद रो खन्ना ने कहा था, कि 'भारत-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य के हितों को आगे बढ़ाने के लिए और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा था, कि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच यह साझेदारी महत्वपूर्ण है और भारत-प्रशांत क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के जवाब में इसे मजबूत करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा था, कि संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। रो खन्ना के इस संशोधन प्रस्ताव में, 'चीन से खतरों के बीच रूसी हथियारों पर निर्भरता नाम से एक चैप्टर हैं, जिसमें कहा गया है कि, भारतीय सीमा पर चीनी आक्रामकता का गंभीर खतरा है चीन की सरकार के द्वारा भारत-चीन सीमा पर चीन अपनी सैन्य आक्रामकता को लगातार बढ़ा रहा है।'












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