UNGA में भारत ने दिया रूस को जोर का झटका, यूक्रेन गदगद, पुतिन के प्रस्ताव के खिलाफ डाला वोट
रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंजिया ने कहा कि, "हमें संयुक्त राष्ट्र में अपना पक्ष रखने के लिए फ्लोर नहीं दिया गया (हमारी सीट का इंडिकेटर लाइट अभी भी ऑन है)।"
Russia-Ukraine War: यूक्रेन में पुतिन के सबसे बड़े मिशन को भारत ने जोर का झटका दिया है संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने यूक्रेन के चार क्षेत्रों रूस में मिलाने के खिलाफ वोट डाला है। पिछले दिनों रूस ने यूक्रेन के चार प्रातों में जनमत संग्रह करवाने के बाद उन्हें अपने देश में विलय करने की घोषणा की थी, जिसको लेकर यूनाइटेड नेशंस में अवैध कब्जे की निंदा करने के लिए एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसको लेकर रूस ने गुप्त मतदान की मांग की थी, जिसमें भारत ने रूस के खिलाफ वोट डाला है। भारत ने 100 से ज्यादा देशों के साथ सार्वजनिक मतदान का समर्थन किया है, जबकि रूस गुप्त मतदान चाहता था।

अल्बानिया ने पेश किया था प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों ने सोमवार को अल्बानिया के उस प्रस्ताव पर मतदान किया, जिसमें यूक्रेन के चार प्रांतों को रूस में जबरन मिलाने और जनमत संग्रह कराने की निंदा की गई थी। आपको बता दें कि, पिछले महीने रूस ने यूक्रेन के चार क्षेत्रों डोनेट्स्क, खेरसॉन, लुहान्स्क, और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में जनमत संग्रह कराने के बाद उनके रूस में विलय की घोषणा कर दी थी और रूस की इस कार्रवाई की निंदा यूएनजीए में की गी थी। रूस ने मांग की थी कि प्रस्ताव पर गुप्त मतदान द्वारा मतदान किया जाए, लेकिन भारत ने रूस के गुप्च मतदान के खिलाफ वोट डाला है। इस मतदान के दौरान भारत समेत 107 देशों ने रूस के खिलाफ मतदान किया, लिहाजा बहुमत से रूस की गुप्त मतदान की मांग खारिज कर दी गई।

किन देशों ने दिया रूस का साथ
संयुक्त राष्ट्र में सिर्फ 13 देशों ने ही गुप्त मतदान के लिए रूस के आह्वान के पक्ष में मतदान किया जबकि 39 देशों ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया। रूस और चीन उन देशों में शामिल थे जिन्होंने वोट नहीं दिया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग में अपने प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद रूस ने महासभा के अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अपील की है। रूस की अपील को लेकर यूएनजीए में एक रिकॉर्ड वोट किया गया और भारत उन 100 देशों में शामिल था जिन्होंने मास्को की अपील के खिलाफ मतदान किया। अपील खारिज हो जाने के बाद रूस ने तब अल्बानिया द्वारा रिकॉर्ड किए गचये वोट के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव को अपनाने के फैसले पर पर पुनर्विचार की मांग की। रूस के पुनर्विचार पर वोटिंग के दौरा भारत सहित 104 देशों ने इस तरह के पुनर्विचार के खिलाफ मतदान करने के बाद प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं करने का फैसला किया, जबकि 16 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया और 34 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र में मिली एक के बाद एक हार के बाद यूएनजीए के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंजिया ने कहा कि, संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता "एक अपमानजनक धोखाधड़ी का गवाह बन गई है जिसमें दुर्भाग्य से महासभा के अध्यक्ष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।"

भड़के रूस ने क्या कहा?
रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंजिया ने कहा कि, "हमें संयुक्त राष्ट्र में अपना पक्ष रखने के लिए फ्लोर नहीं दिया गया (हमारी सीट का इंडिकेटर लाइट अभी भी ऑन है)।" उन्होंने कहा कि, "हमारे बयान को विकृत किया गया और अब संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्यों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार को भी लूट लिया जा रहा है"। उन्होंने कहा कि, "यह एक अभूतपूर्व हेरफेर है जो आम सभा और समग्र रूप से संयुक्त राष्ट्र के अधिकार को कम करता है। बेशक, ऐसी परिस्थितियों में हमने वोट में हिस्सा नहीं लेने का विकल्प चुना है।" आपको बता दें कि, पिछले महीने भारत ने यूक्रेन के साथ जारी भारी तनाव के बीच वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था, जबकि, रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया था, जो मॉस्को के "अवैध जनमत संग्रह" की निंदा करने के लिए अमेरिका और अल्बानिया ने एक साथ पेश किया था, जिसमें चार यूक्रेनी क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए रूस की निंदा की गई थी।












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