इस साल शुरू हो जाएगी भारत-अमेरिका फाइटर जेट डील, जानिए कैसे बनेगी विमानों का इंजन बनाने वाली फैक्ट्री?
India-US Fighter jet engine deal: अमेरिका के साथ फाइटर जेट इंजन टेक्नोलॉजी डील, जिसकी घोषणा पिछले साल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन डीसी यात्रा के दौरान की गई थी, वो डील इस साल एक्टिवेट हो जाएगी, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ संयुक्त रूप से भारत में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का एक विस्तृत तकनीकी प्रस्ताव है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जीई एयरोस्पेस डिफेंस एंड सिस्टम्स के अध्यक्ष एमी गौडर ने कहा है, कि कि टेक्नोलॉजी को इस साल की शुरुआत में भारत सरकार की सरकारी कंपनी के साथ शेयर किया जाएगा।

इस साल डील एक्टिवेट
इकोनॉमिक टाइम्स को दिए गये इंटरव्यू में शीर्ष कार्यकारी एमी गौडर ने कहा, कि एचएएल को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का दायरा जीई ने अन्य भागीदारों के साथ जो किया है, उससे ज्यादा होगा और भारत से इंजन और घटकों को निर्यात करने के विकल्प भी मेज पर मजबूती से मौजूद हैं।
उन्होंने कहा, कि जीई भारत के एडवांस मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के लिए अगली पीढ़ी के इंजनों के विकास में भाग लेने के लिए उत्सुक है और जीई अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा तकनीकी लाभ रखती है।
जीई एविएशन के F414 INS6 इंजनों को भारत में एचएएल के साथ मुख्य भागीदार के रूप में बनाने के ऐतिहासिक समझौते पर बोलते हुए, जिसकी घोषणा मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान की गई थी, गौडर ने कहा, कि एक विस्तृत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा, कि "इस साल की शुरुआत में, हमारे पास उनके लिए एक प्रस्ताव होगा और इससे एचएएल और सरकार के साथ समझौते को औपचारिक रूप दिया जाएगा। को-प्रोडक्शन शुरू करने के लिए हम अपने इंजीनियरों और सप्लाई चेन संसाधनों को लाएंगे। इस पूरे काम में इस साल का ज्यादा समय निकल जाएगा।"
कब तक शुरू होगा इंजन का प्रोडक्शन?
इंजन उत्पादन शुरू करने की समय सीमा भारतीय वायु सेना और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी, लेकिन व्यापक योजना तीन साल के भीतर डिलीवरी की तैयारी करने की है।
करीब एक अरब डॉलर मूल्य के इस सौदे से F414 इंजनों के लिए 80% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया जाएगा, जिसमें इंजन के गर्म सिरे के लिए कोटिंग के साथ-साथ क्रिस्टल ब्लेड और लेजर ड्रिलिंग तकनीक शामिल होगी।
ये इंजन हल्के लड़ाकू विमान के MK-2 वेरिएंट के साथ-साथ एएमसीए के शुरुआती बैचों को भी ताक प्रदान करेंगे। वर्तमान में, GE के F404 इंजन निर्माणाधीन LCA Mk1A संस्करण के साथ-साथ IAF के सेवारत LCA लड़ाकू विमानों को भी पावर प्रदान करते हैं।
गौडर ने कहा, कि जीई के पास टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का अनुभव है, लेकिन उसने इसे इस हद तक कभी नहीं किया है। उन्होंने कहा, "हमने पहले कोरिया और तुर्की के साथ ऐसा किया है, लेकिन इस स्तर तक कभी नहीं। इसलिए, यह भारत के लिए एक बहुत ही विशेष टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है। उनके (एचएएल) पास दुनिया भर के किसी भी अन्य भागीदार की तुलना में सबसे ज्यादा सामग्री होगी।"
कम से कम 110 किलो न्यूटन क्षमता वाले अगली पीढ़ी के लड़ाकू इंजनों की भारतीय आवश्यकता के लिए अमेरिकी कंपनी की संभावनाओं पर गौडर ने कहा, कि जीई भारत सरकार के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है।
उन्होंने कहा, "हम (एएमसीए के) एमके1 वेरिएंट के प्रोटोटाइप का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। एफ-414 को जोर, क्षमता और प्रदर्शन में बढ़ना होगा, और यह भारत के लिए फायदेमंद होगा और विमान के लिए बहुत उपयुक्त होगा।" उन्होंने इस बात की संभावना जताई, कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के बाद आने वाले समय में भारत अगली पीढ़ी के विमानों के इंजन निर्माण करने में सक्षम होंगे।












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