विदेशी मुद्रा भंडार खत्म, आपातकाल... बुरी तरह बिगड़ी श्रीलंका की स्थिति, भारत ने लिया बड़ा फैसला
श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने हाल ही में भारतीय एक्ज़िम बैंक से 200 मिलियन डॉलर की अल्पकालिक ऋण सुविधा के माध्यम से भारत से अधिक ईंधन प्राप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
नई दिल्ली/कोलंबो, मई 07: दिवालिएपन की दहलीज पर खड़े श्रीलंका को भीषण आर्थिक संकट से निकालने के लिए भारत ने एक रूपरेखा तैयार की है, क्योंकि अब श्रीलंका के पास सिर्फ 50 मिलियन डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है और देश की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह से भरभराकर गिरने की स्थिति में आ चुकी है। लिहाजा, भारत ने अपने पड़ोसी देश को बचाने के लिए और किसी भी मानवीय संकट में श्रीलंका ना फंले, इसके लिए भारत ने बकायदा एक प्लान तैयार किया है।

मानवीय संकट पर पहला ध्यान
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत श्रीलंका को लगातार आर्थिक मदद देना जारी रखेगा और दोनों देशों की सरकारें फिलहाल इस मुद्दे पर सहमत हुई हैं, कि सबसे पहले मानवीय आवश्यकताओं पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया जाएगा, ताकि देश में भगदड़ की स्थिति ना बनें। जिसके लिए श्रीलंका की सरकार ने भारत से यूरिया की आपूर्ति की मांग की है, ताकि खेती को फिर से पटरी पर लाया जा सके, जो पिछले 2 साल में काफी बर्बाद हो चुकी है, जबसे श्रीलंका की सरकार ने अचानक जैविक खाद से ही खेती को अनिवार्य कर दिया था। वहीं, इससे पहले भारत ने ईंधन, दवाएं और चावल की आपूर्ति भी की है।
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श्रीलंका को 3 अरब डॉलर की मदद
श्रीलंका के मंत्रिमंडल ने हाल ही में भारतीय एक्ज़िम बैंक से 200 मिलियन डॉलर की अल्पकालिक ऋण सुविधा के माध्यम से भारत से अधिक ईंधन प्राप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। भारत ने जनवरी 2022 से मुद्रा की अदला-बदली, आवश्यक वस्तुओं के लिए क्रेडिट लाइन और श्रीलंका अचानक नकदी संकट में ना फंस जाए, इसके लिए भारत ने श्रीलंका को 3 अरब डॉलर की मदद का विस्तार किया है। हालांकि, श्रीलंका के घरेलू और राजनीतिक हालात भी काफी खराब हो चुके हैं और राजपक्षे सरकार की इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल शुरू हो चुके हैं और शुक्रवार को श्रीलंका का बस और ट्रेन नेटवर्क ठप हो गया था, जबकि कार्यालय और कारखाने खाली थे। वहीं, राष्ट्रपति ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए पूरे देश में दोबारा आपातकाल लगा दिया है।

विदेशी मुद्रा भंडार करीब करीब खत्म
श्रीलंका के वित्त मंत्री ने बुधवार को कहा कि, श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का उपयोग करने के लिए योग्य विदेशी भंडार 50 मिलियन डॉलर से कम हो चुक है। वित्त मंत्री अली साबरी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत से श्रीलंका लौटने के बाद संसद में बोल रहे थे। देश की संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, कोई भी आईएमएफ बचाव कार्यक्रम, जिसमें आवश्यक वस्तुओं की कमी को तत्काल हल करने के लिए आवश्यक तेजी से वित्तपोषण साधन शामिल है, लेनदारों के साथ ऋण पुनर्गठन पर बातचीत पर निर्भर करेगा और इसे लागू करने में छह महीने लगेंगे। वहीं, श्रीलंका को सिर्फ इस साल 7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है, जबकि साल 2026 तक श्रीलंका को 25 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। जबकि, उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 50 मिलियन डॉलर हैं।

श्रीलंका की मुश्किल परिस्थितियां
श्रीलंका के वित्त मंत्री सबरी, जिन्होंने 4 अप्रैल को अपनी नियुक्ति के एक दिन बाद ही वित्तमंत्री का पद छोड़ दिया था, उन्हें आईएमएफ से कर्ज पर बात करने के लिए भेजा गया था, जहां भारत श्रीलंका की मदद कर रहा था। उन्होंने देश की संसद को चेतावनी देते हुए बताया कि, 'हम ढाई गुना अधिक खर्च कर चुके हैं'। उन्होंने कहा कि, ‘2021 में कुल आय 1,500 बिलियन (श्रीलंकाई) रुपये थी... जबकि, खर्च 3,522 बिलियन रुपये था... जो एक समस्या है'। उन्होंने कहा कि, ‘आईएमएफ अलादीन का जादू का चिराग नहीं है"। आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते विश्व बैंक ने कहा था, कि वह श्रीलंका की मदद के लिए 600 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान करेगा।

श्रीलंका में कम हो गये टैक्सपेयर्स
गुरुवार को सबरी ने श्रीलंकन संसद को बताया कि, श्रीलंका ने 2020 और 2021 में लगभग 5 लाख करदाताओं को खो दिया है, क्योंकि खराब समय पर टैक्स कटौती की गई थी। सबरी ने दावा किया कि, महामारी के कारण लंबे समय तक और रुक-रुक कर होने वाले लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को वह हासिल करने से रोक दिया, जिसकी मूल रूप से टैक्स कटौती के विकल्प के तौर पर उम्मीद थी। इन सबके बीच देश में जनता का विद्रोह तेज हो गया है। श्रीलंका में आर्थिक संकट से ऐसे हालात हो गए हैं कि महंगाई ने आसमान छू लिया है। पेट्रोल-डीजल सहित जरूरत के सामानों के दाम अब हद पार कर चुके हैं। देश में मेडिकल संकट आ चुका है। इस बीच श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने आधी रात से आपातकाल का ऐलान किया है।

श्रीलंका में आपातकाल का ऐलान
श्रीलंका की स्थिति पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन देश को अपनी खराब नीतियों की वजह से दिवालिएपन की दहलीज पर ला चुके राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे अपनी गद्दी से उतरने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि पूरे देश में भीषण प्रदर्शन किए जा रहे हैं। जिससे घबराकर राष्ट्रपति ने आधी रात से आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने देश में अशांति के बीच पांच सप्ताह में दूसरी बार आपातकाल की घोषणा की। यह 6 मई की मध्यरात्रि से पूरे श्रीलंका में लागू हो गया। बता दें कि इससे पहले भी श्रीलंका में आर्थिक सकंट की वजह से ही आपातकाल लगाया गया था। तब चार अप्रैल को देश में इमरजेंसी लागू की गई थी।
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