भीषण गर्मी झुलसा सकती है भारत की अर्थव्यवस्था, देश की जीडीपी पर हो सकता है असर, डराने वाली स्टडी
स्टडी में कहा गया है, कि ऐसा नहीं है कि भारत के पास मजबूत रोडमैप नहीं है, बल्कि देखना ये होगा, कि उन प्लान को अंजाम में कैसे लाया जाता है।

India's heatwave Trouble Economy: भारत में पिछले करीब एक महीने से भीषण गर्मी पड़ रही है और धूप इतनी निकल रही है, कि भारी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं। महाराष्ट्र में पिछसे हफ्ते ही लू लगने से दर्जन भर से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। वहीं, एक नए स्टडी रिपोर्ट से पता चलता है, कि भीषण गर्मी की लहरें भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर "अभूतपूर्व बोझ" डाल रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि भीषण गर्मी की वजह जलवायु परिवर्तन है, जो सरकार के गरीबी, असमानता और बीमारी को कम करने की कोशिश पर गंभीर असर डाल रहा है।
भारत में गर्मी पर डराने वाली रिपोर्ट
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के रमित देबनाथ के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों के एक दल ने भारत में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है, कि 1992 के बाद से अत्यधिक गर्मी की वजह से 24,000 से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं और साथ ही वायु प्रदूषण और उत्तर भारत में हिमनदों के पिघलने की घटनाओं में तेजी आई है।
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रमित देबनाथ ने कहा, कि "भारत अब कई तरह से जलवायु खतरों की टक्कर का सामना कर रहा है।" पिछले साल जनवरी से अक्टूबर तक भारत में लगभग हर दिन मौसम अपने चरम पर रहा। लिहाजा, अत्यधिक गर्मी भारत की 1.4 अरब की आबादी में से करीब 80 प्रतिशत आबादी को खतरे में डाल रही है।

स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है, कि "भारत की भीषण गर्मी की वजह से भारत में मौतों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है, इसके साथ ही, स्कूलों के बंद होने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और इसकी वजह से फसलों के उत्पादन पर भी गंभीर असर हुआ है, लेकिन देश की सरकारों ने इन स्थितियों की गंभीरता को कम करके आंका है।"
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए देबनाथ ने बताया, कि "यह पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण था, कि हम लगातार चरम घटनाओं के लिए कमजोरियों को कैसे मापते हैं।" उन्होंने कहा, कि भारत सरकार की "जलवायु भेद्यता सूचकांक" खुद मौसम के प्रभाव को कम करके आंकता है, जबकि हीटवेभ का असर लगातार और बार बार विकास कार्यक्रमों पर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी, कि भारत के कुल क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत हिस्सा अब अत्यधिक गर्मी के खतरे वाले क्षेत्रों में है और देश इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है।
'सिर्फ पैकेज जारी करने से नहीं होगा समधान'
उन्होंने कहा, "भारत पहले ही गर्मी कम करने के मामले में काफी कुछ कर चुका है और अब वास्तव में भारत में गर्मी के नाम पर आपदा पैकेज जारी किया जाता है, लेकिन इससे फायदा नहीं होगा और भारत को दूरदर्शी प्लान बनाने की जरूरत है।"
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा, कि "कागज पर जो अनुकूलन उपाय किए जा रहे हैं, वे काफी पर्याप्त हैं ... और मुझे लगता है कि उनके पास एक बहुत मजबूत ठोस योजना भी है, लेकिन यह उसपर निर्भर करता है, कि उन्हें कैसे लागू किया जाता है।"

शोधकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है, की हीटवेभ भारत सरकार की गरीबी, भूख और असमानता को हटाने वाली कोशिशों को कमजोर कर रही हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की 17वीं सूची का प्रमुख उद्येश्य है। वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है, कि अत्यधिक हीटवेभ भारत की 15 प्रतिशत वर्कफोर्स की 'बाहर जाकर काम करने की क्षमता' को कम कर सकती है और करीब 48 करोड़ लोगों की 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' को गिरा सकती है, जिससे भारत की कुल जीडीपी का 2.8 प्रतिशत नुकसान हो सकता है।
पिछले साल पर्यावरण समूहों द्वारा प्रकाशित क्लाइमेट ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में भी कहा गया है, कि अत्यधिक उच्च तापमान के कारण भारत की उत्पादकता में गिरावट आने से भारत को अपने सकल घरेलू उत्पाद का 5.4 प्रतिशत पहले ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हीटवेभ बना भारत के लिए चुनौती
इस साल भारत पहले से ही अत्यधिक तापमान का सामना कर रहा है, कुछ राज्यों में गर्मी की एक और लहर आना बाकी है। रविवार को, मुंबई के बाहरी इलाके में महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित एक ऑउटडोर कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य बीमार पड़ गए। स्थानीय मीडिया ने बताया, कि दिन का तापमान उच्च स्तर की आर्द्रता के साथ 38 डिग्री सेल्सियस (100 फ़ारेनहाइट) के करीब पहुंच गया था।
वहीं, भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल ने चिलचिलाती गर्मी के कारण इस सप्ताह सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया है। इस साल फरवरी महीने को पिछले 122 साल में भारत में सबसे गर्म महीने के रूप में दर्ज किया गया है। नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के एसोसिएट फेलो, आदित्य वलियाथन पिल्लई ने कहा, "अध्ययन में प्रकाश डाला गया है, कि गर्मी का खतरा, जोखिम की एक अतिरिक्त परत है जो काफी तेजी से उभर रहा है"।

पिल्लई ने हाल ही में गर्मी के खिलाफ भारत सरकार की तैयारियों का अध्ययन किया है। उन्होंने कहा, कि नया शोध बढ़ती गर्मी और भारत के विकास पर इसके परिणामों के बीच उपयोगी संबंध बनाता है, लेकिन अध्ययन के डेटासेट - जो केवल पिछले साल अप्रैल में तापमान को देखते हैं, वो सीमित हैं। उन्होंने कहा, कि फिर भी यह बताता है, कि भारत की जनसंख्या पर गर्मी के परिणामों पर अधिक शोध प्रकाशित हो रहे हैं।
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