श्रीलंका को और आर्थिक मदद देने पर रोक लगाएगा भारत, चीन के साथ मिलकर 'दगाबाजी' करने की सजा?

श्रीलंका और आईएमएफ ने सितंबर की शुरुआत में लगभग 2.9 बिलियन डॉलर के ऋण के लिए एक प्रारंभिक समझौता किया है, जो देश पर आधिकारिक लेनदारों से वित्तीय आश्वासन प्राप्त करने और निजी लेनदारों के साथ बातचीत पर निर्भर है।

नई दिल्ली/कोलंबो, सितंबर 16: समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार श्रीलंका को और मदद नहीं देने पर विचार कर रही है। संकटग्रस्त देश श्रीलंका की मदद के लिए भारत ने सिर्फ इस साल 4 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता दी थी और अब मोदी सरकार इस बात पर विचार कर रही है, कि श्रीलंका को अब और आर्थिक मदद नहीं दी जाएगी। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है, कि आईएमएफ से राहत पैकेज मिलने की हरी झंडी के बाद मोदी सरकार ने अब आर्थिक मदद नहीं देने के फैसले पर विचार कर रही है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि श्रीलंका ने चीन के जासूसी जहाज को अपने हंबनटोटा बंदरगाह पर आने की इजाजत दी थी, जिसको लेकर मोदी सरकार में नाराजगी है।

4 अरब डॉलर की दे चुका है मदद

4 अरब डॉलर की दे चुका है मदद

भारत इस साल अपने दक्षिणी पड़ोसी द्वीप देश श्रीलंका को सबसे बड़ा सहायता दिया है, जो सात दशकों से अधिक समय में अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है और आयात के लिए भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहा है, हालांकि अब स्थिति मई और जुलाई के बीच की तुलना में कम गंभीर है। श्रीलंका के साथ चर्चा की सीधी जानकारी रखने वाले भारत सरकार के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि, "हम पहले ही 3.8 अरब डॉलर की सहायता दे चुके हैं। अब यह आईएमएफ के बारे में है।" उन्होंने कहा कि, "अब हम सहायता देना जारी नहीं रख सकते।" वहीं, श्रीलंकाई सरकार के एक सूत्र ने कहा कि, भारत का निर्णय कोई आश्चर्य की बात नहीं है और नई दिल्ली ने कुछ महीने पहले उन्हें "संकेत" दिया था कि आगे बड़े पैमाने पर समर्थन मिलने वाला है।

नहीं दिया गया आधिकारिक बयान

नहीं दिया गया आधिकारिक बयान

हालांकि, सूत्र ने कहा कि, भारत को इस साल के अंत में होने वाले डोनर कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया जाएगा, जिसे श्रीलंका, चीन जापान और संभवत: दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर आयोजित करने की योजना बना रहा है। वहीं, श्रीलंकाई सरकार के एक अन्य सूत्र ने कहा कि, भारत और श्रीलंका के बीच एक अरब डॉलर की स्वैप अरेंजमेंट और तेल खरीदने के लिए 500 मिलियन डॉलर के क्रेडिट लाइन को लेकर मई महीने में किए गये समझौते ने कम प्रगति की है। सूत्रों ने नाम बताने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थे। वहीं, भारत के वित्त मंत्रालय, और श्रीलंका के वित्त मंत्रालय और उसके केंद्रीय बैंक ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।

श्रीलंका-आईएमएफ में समझौता

श्रीलंका-आईएमएफ में समझौता

श्रीलंका और आईएमएफ ने सितंबर की शुरुआत में लगभग 2.9 बिलियन डॉलर के ऋण के लिए एक प्रारंभिक समझौता किया है, जो देश पर आधिकारिक लेनदारों से वित्तीय आश्वासन प्राप्त करने और निजी लेनदारों के साथ बातचीत पर निर्भर है। श्रीलंकाई सूत्रों में से एक ने कहा कि, "हमारा ध्यान आईएमएफ कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और खुद को इस झंझट से बाहर निकालने पर अधिक है।" वहीं, श्रीलंका सरकार के एक और बड़े सूत्र ने रॉयटर्स को कहा कि, श्रीलंका ने अपने सीमित विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग ईंधन आयात को पूरा करने और उर्वरक, रसोई गैस और दवा सहित अन्य महत्वपूर्ण आयातों के लिए बहुपक्षीय एजेंसियों से वित्त पोषण को फिर से करने के लिए किया है। आपको बता दें कि, श्रीलंका की आबादी 2 करोड़ 20 लाखकी है और देश ईंधन, भोजन और दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी से जूझ रहा है, क्योंकि श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड गिरावट आई है और आयात ठप हो गया है।

चीन के साथ मिलकर दगाबाजी

चीन के साथ मिलकर दगाबाजी

आपको बता दें कि, अगस्त महीने में भारत की घोर आपत्ति के बावजूद श्रीलंका ने चीनी जासूसी जहाज युआन वांग-6 को अपने बंदरगाह हंबनटोटा पर आने की इजाजत दी थी। चीन अपने जासूसी जहाज को हिंद महासागर में इसलिए भेज रहा था, ताकि वो हिंद महासागर में अपने वर्चस्व का प्रदर्शन कर सके और भारत के विरोध के बाद भी श्रीलंका ने चीनी जहाज को आने और अपने बंदरगाह पर रूकने की इजाजत दी थी। वो भी तब, जह संकट के वक्त भारत लगातार श्रीलंका को मदद भेज रहा था। चीनी जहाज का हिंद महासागर में पहुंचना भारत के लिए बड़ा डिप्लोमेटिक झटका माना गया था। इससे पहले भी साल 2014 में भी भारत के लाख विरोध के बावजूद चीन का न्यूक्लियर पनडुब्बी हंबनटोटा पोर्ट पर पहुंचा था और श्रीलंका से भारत के संबंध तनावपूर्ण हो गये थे। लेकिन, इस बार, जब भारत ने कंगाल हो चुके श्रीलंका को भरपूर मदद दी है, उसके बाद भी श्रीलंका ने भारत की चेतावनी को ना सिर्फ अनसुना कर दिया, बल्कि चीनी जहाज का स्वागत करने के लिए दर्जन भर से ज्यादा श्रीलंकन अधिकारी हंबनटोटा पोर्ट पर मौजूद थे।

एक्सपर्ट्स ने उठाए थे सवाल

विदेश और रक्षा मामलों के जानकर ब्रह्मा चेलानी ने गंभीर डिप्लोमेटिक नुकसान बताते हुए, श्रीलंकन बंदरगाह पर चीनी जहाज के पहुंचने की घटना को भारतीय डिप्लोमेसी के मुंह पर एक 'तमाचा' करार दिया है। ब्रह्मा चेलानी ने अपने ट्वीट में लिखा है, कि ''जब श्रीलंका जैसा छोटा और दिवालिया राष्ट्र, हंबनटोटा के वाणिज्यिक बंदरगाह पर एक चीनी सर्विलांस जहाज की मेजबानी कर रहा है, तो ये नई दिल्ली के लिए डिप्लोमेटिक थप्पड़ है, तो यह भारत की विदेश नीति के लिए एक रिमाइंड है और, कि अपने बैकयार्ड में किस तरह से भारत का रणनीतिक प्रभाव घट रहा है।'

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+