भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार में जबरदस्त इजाफा, क्या संबंध सुधारने की तरफ बढ़े दोनों देश?

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने कहा था, कि उनकी सरकार विनाशकारी बाढ़ के कारण भोजन की कमी को दूर करने के लिए भारत से सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ आयात करने पर विचार कर सकती है।

नई दिल्ली/इस्लामाबाद, अगस्त 31: पाकिस्तान के वित्तमंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था, कि देश भारत से जरूरी सामानों के आयात पर विचार कर रहा है, क्योंकि पाकिस्तान के लिए इस वक्त भारत से जरूरी सामानों का आयात करना फायदेमंद होगा, क्योंकि भीषण बाढ़ से देश काफी परेशानी में फंस गया है। लेकिन, मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जून क्वार्टर में देखा गया है, कि भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रेड में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या बिना घोषणा किए दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू हो गया है?

व्यापार में जबरदस्त इजाफा

व्यापार में जबरदस्त इजाफा

पाकिस्तान द्वारा आवश्यक वस्तुओं के लिए भारत के साथ व्यापार फिर से शुरू करने की इच्छा दिखाने के बीच ये रिपोर्ट आई है। जबकि 30 जून को समाप्त हुए क्वार्टर में पता चला है, कि अप्रैल, मई और जून महीने में पाकिस्तान ने कई जरूरी सामानों की आयात में भारी बढ़ोतरी की है। खासकर पाकिस्तान ने चीनी और फार्मास्यूटिकल्स की भारी खरीददारी भारत से की है और पाकिस्तान जाने वाले98 प्रतिशत ट्रकों में यही दोनों सामान थे। भारत और पाकिस्तान के बीच का व्यापार पिछले लंबे अर्से से बंद पड़ा हुआ था, खासकर मोदी सरकार ने जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किया, उसके बाद से तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से व्यापार पर पूर्ण रोक लगा दी थी, हालांकि, दवाओं की खरीददारी जारी रही थी। लेकिन, अब व्यापारिक प्रतिबंधों के बाद भी एक बार फिर से पाकिस्तान ने भारत से चीनी खरीदना शुरू कर दिया है।

शहबाज सरकार ने बदली नीति

शहबाज सरकार ने बदली नीति

विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष व्यापार में वृद्धि के लिए पाकिस्तान में शासन में बदलाव और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को जिम्मेदार ठहरायाहै, जो वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी है। इसने पाकिस्तान को सस्ती आपूर्ति के लिए भारत की ओर देखने के लिए मजबूर किया है। पाकिस्तान का व्यापारी वर्ग लंबे अर्से से भारत के साथ व्यापार को फिर से शुरू करने की मांग कर रहा था, क्योंकि पड़ोसी देश होने की वजह से भारत से खरीददारी पाकिस्तानी व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की जनता के लिए भी फायदेमंद है। भारत से सामान खरीदने पर परिवहन लागत काफी कम आती है, जिससे जरूरी सामानों की कीमत कम हो जाती है, लेकिन अस्थिर और भारत विरोधी राजनीति के चलते कोई भी सरकार ऐसा कदम उठाने से डरती रही है। पूर्व पीएम इमरान खान ने भी अपने शासनकाल में कई बार भारत से व्यापारिक संबंध बहाल करने की कई बार कोशिश की थी, लेकिन घरेलू राजनीतिक दबाव की वजह से उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए, लेकिन शहबाज सरकार ने बिना शोर मचाए भारत से जरूरी सामानों, खासकर चीनी और फार्मास्यूटिकल्स की खरीददारी शुरू कर दी है।

भारत-पाकिस्तान व्यापार

भारत-पाकिस्तान व्यापार

सोमवार (29 अगस्त) को पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने कहा था, कि उनकी सरकार विनाशकारी बाढ़ के कारण भोजन की कमी को दूर करने के लिए भारत से सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ आयात करने पर विचार कर सकती है। वहीं, मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अप्रैल महीने के बाद चीनी और कार्बनिक यौगिकों, और फार्मा उत्पादों के निर्यात में भारी इजाफा हुआ है और दिल्ली ने पिछले साल के मुकाबले इस्लामाबाद को इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 72% ज्यादा इन सामानों की आपूर्ति की है, जो करीब 205 मिलियन डॉलर हो गया। इसकी तुलना में, भारत ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान सिर्फ 513 मिलियन डॉलर का माल निर्यात किया था। जबकि, पाकिस्तान ने भारत से सभी आयात को निलंबित कर दिया था, पाकिस्तान ने 2020 में कोविड महामारी के बाद फार्मा और दवाओं की आपूर्ति की अनुमति दी थी।

चीनी और कॉटन से हटाया प्रतिबंध

चीनी और कॉटन से हटाया प्रतिबंध

पाकिस्तान ने इस साल मार्च महीने में भारतीय चीनी और कॉटन के आयात से प्रतिबंध हटा लिया था, जिसके बाद पाकिस्तानी व्यापारियों ने भारत से चीनी खरीदना शुरू किया और भारत के कुल चीनी निर्यात का 53.3 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पाकिस्तान ने ही खरीद लिया है, जिससे पाकिस्तान में चीनी की कीमतों में काफी कमी आई क्योंकि, परिवहन लागत अचानक काफी कम हो गई, जिससे पाकिस्तान को काफी फायदा हुआ है। पाकिस्तान की इकोनॉमिक कॉर्डिनेशन काउंसिल, जो पाकिस्तान की व्यापार को लेकर फैसले लेने वाली शीर्ष संस्था है, उसने घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए निजी क्षेत्र को भारत से 500,000 टन चीनी आयात करने की अनुमति दी थी। इसके साथ ही, दवाओं के लिए कार्बनिक यौगिकों और कच्चे माल ने कुल निर्यात का 16.4% और फार्मा का हिस्सा 15.5% था। इस्लामाबाद ने दवाओं और फार्मा आपूर्ति के लिए कच्चे माल के आयात की भी इजाजत दे दी है। इसके साथ ही जीरा, पेट्रोलियम उत्पाद, चाय, फल और सब्जियों सहित पाकिस्तान को लगभग 228 वस्तुओं का निर्यात जून क्वार्टर में किया गया है।

भारत ने कितना सामान खरीदा

भारत ने कितना सामान खरीदा

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने जून क्वार्टर में पाकिस्तान से सिर्फ 17.6 मिलियन डॉलर की खरीददारी की, जबकि पिछले पिछले साल जून क्वार्टर में भारत ने पाकिस्तान से सिर्फ 3 लाख 40 हजार डॉलर का ही सामान खरीदा था, जबकि पूरे वित्तवर्ष में भारत ने सिर्फ 2 मिलियन डॉलर का ही सामान खरीदा था। जबकि, इस तिमाही में भारत ने पाकिस्तान से 17.2 मिलियन डॉलर का आयात किया है, जो एक सकारात्माक संकेत है, कि दोनों देशों के बीच के संबंध धीरे धीरे सामान्य होने की तरफ बढ़े हैं। जबकि, ये व्यापार भारत द्वारा पाकिस्तान से आयात पर लगाए गए 200 प्रतिशत शुल्क के बावजूद है। 2019 में भारत ने पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद 1996 में पाकिस्तान को दिया गया 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा वापस ले लिया था, जिसमें लगभग 40 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान मारे गए थे। वहीं, मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को जब इस बाबत पाकिस्तानी उच्चायोग और उद्योद मंत्रालय को मेल कर इस बाबत सवाल पूछा गया, तो उसका कोई जवाब नहीं दिया गया।

व्यापार शुरू होना सकारात्मक संकेत

व्यापार शुरू होना सकारात्मक संकेत

ICRIER की प्रोफेसर निशा तनेजा ने मिंट से कहा कि, पिछले साल लगभग 350 वस्तुओं का कारोबार किया गया था, जो दोनों देशों के बीच अन्योन्याश्रयता को दर्शाता है। यह एक सकारात्मक संकेत है। इसके अलावा, पाकिस्तान में नए शासन के भारत के साथ बेहतर संबंध हो सकते हैं, जो शायद बताता है कि व्यापार में पर्याप्त वृद्धि क्यों हुई है। विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान को प्रतिस्पर्धी दरों पर खाद्य पदार्थों का आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि वह उच्च महंगाई का सामना कर रहा है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण संवेदनशील मूल्य सूचकांक द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति अगस्त में रिकॉर्ड 42.3% पर पहुंच गई है। पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भी कमी आई है और वर्तमान में पाकिस्तान के पास 2 महीने तक ही आयात करने के लिए मुद्रा भंडार बचा है और भारत से सामान खरीदने के पीछे ये एक बड़ी वजह है।

क्या शुरू हो पाएगा सामान्य व्यापार?

क्या शुरू हो पाएगा सामान्य व्यापार?

वहीं, एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के अध्यक्ष विजय कलंत्री ने मिंट से कहा कि, "दोनों देश बातचीत कर रहे हैं, और यह बाढ़ के कारण पाकिस्तान को सहायता के इर्द-गिर्द घूम सकता है। व्यापार तनाव को कम करना पाकिस्तान की मदद करने का एक परिणाम हो सकता है। हालांकि, पाकिस्तान के साथ व्यापारिक मार्ग खोलना एक लंबा रास्ता तय करना है। कुछ वस्तुओं का व्यापार दुबई मार्ग दुबई है, जो अप्रत्यक्ष व्यापार मार्ग है और जब आप अप्रत्यक्ष व्यापार में शामिल होते हैं तो व्यापार की लागत अधिक होती है। इसके बजाय, अगर हम सीधे व्यापार करते हैं, तो इससे व्यवसायों को मदद मिलेगी।" ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या आने वाले वक्त में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध सामान्य हो सकते हैं और क्या जो तनाव दोनों देशों के बीच है, क्या वो कम हो सकता है?

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