भारत ने बनाया दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट, डिफेंस पर खर्च करने वाले टॉप-10 देश कौन हैं?

भारत का पाकिस्तान के साथ सीमा पर थोड़ी-बहुत शांति जरूर है, लेकिन चीन के साथ तनाव हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। भारत, चीन के साथ करीब 3500 किलोमीटर सीमा साक्षा करता है।

INDIA DEFENCE BUDGET

India Defence Budget: भारत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2023-24 के लिए जो बजट पेश किया है, उसमें डिफेंस सेक्टर के लिए 72.6 अरब डॉलर का प्रस्ताव रखा गया है और इसके साथ ही डिफेंस सेक्टर में भारत विश्व का तीसरा सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश बन गया है। भारत सरकार ने पिछले साल के मुकालबे इस साल के डिफेंस बजट में 13 प्रतिशत का इजाफा किया है, जिसका लक्ष्य मुख्य तौर पर चीन के साथ अपनी तनावपूर्ण सीमा पर ज्यादा से ज्यादा लड़ाकू जेट और हथियारों की तैनाती के साथ साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करना है।

भारत का रक्षा बजट कैसा है?

भारत का रक्षा बजट कैसा है?

भारत की वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया है, उसमें वित्तवर्ष 2023-24 में सीमा सड़क संगठन (BRO) का पूंजीगत बजट 43% बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सरकार ने बताया, वित्त वर्ष 2021-22 से दो साल में इस खंड के तहत आवंटन दोगुना हो गया है। इससे सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। सेला सुरंग, नेचिपु सुरंग और सेला-छबरेला सुरंग जैसी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संपत्तियां बनेंगी और सीमा संपर्क भी बढ़ेगा। इसके साथ ही आधुनिकीकरण कोष में पिछले साल के मुकाबले 6.5 फीसदी ज्यादा का बजट दिया गया है। वहीं, भारत सरकार ने सेना के लिए लड़ाकू विमान, पनडुब्बी और टैंक सहित प्रमुख हथियार प्रणालियों की खरीददारी पर भी विशेष ध्यान दिया है। पिछले साल के मुकाबले देखा जाए, तो इस साल का डिफेंस बजट 5.94 लाख करोड़ रुपये का बनाया गया है। पिछले साल रक्षा मंत्रालय को 5.25 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया गया था। वहीं, पिछले साल के मुकाबले, सैन्य आधुनिकीकरण बजट 1.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.62 लाख करोड़ रुपये किया गया है।

रक्षा बजट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

रक्षा बजट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

पिछले कुछ सालों से चीन के साथ लगती सीमा पर तनाव बढ़ा है, वहीं पाकिस्तान से लगती सीमा पर तनाव हमेशा की तरह बना हुआ है। लिहाजा, पीएम मोदी ने हथियारों के घरेलू उत्पादन पर ज्यादा जोर दिया है, जिसमें आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रम शामिल है। लिहाजा, इस बार के बजट में उम्मीद के मुताबिक, सेना के आधुनिकीकरण के लिए बजट बढ़ाया गया है। लेकिन, नई दिल्ली स्थिति जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रक्षा विशेषज्ञ लक्ष्मण बेहरा ने कहा, कि सैन्य आधुनिकीकरण की आवश्यकताओं को देखते हुए रक्षा बजट में वृद्धि "उचित लेकिन पर्याप्त नहीं" है। उन्होंने कहा, कि "सरकार ने चुनाव पूर्व बजट के दौरान अन्य प्राथमिकताओं को संतुलित करते हुए रक्षा बलों के लिए उचित धन आवंटित करने की कोशिश की है।" उन्होंने कहा, कि "विवादित सीमाओं पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत को सैन्य बजट में और इजाफा करने की जरूरत है।"

किस देश का कितना रक्षा बजट?

किस देश का कितना रक्षा बजट?

भारत सरकार ने इस साल का जो रक्षा बजट बनाया है, वो दुनिया का तीसरा सबसे विशालकाय रक्षा बजट है और अब डिफेंस सेक्टर पर खर्च करने के मामले में भारत से आगे सिर्फ चीन और अमेरिका हैं। अमेरिका का डिफेंस बजट 801 अरब डॉलर का हो, जो अपनी जीडीपी का 3.5 प्रतिशत हिस्सा सेना पर खर्च करता है, वहीं चीन का डिफेंस बजट 293 अरब डॉलर का है, जो अपनी जीडीपी का 1.7 प्रतिशत हिस्सा सेना पर खर्च करता है। वहीं, भारत का बजट 76.6 अरब डॉलर का है, जो अपनी जीडीपी का 2.7 प्रतिशत हिस्सा डिफेंस सेक्टर पर खर्च करता है। वहीं, यूनाइटेड किंगडम 68.4 अरब डॉलर, जीडीपी का 2.2 प्रतिशत हिस्सा डिफेंस सेक्टर पर खर्च करता है। दुनिया के अन्य प्रमुख देशों की बात करें, तो रूस का रक्षा बजट 65.9 अरब डॉलर, फ्रांस का 56.6 अरब डॉलर, जर्मनी का 56 अरब डॉलर, सऊदी अरब का 55.6 अरब डॉलर, जापान का 54.1 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया का रक्षा बजट 50.2 अरब डॉलर का है।

नौसेना और वायुसेना पर विशेष ध्यान

नौसेना और वायुसेना पर विशेष ध्यान

भारत सरकार के इस बजट दस्तावेज में दिखाया गया है, कि भारत नौसैनिक बेड़े के निर्माण के लिए करीब 3 अरब डॉलर और वायु सेना की खरीद के लिए 7 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है। वहीं, भारत के पास करीब 14 लाख जवानों की सेना है, जो अपने परमाणु संपन्न प्रतिद्वंदियों चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात रहते हैं, लिहाजा भारत को अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा सैलरी और पेंशन पर खर्च करना पड़ता है।

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    चीन के साथ तनाव पर नजर

    चीन के साथ तनाव पर नजर

    भारत और चीन 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, जो 1950 के दशक से विवादित है। 1962 में दोनों पक्षों के बीच इस पर युद्ध भी हो चुका है। वहीं, साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डोमेन में भी भारत लड़ाकू क्षमताओं को बढ़ाने पर प्रमुखता से फोकस कर रहा है। इस जरूरत के लिए सुरक्षाबलों ने उन्नयन की योजना बनाई है। सैन्य बलों का पेंशन बजट पिछले साल के 1.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 1.38 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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