चीन और रूस के अच्छे दिन आये तो भी श्रेय नरेंद्र मोदी को!

एक नजर डालिए उन अहम प्वाइंट्स पर जिनकी वजह से रूस और चीन के साथ ही ब्राजील और साउथ अफ्रीका भी नरेंद्र मोदी की तरफ एक बड़ी आस के साथ देख रहे हैं।
जिस वजह से भारत की स्थिति और उसका कद इस शिखर सम्मेलन में पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले वर्ष जब मनमोहन सिंह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे तो देश के भीतर कई मुद्दों पर उनकी ओर से कड़ी प्रतिक्रिया न आने की वजह से भारत की छवि एक कमजोर देश के तौर पर बन गई थी। वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार में आए हैं और अब उनके प्रति अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की सोच भी बदल रही है। इसका साफ फायदा ब्रिक्स नेशंस को मिलने वाला है।
- ब्रिक्स देशों में शामिल ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका को पूरी उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी के आने के बाद ब्रिक्स देशों ने आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की तर्ज पर जिस बैंक की स्थापना का सपना देखा था, वह सच कर दिखाएंगे।
- साउथ अफ्रीका में वर्ष 2013 में आयोजित हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से अलग, बैंक के सपने के बारे में घोषणा हुईं। पांच वर्ष के बाद भी अभी तक लेकिन अभी तक इस बैंक से जुड़ी प्रक्रियाएं बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ रहीं हैं। बैंक कहां पर होगा, इस बारे में कोई भी फैसला नहीं लिया जा सका है। इस बार ब्रिक्स देशों का मानना है कि नरेंद्र मोदी फोर्तालेजा में इस बारे में कोई फैसला ले सकते हैं।
- भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह नरेंद्र मोदी अमेरिका की ओर से किसी भी तरह के दबाव में नहीं हैं। ऐसे में मोदी की भूमिका इस समूह में और भी ज्यादा मजबूत और मुखर हो चुकी है। सभी देशों का मानना है कि वह कहीं ज्यादा सक्रिय होकर फैसला ले सकेंगे। कहीं न कहीं मोदी की वजह से भारत की छवि अतंराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राष्ट्र की बन रही है। आने वाले समय में भारत को इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
- सभी देश मानते हैं कि इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन स्थानीय मुद्रा में ही हो सकने वाले व्यवसाय के फैसले की संभावना है। रूस और चीन दोनों ही देश मान रहे हैं कि नरेंद्र मोदी इस एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं।
- नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जाने से पहले कहा था कि मैं ब्रिक्स सम्मेलन को एक ऐसे मौके के तौर पर देखता हूं जहां पर भारत अपने साझीदारों के साथ अतंराष्ट्रीस मसलों पर आगे बढ़ सकता है। मोदी के इस बयान के बाद ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल देश इस बात को मजबूती से आगे बढ़ाने की कोशिशों में लगे हैं कि ब्रिक्स शिखर देशों के पास डब्लूएचओ और डब्लूयटीओ की तर्ज पर एक अंतराष्ट्रीय मंच हो।












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