आपदा को अवसर बनाएगा भारत: चीन से आए पानी से बनेगी बिजली, अरुणाचल में युद्ध स्तर पर चल रहा बांध का काम
भारत ने अरुणचाल प्रदेश में डैम बनाने का फैसला किया है ताकि वह चीन द्वारा छोड़े गए पानी को रोक सके। भारत ने अपर सुबनसिरी में 11,000 मेगावाट की अपनी सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना शुरू कर दी है।

File Image: PTI
भारत और चीन के बीच कई दशकों से विवाद चल रहा है लेकिन हाल के समय में ये काफी बढ़ गया है। चीन, भारतीय सीमा के पास लगातार निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इसी बीच खबर आई है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के पास चीन मेडोग बॉर्डर पर 60 हजार मेगावॉट का बांध बना रहा है। इसके जवाब में भारत ने भी अरुणाचल प्रदेश में अपर सुबनसिरी में 11,000 मेगावाट की अपनी सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना शुरू कर दी है।
परियोजना के काम में तेजी
ऐसा माना जा रहा है कि भारत-चीन के बीच अगला युद्ध जल के लिए लड़ा जाएगा। उत्तर-पूर्व में भारतीय सीमाओं के बेहद करीब आने वाले चीनी बांधों को देखते हुए भारत भी पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। मूल्यांकन समिति की सिफारिशों तथा बिजली मंत्रालय की ओर से अप्रूवल मिलने के बाद एनएचपीसी को आवंटित हुईं तीन रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी दिखाई जा रही है।
मेडोग बॉर्डर पर बांध बना रहा चीन
टाइम्स ऑफ इंडिया के सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीन अरुणचाल प्रदेश के पास मेडोग बॉर्डर पर एक बांध बना रहा है, जो भारत के लिए भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है। यह बांध यारलंग सांगपो नदी पर बन रहा है। भारत में यह नदी ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। इस बांध की क्षमता 60 हजार मेगावॉट बताई जा रही है। चीन इस बांध की मदद से ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का रुख मोड़ सकता है। इतना ही नहीं चीन अपनी मर्जी से इस बांध की मदद से आस पास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर तबाही ला सकता है।
चीन से आए खतरे को रोकेगा बांध
चीन के किसी भी कदम का नुकसान अरुणाचल प्रदेश और असम को उठाना पड़ सकता है। इससे लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं और साथ ही पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता भी बढ़ जाएगी। इसे देखते हुए भारत ने अरुणचाल प्रदेश में डैम बनाने का फैसला किया है ताकि वह चीन द्वारा छोड़े गए पानी को रोक सके। ब्रह्मपुत्र नदी से भारत के मीठे पानी के संसाधनों का लगभग 30 फीसदी हिस्सा आता है। इसके अलावा भारत में जल विद्युत क्षमता का 40 प्रतिशत क्षमता इसी नदी से पूरा होता है। है। हालांकि ब्रह्मपुत्र का लगभग 50% बेसिन चीनी क्षेत्र में आता है।
जून तक पूरी हो जाएगी परियोजना
सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक भारत की 2,000 मेगावाट की लोअर सुबनसिरी परियोजना इस साल के मध्य में पूरी हो जाएगी। अखबार से एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह उत्तर-पूर्व का मसला नहीं है बल्कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। भले ही चीन अंतराष्ट्रीय मंचों पर अपने विशालकाय बांध से जुड़े खतरों को नकारता आया है मगर बीजिंग के दावों पर भरोसा करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में भारत भी मिशन मोड पर अपनी योजनाओं को अंजाम दे रहा है।
बांध बनाने से क्या फायदा होगा?
अधिकारी के मुताबिक इस पनबिजली परियोजना से अरुणाचल प्रदेश और असम में पानी की कमी के साथ-साथ बाढ़ के खतरों के भी कम होने की उम्मीद है। इस परियोजना को अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए आजीविका और रोजगार के अवसरों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जब बांध बनेगा तो भारत की जल संचयन की क्षमता बढ़ेगी।












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