श्रीलंका की स्थिति पर भारत की नजर, पड़ोसी धर्म निभाते हुए भारत ने दिए 3.8 अरब डॉलर
भारत ने इस साल अब तक श्रीलंका को 3.8 अरब डालर की मदद पहुंचायी है। इसके अलावा भारत वहां के लोगों के जीने के लिए जरूरी चीजों जैसे खाने-पीने का सामान और दवाओं की कमी को पूरा करने में मदद कर रहा है।
कोलंबो, 10 जुलाईः श्रीलंका अपनी आजादी के बाद से अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश के पास आवश्यक सामान खरीदने के लिए भी इतना पैसा नहीं बचा कि वह दूसरे देशों से आयात कर पाए। इस बीच श्रीलंका का पड़ोसी देश भारत लगातार उसकी मदद कर रहा है। श्रीलंका पर 51 अरब डालर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है। इस आर्थिक संकट से निकलने के लिए श्रीलंका को कम से कम 4 अरब डालर की जरूरत है। आर्थिक मदद पाने के लिए श्रीलंका वर्ल्ड बैंक के साथ-साथ चीन और जापान जैसे देशों से भी बात कर रहा है। हालांकि, इस सबमें भारत उसका मजबूत साथी बनकर उभरा है।

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विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने इस साल अब तक श्रीलंका को 3.8 अरब डालर की मदद पहुंचायी है। इसके अलावा भारत वहां के लोगों के जीने के लिए जरूरी चीजों जैसे खाने-पीने का सामान और दवाओं की कमी को पूरा करने में मदद कर रहा है। भारत का कहना है कि श्रीलंका का करीबी पड़ोसी और उसके साथ ऐतिहासिक संबंध होने के नाते, भारत उसके लोकतंत्र, स्थिरता और आर्थिक स्थिति में सुधार को लेकर पूरी तरह साथ है। भारत, श्रीलंका को खाना और दवा जैसी जरूरी चीजें भी मुहैया करा रहा है और आर्थिक तौर पर भी मदद कर रहा है।
श्रीलंका की स्थिति पर मीडिया के सवालों के जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, 'भारत श्रीलंका का निकटतम पड़ोसी है और हमारे दोनों देश गहरे सभ्यता के बंधन साझा करते हैं।' हम उन कई चुनौतियों से अवगत हैं जिनका श्रीलंका और उसके लोग सामना कर रहे हैं और हम श्रीलंका के लोगों के साथ खड़े हैं क्योंकि उन्होंने इस कठिन दौर से उबरने की कोशिश की है। हमारी पड़ोस प्रथम नीति में श्रीलंका के केंद्रीय स्थान के अनुसरण में, भारत ने इस वर्ष श्रीलंका में गंभीर आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए हमें 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का अभूतपूर्व समर्थन दिया है।
अरिंदम बागची ने कहा कि हम श्रीलंका में हाल के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। भारत श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा है क्योंकि वे लोकतांत्रिक साधनों और मूल्यों, स्थापित संस्थानों और संवैधानिक ढांचे के माध्यम से समृद्धि और प्रगति के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं।












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