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भारी संख्या में परमाणु बमों का निर्माण कर रहा है भारत, चीन को लेकर बदली नीति, मोदी सरकार पर बड़ा दावा

पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान से ज्यादा चीन ने भारत को परेशान करना शुरू कर दिया है और एक्सपर्ट्स लगातार मांग करते रहे हैं, कि भारत की रणनीति अब पाकिस्तान नहीं, बल्कि चीन आधारित होनी चाहिए।

India-China News

India-China News: चीन को फोकस में रखकर भारत की मोदी सरकार ने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को अपग्रेड करना शुरू कर दिया है, ये दावा एक अमेरिकी रिपोर्ट में किया गया है। अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन की आक्रामता के खिलाफ भारत भी आक्रामक अंदाज में तैयारी कर रहा है और चीन को पूरी तरह से फोकस में रखकर अपने परमाणु शस्त्रागारों का आधुनिकीकरण कर रहा है।

भारत की आक्रामक तैयारी

भारत की आक्रामक तैयारी

फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FSA) ने साल 2022 को लेकर अपनी आकलन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है, कि भारत अपने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण करना जारी रखे हुए है और देश की परमाणु रणनीति, जो पहले पाकिस्तान पर केंद्रित थी, वो अब चीन पर ज्यादा जोर देती दिख रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, FSA के मुताबिक, देश के मौजूदा परमाणु-सक्षम जेट्स, भूमि-आधारित वितरण प्रणाली, और पनडुब्बी से लॉन्च की जाने मिसाइलें, जो मिलकर ट्रायड का निर्माम करती हैं, उन्हें कम से कम चार नए हथियार प्रणालियों द्वारा या तो उन्हें रिप्लेस किया जा रहा है, या फिर उन्हें अपग्रेड किया जा रहा है।

भारत की परमाणु क्षमता

भारत की परमाणु क्षमता

एफएएस के हैंस एम. क्रिस्टेंसन और मैट कोर्डा द्वारा लिखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, "भारत वर्तमान में आठ अलग-अलग परमाणु-सक्षम सिस्टम्स का ऑपरेशन करता है, जिनमें दो विमान, चार भूमि-आधारित बैलिस्टिक मिसाइलें, और दो समुद्र-आधारित बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। इनके अलावा भारत कम से कम चार और प्रणालियों का विकास कर रहा है, जिनमें से ज्यादातर को जल्द से जल्द युद्ध करने के लिए तैयार होने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन की राजधानी बीजिंग अब भारतीय बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज में है। रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि भारत ने "लगभग 700 किलोग्राम (प्लस या माइनस 150 किलोग्राम) हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम उत्पन्न किया है, जो 138 से 213 परमाणु बमों के निर्माण के लिए पर्याप्त है। हालांकि, परमाणु बम बनाने के लिए अभी तक सभी कच्चे माल का उपयोग नहीं किया गया है"।

भारत के निशाने पर चीन

भारत के निशाने पर चीन

एफएएस का अनुमान है, कि भारत के शस्त्रागार में लगभग 160 परमाणु हथियार हैं और नई मिसाइलों को लैस करने के लिए अतिरिक्त परमाणु बमों की आवश्यकता होगी। वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान के पास 165, चीन के पास 350, अमेरिका के पास 5,428 और रूस के पास 5,977 परमाणु बम हैं। पिछले साल, हथियारों पर नजर रखने वाली स्वीडिश संस्था, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, भारत ने अपने परमाणु हथियारों के भंडार को जनवरी 2021 में 156 से बढ़ाकर जनवरी 2022 में 160 कर दिया था, जब चीन ने नए लॉन्चरों को ऑपरेशन में ले आया और पाकिस्तान ने नए हथियार वितरण प्लेटफॉर्म को विकसित करना शुरू कर दिया।

परमाणु जखीरे को बढ़ाता भारत

परमाणु जखीरे को बढ़ाता भारत

रिपोर्ट में कहा गया है, कि मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परिसर में ध्रुव रिएक्टर हथियार-ग्रेड, प्लूटोनियम का भारत का प्राथमिक स्रोत रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत कम से कम एक और रिएक्टर बनाकर प्लूटोनियम के उत्पादन की अपनी क्षमता में नाटकीय रूप से वृद्धि करना चाहता है। एफएएस का दावा है, कि यद्यपि भारत का "मुख्य लक्ष्य" पाकिस्तान है, लेकिन इसके परमाणु कार्यक्रम के आधुनिकीकरण से पता चलता है, कि यह आगे चलकर चीन के साथ अपने संबंधों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। विशाखापत्तनम से लगभग 50 किमी दूर रामबिली हैमलेट में भारत एक पहाड़ में कई सुरंगों का निर्माण तक कर रहा है, जहां परमाणु पनडुब्बियों के लिए फैसिलिटीज बनाने पर काम किया जा रहा है।

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