चीन में उत्पन्न हुआ बहुत बड़ा खाद्य संकट, जानिए मोदी सरकार का एक फैसला क्यों है जिम्मेदार?

पिछले वित्तीय वर्ष से इस साल मार्च तक, भारत ने वैश्विक स्तर पर लगभग 3.8 मिलियन टन टूटे हुए चावल का निर्यात किया है, जो भारत के कुल गैर-बासमती चावल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा है।

नई दिल्ली, सितंबर 11: भारत ने टूटे चावल के निर्यात पर तत्काल पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी है और मोदी सरकार का ये फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसके बाद चीन में खाद्य संकट पैदा हो गया है। चीन ने संकट से बचने के लिए खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला को काफी तेज कर दिया है, क्योंकि उसे डर है, कि वो बहुत बड़े खाद्य संकट में फंस सकता है। भारतीय टूटे चावल का सबसे बड़ा खरीददार चीन है और चावल निर्यात पर पाबंदी लगाने का सीधा असर उसी पर हो रहा है। मोदी सरकार के फैसले के मुताबिक, भारत ने सफेद और भूरे चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क भी लगा दिया है। जिसका असर भारत के कुल चावल निर्यात के 60 प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगा। हालांकि, उबले चावल और बासमती चावल पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

सबसे बड़ा चावल निर्यातक है भारत

सबसे बड़ा चावल निर्यातक है भारत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, जो वैश्विक चावल व्यापार का 40 प्रतिशत हिस्सा है। भारत 150 से अधिक देशों को चावल का निर्यात करता है, और पूरी संभावना है, कि भारत सरकार के चावल पर लगाए गये प्रतिबंध का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ेगा और ज्यादातर देशों में चावल की कीमत में भारी उछाल आएगा। खासकर कई देश ऐसे हैं, जो यूक्रेन संकट के बाद काफी महंगे दर पर गेहूं खरीदने के लिए मजबूर हुए हैं, अब उन्हें चावल का आयात भी उच्च दरों पर करना होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय दुनिया भर के कई देश बिगड़ते खाद्य संकट या महंगाई से जूझ रहे हैं और भारत के इस कदम से इन देशों पर और दबाव पड़ेगा।

सबसे ज्यादा चावल खरीदता है चीन

सबसे ज्यादा चावल खरीदता है चीन

भारत कुछ अफ्रीकी देशों के लिए टूटे चावल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। लेकिन चीन, कृषि सूचना नेटवर्क द्वारा प्रकाशित एक लेख के अनुसार, साल 2021 में भारत से 1.1 मिलियन टन टूटे चावल का आयात करने वाले भारतीय टूटे चावल का सबसे बड़ा खरीदार है। साल 2021 में भारत का कुल चावल निर्यात रिकॉर्ड 21.5 मिलियन टन तक पहुंच गया था, जो दुनिया के शीर्ष चार निर्यातकों थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका के चावल निर्यात से ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, टूटे चावल का इस्तेमाल मुख्य रूप से चीन में जानवरों के चारे के रूप में और नूडल्स और वाइन के उत्पादन में किया जाता है। चावल पर भारत के निर्यात प्रतिबंध वैश्विक चावल की कीमतें बढ़ा सकते हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति अधिक हो सकती है, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक खाद्य बाजार में अराजकता पहले से ही बढ़ी हुई है। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद गेहूं और मकई की कीमतों में उछाल के विपरीत, चावल ही वो खाद्य पदार्थ रहा है, जिसमे बड़े खाद्य संकट को दूर करने में मदद की है। लेकिन, भारत सरकार के इस फैसले से खाद्य संकट और गहरा सकता है।

टूटे चावल की वैश्विक डिमांड बढ़ी

टूटे चावल की वैश्विक डिमांड बढ़ी

भारत के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि, भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण टूटे चावल की वैश्विक मांग काफी बढ़ गई है, जिसने कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाया है, जिसमें पशुओं का चारा भी शामिल है। चावल तीसरा प्रमुख कृषि उत्पाद है, जिसे भारत सरकार ने इस वर्ष निर्यात बिक्री प्रतिबंध लगाया है। मार्च और अप्रैल में एक सदी से अधिक समय में भारत के सबसे गर्म महीने होने के बाद, मोदी सरकार ने मई महीने में गेहूं और चीनी के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था। वहीं, भारतीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि, भारत के प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में जून में अपर्याप्त वर्षा हुई और जुलाई और अगस्त में अनियमित वर्षा हुई, जिससे चावल का रकबा पिछले साल के मुकाबले काफी कम हो गया। पिछले साल 26.7 मिलियन हेक्टेयर में चावल की खेती की गई थी, जो इस साल 13 प्रतिशत घटकर 23.1 मिलियन हेक्टेयर हो गया है और इसकी वजह से चावल का उत्पादन कम हो गया है।

किन देशों को हो सकता है फायदा

किन देशों को हो सकता है फायदा

पिछले वित्तीय वर्ष से इस साल मार्च तक, भारत ने वैश्विक स्तर पर लगभग 3.8 मिलियन टन टूटे हुए चावल का निर्यात किया है, जो भारत के कुल गैर-बासमती चावल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा है। अप्रैल से जून तक, भारत ने 1.4 मिलियन टन गैर-बासमती चावल निर्यात किया। वहीं, भारत के शुल्क बढ़ाने के बाद कई देश भारत से चावल की खरीददारी कम कर सकते हैं और थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों की तरफ रूख सकते हैं, जो पहले से ही शिपमेंट बढ़ाने और कीमतें बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चावल निर्यात पर प्रतिबंध इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि इस खरीफ सीजन में धान की बुवाई का कुल क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में और कम हो सकता है। इसका असर फसल की संभावनाओं के साथ-साथ आने वाले समय में कीमतों पर भी पड़ सकता है।

भारत ने कितना चावल निर्यात किया

भारत ने कितना चावल निर्यात किया

भारत ने साल 2021-22 (अप्रैल-मार्च) में 9.66 अरब डॉलर मूल्य के 21.21 मिलियन टन चावल का रिकॉर्ड निर्यात किया। इसमें 3.54 बिलियन डॉलर (जिस पर कोई प्रतिबंध नहीं है) के 3.95 मिलियन टन बासमती चावल और 6.12 बिलियन डॉलर मूल्य के 17.26 मिलियन टन गैर-बासमती शिपमेंट शामिल हैं। वहीं, अब नये आदेश के तहत 7.43 मिलियन मिट्रिक टन ($ 2.76 बिलियन) चावल का निर्यात शामिल है, जिसे स्वतंत्र रूप से अनुमति दी जाएगी। वहीं, सरकार का प्रतिबंध केवल बाकी बचे 9.83 मिलियन मिट्रिक टन (3.36 बिलियन डॉलर) के संबंध में लागू होते हैं। इसमें 3.89 मिलियन टन (1.13 बिलियन डॉलर) टूटे चावल शामिल हैं, जिनका निर्यात प्रतिबंधित कर दिया गया है, और 5.94 मिलियन टन (2.23 बिलियन डॉलर) गैर-बासमती गैर-बासमती चावल, जिनके शिपमेंट पर अब 20% शुल्क लगेगा।

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