पाकिस्तान में लकड़ियों की तस्करी के मामले में ऐसे हुई गधों की पेशी

पाकिस्तान की अदालतों में इंसानों की पेशी तो होती रहती है, लेकिन गुरुवार यानी 20 अक्तूबर को एक अदालत में गधों को भी पेश किया गया.

इन गधों पर क्या आरोप था, क्या उन्हें सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया गया है या वे केस प्रॉपर्टी का हिस्सा थे, इस बारे में भी सवाल उठाए गए हैं.

ये पेशी चित्राल ज़िले के असिस्टेंट कमिश्नर (दरोश) की अदालत में हुई और बताया गया कि इन गधों का इस्तेमाल मुख्य रूप से टिंबर स्मगलिंग के लिए किया गया था.

पाकिस्तान के चित्राल और दूसरे उत्तरी क्षेत्रों से टिंबर की स्मगलिंग की ख़बरें आती रहती हैं और सरकार इसे रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन टिंबर के जंगल तेज़ी से ख़त्म हो रहे हैं.

दरोश के असिस्टेंट कमिश्नर तौसिफ़ुल्लाह की अदालत में पांच गधों को पेश किया गया. इन गधों पर आरोप था कि ये चित्राल के दरोश इलाक़े में टिंबर की स्मगलिंग में शामिल थे.

इन गधों को इस मुकद्दमे में केस प्रॉपर्टी के रूप में तलब किया गया था और पेशी के बाद उन्हें वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया.

चित्राल के असिस्टेंट कमिश्नर ने बताया कि वो ये सुनिश्चित करना चाहते थे कि कहीं गधों का फिर से स्मगलिंग के लिए इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है. अदालत ने ये सुनिश्चित किया है कि गधे संबंधित अधिकारियों की कस्टडी में हैं.

गधों को अदालत में क्यों पेश किया गया?


कहानी कुछ यूं बताई गई है कि दरोश के इन इलाक़ों में प्रशासन को टिंबर की स्मगलिंग की सूचना मिली थी, जिस पर कार्रवाई की गयी. स्मगलिंग का समय भोर से पहले का होता है जब टिंबर आरा मशीन में लाया जाता है.

असिस्टेंट कमिश्नर तौसिफ़ुल्लाह ने उस समय कार्रवाई करते हुए तीन गधों को पकड़ा, जिनके साथ टिंबर के चार स्लीपर बंधे थे. उन्होंने बीबीसी को बताया कि इस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और दो फ़रार हो गए, जबकि गधों को वन अधिकारी के हवाले कर दिया गया.

उनके मुताबिक़, उन्होंने इन गधों को एक स्थानीय व्यक्ति की सुपुर्दगी में दे दिया था ताकि वह इनकी देखभाल कर सके.

इस घटना के दो दिन बाद, एक और शिकायत मिली कि स्मगलिंग अभी भी चल रही है, जिस पर एक बार फिर से कार्रवाई की गई और तीन और गधों को ज़ब्त किया गया, जिनके साथ टिंबर के स्लीपर भी थे.

बाद में सूचना मिली कि शायद ये तीनों गधे वही हैं जो सुपरदारी में दिए गए थे, लेकिन बाद में पता चला कि उनमें से दो गधे नए हैं और एक गधा वही है.

इस संबंध में कोर्ट ने वन अधिकारियों को सभी गधों को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया कि जो गधे पकड़े गए थे उन सभी गधों को अदालत के सामने पेश किया जाए. ताकि पता किया जा सके कि कुल कितने गधे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं है कि उन्हीं गधों को फिर से स्मगलिंग में इस्तेमाल किया जा रहा है.

असिस्टेंट कमिश्नर ने बताया कि इन गधों को कोर्ट में देखा गया और उनमें से एक गधा वही था, लेकिन यह गधा ग़लती से पकड़ा गया था. इस गधे को दूसरी बार स्मगलिंग में इस्तेमाल नहीं किया गया था.

उन्होंने कहा कि जिस इलाक़े में स्मगलिंग को रोकने के लिए कार्रवाई की गई थी, वहां अंधेरा था और उसी इलाक़े में ये पहले वाला गधा भी बंधा हुआ था जिसे अधिकारी ग़लती से साथ ले आये थे. वन अधिकारियों की तरफ से स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया था, जिस पर अदालत ने संतोष व्यक्त किया और गधों को वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया.

गधा
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गधा

गधे ही क्यों?


वन विभाग की ओर से वन अधिकारी व अन्य कर्मी अदालत में में पेश हुए थे.

तौसिफ़ुल्लाह ने कहा कि इन गधों को सरकारी हिरासत में रखना मुश्किल होता है. उनकी देखभाल और ख़ुराक का प्रबंध करना पड़ता है. इसलिए वन विभाग के लोग आमतौर पर गधों को सुपरदारी पर किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति को देते हैं, इसलिए ये गधे को सुपरदारी पर एक आरा मशीन के मालिक को दिए गए थे.

ये गधे और टिंबर स्लीपर केस प्रॉपर्टी होती है और ये इस मामले का फ़ैसला होने तक हिरासत में रहेंगे और जब इस मामले का फ़ैसला होगा तो उसी के अनुसार केस प्रॉपर्टी का भी फ़ैसला होगा.

मूल रूप से यह कठिन रास्ता है. इस टिंबर की स्मगलिंग पहाड़ों, जंगलों और नदी नालों से की जाती है. और जब इस लकड़ी को पहाड़ों से नीचे लाया जाता है, तब इसे काट कर इसके टुकड़े कर दिए जाते हैं. इस क्षेत्र में टिंबर की स्मगलिंग गाड़ियों से मुश्किल होती है इसलिए गधों का इस्तेमाल किया जाता है.

इसमें एक बात यह भी महत्वपूर्ण है कि जब गधों को रास्ते का पता चल जाता है, तो वे ख़ुद ही चले जाते हैं, उनके साथ किसी इंसान के होने की कोई ज़रूरत नहीं होती है, और वे ख़ुद ही अपनी मंज़िल तक पहुंच जाते हैं, इसलिए अक्सर स्मगलिंग या ऐसे अन्य कार्यों के लिए गधों का इस्तेमाल किया जाता है.

स्मगलर कौन हैं?


इसको लेकर परस्पर विरोधी ख़बरें हैं. आधिकारिक स्तर पर कहा जाता है कि इसके पीछे बड़े स्मगलर हो सकते हैं. और स्मगलिंग को मुमकिन बनाने के लिए वे ग़रीब मज़दूरों का इस्तेमाल करते हैं.

लेकिन दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये इलाक़ा दारोश में पाकिस्तान-अफ़ग़ान सीमा के पास स्थित है और इससे ग़रीब लोगों की कुछ आमदनी हो जाती है.

स्थानीय आबादी का कहना है कि असल में गधों पर लकड़ी के एक-दो टुकड़े बांधे जाते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर कोई स्मगलिंग नहीं होती है. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर स्मगलिंग ट्रकों में होती होगी, जिसके लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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