पाकिस्तान ने जारी की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, जानिए क्या होगी इमरान खान की भारत को लेकर नई नीति?
इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को जारी करते हुए इमरान खान ने कहा कि, पाकिस्तान की स्थापना के बाद से सरकारों की मानसिकता सैन्य सुरक्षा पर केंद्रित करने पर थी और उन्होंने इससे आगे की योजना कभी नहीं बनाई।
इस्लामाबाद, जनवरी 14: पाकिस्तान की पहली नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जारी कर दी गई है और आने वाले सालों में पाकिस्तान भारत को लेकर क्या नीति अपनाएगा, भारत के साथ शांति से चलना चाहेगा या फिर जंग के बादल ऐसे ही दोनों देशों के ऊपर छाए रहेंगे, इन सबका जिक्र पाकिस्तान की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में की गई है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को जारी किया है, जिसमें भारत के साथ आने वाले वक्त में पाकिस्तान के संबंध कैसे होंगे और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान क्या सोचता है, इसके बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है।

पाकिस्तान की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जारी
प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को पाकिस्तान की पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति (एनएसपी) जारी कर दी है, जिसमें कहा गया है कि, पाकिस्तान को अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए भविष्य के लिए एक बहु-आयामी रणनीति बनाने की सख्त जरूरत है। राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद 28 दिसंबर को संघीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, पाकिस्तान की उस नीति परिभाषित करती है कि, आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को किस दिशा में जाना चाहिए। कहा जाता है कि इसके निर्माताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया और आर्थिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

पाकिस्तान के पास आर्थिक नीति नहीं- इमरान
इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को जारी करते हुए इमरान खान ने कहा कि, पाकिस्तान की स्थापना के बाद से सरकारों की मानसिकता सैन्य सुरक्षा पर केंद्रित करने पर थी और उन्होंने इससे आगे की योजना कभी नहीं बनाई। उन्होंने कहा कि, देश को अच्छी तरह से प्रशिक्षित और अनुशासित सुरक्षा बल मिले हैं, जिन्होंने जुझारू पड़ोसियों के खिलाफ क्षेत्रीय सीमाओं की रक्षा की है। राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को जारी करते हुए इमरान खान ने स्वीकार किया है कि, पाकिस्तान के पास खुद को आर्थिक तौर पर सुरक्षित करने की कोई योजना नहीं है और उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान को समावेशी विकास की जरूरत है, लेकिन आईएमएफ जैसे संस्थानों से ऋण प्राप्त करने की मजबूरी ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल दिया है"।

देश के आर्थिक विकास पर जोर- इमरान
राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जारी करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने देश में निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है और कहा है कि, कोई भी देश आर्थिक रूप से तब तक विकसित नहीं हो सकता है, यदि उसके निर्यात की मात्रा उसके आयात से बहुत कम नहीं है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि, देश को समृद्ध बनाने में कानून और शासन का भी उतना ही महत्वपूर्ण स्थान है। वहीं, पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कहा कि, बहुत कम ऐसे देश हैं जिन्होंने नीतियों को ऐसे तैयार किया है जैसे कि पाकिस्तान ने देर से सही, मगर तैयार की है।

भारत को लेकर इमरान खान का रूख
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सबसे ज्यादा महत्व भारत को लेकर दिया गया है और दोनों ही देशों के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह को कश्मीर बताया गया है। वहीं, इमरान सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की उम्मीद जताई है और द्विपक्षीय संबंध में कश्मीर मुद्दे को कोर मसला बताया है, लेकिन एक बार फिर से इमरान खान ने कहा कि, मोदी सरकार की हिंदुत्व आधारित राजनीति पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए चिंता की बात है और पाकिस्तान की सुरक्षा पर इसका असर पड़ रहा है। इमरान खान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में कश्मीर मुद्दे का कई बार जिक्र किया गया है और कहा गया है कि, जब तक कश्मीर मुद्दे का हल नहीं किया जाता है, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा मुद्दा और मुद्दों का आधार कश्मीर ही रहेगा। लेकिन, इसमें कहा गया है कि, आने वाले 100 सालों में पाकिस्तान की कोशिश भारत के साथ युद्ध करने की नहीं होगी। और भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

चीन और रूस के साथ रिश्तों पर प्रकाश
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में चीन के साथ रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति के लिए चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को पाकिस्तान के लिए राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट बताया गया है। वहीं, इमरान सरकार ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में कहा है कि, पाकिस्तान भारत के साथ साथ रूस के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है और इमरान खान ने कहा है कि, अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंध का एक लंबा इतिहास रहा है और पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह की खेमेबाजी का हिस्सा नहीं बनना चाहता है। पाकिस्तान ने करीब 100 पन्नों का राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जारी किया है, जिसमें भारत के साथ संबंध और मोदी सरकार को लेकर भी अहम बातें की गई हैं।

मोदी सरकार के साथ तालमेल नहीं!
वहीं, पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि, नई दिल्ली में मौजूदा पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत भारत के साथ तालमेल की कोई संभावना नहीं है। अधिकारी ने कहा कि, यह पहली बार संहिताबद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा नीति होगी, जो आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ विदेश नीति दोनों को कवर करेगी। अधिकारी ने कहा कि, "राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केवल एक हिस्सा सार्वजनिक किया जाएगा," अधिकारी ने स्पष्ट किया, बाकी दुनिया में ऐसी नीतियों को अक्सर गोपनीय रखा जाता है। पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि, भारत के साथ लंबे समय से कश्मीर विवाद को पाकिस्तान के लिए एक 'महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीति' मुद्दे के रूप में पहचाना गया है।

इमरान खान की सुरक्षा नीति का विश्लेषण
भारतीय विश्लेषकों की नजर में पाकिस्तान ने जो विदेश नीति तैयार की है, वो देखने में तो ठीक है, लेकिन उसे प्रैक्टिकली अंजाम देना इमरान सरकार के लिए नामुमकिन है। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति ऐसी है, कि भारत के साथ 'मिलाप' को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इमरान सरकार चाहकर भी भारत के साथ व्यापारिक संबंधो को सामान्य नहीं कर सकती है, क्योंकि अतीत में प्रधानमंत्री इमरान खान ने ही अपने बयानों से अपने देश की जनता को भारत के खिलाफ भड़काया है और उनसे वोट लिया है, लिहाजा अब वो जनता को ये संदेश कैसे देंगे, कि वो भारत के साथ संबंध सामान्य करना चाहते हैं।

नई सुरक्षा नीति का विरोध
वहीं, भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रह चुके अब्दुल बासित ने इमरान खान की आलोचना करते हुए कहा है कि, ''क्या इमरान खान उस वक्त भी भारत के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश करेंगे, जब भारत कश्मीर मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं है?'' उन्होंने कहा कि, ''इमरान सरकार की नई सुरक्षा नीति से पाकिस्तान के लिए कश्मीर मुद्दा काफी कमजोर हो जाएगा''।












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