G-20 शिखर सम्मेलन से पहले IMF की बड़ी चेतावनी, आर्थिक मंदी में फंसने वाली है दुनिया, होगा गंभीर असर

आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है, कि "दुनिया की अर्थव्यवस्था जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, वो काफी बड़ी हैं और कमजोर इकोनॉमिक इंडिकेटर्स आगे की चुनौतियों की तरफ इशारा करते हैं।

IMF G20 summit: इंडोनेशिया के बाली में कल से होने जा रहे जी20 शिखर सम्मेलन से पहले इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (IMF) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है और कहा है, कि तमाम हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स इसी बात की तरफ इशारा कर रहे हैं, कि दुनिया की आर्थिक विकास दर की रफ्तार 'उदासीन' हो चुकी है। IMF की ये चेतावनी जी20 देशों के खरीदने की शक्ति की बिगड़ती शक्ति पर नजर रखने वाले 'परचेजिंग मैनेजर इंडिकेट्स' के हवाले से दिया है, जो जी20 देशों की खरीदने की क्षमता पर नजर रखता है।

IMF की चेतावनी का मतलब क्या?

IMF की चेतावनी का मतलब क्या?

IMF ने 'मजबूत, सतत, संतुलित और समावेशी विकास पर G20 रिपोर्ट' शीर्षक से प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा है कि, मुद्रास्फीति को कम करने और ऋण कमजोरियों को दूर करने के लिए कई देशों में लगातार राजकोषीय और मौद्रिक सख्ती बरतने की जरूरत है और आने वाले महीनों में यह कई जी20 देशों की अर्थव्यवस्था को लेकर बनाई जाने वाली नीति को और सख्त करने की उम्मीद करता है। जिसका मतलब ये हुआ, कि आने वाले महीनों में जी20 देशों की केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में और इजाफा करने वाली है, जिससे मुद्रास्फीति और बढ़ने की आशंका बनेगी। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में जोर देते हुए कहा है, कि इन नीतिगत फैसलों के चलते आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता रहेगा, खासकर हाउसिंग सेक्टर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर इसका खराब असर पड़ेगा।

आने वाली कई चुनौतियों की तरफ इशारा

आने वाली कई चुनौतियों की तरफ इशारा

आईएमएफ की रिपोर्ट में कहा गया है, कि "दुनिया की अर्थव्यवस्था जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, वो काफी बड़ी हैं और कमजोर इकोनॉमिक इंडिकेटर्स आगे की चुनौतियों की तरफ इशारा करते हैं। हालांकि, सावधानीपूर्वक नीतिगत कार्रवाई और ज्वाइंट मल्टीलेटरल इफोर्ट्स के साथ दुनिया मजबूत और अधिक समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ सकती है।" रिपोर्ट में कहा गया है, कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के खराब होने के पीछे के कई फैक्टर्स में तीन फैक्टर काफी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें पहला, लगातार बढ़ती जा रही व्यापक महंगाई, चीन में विकास की रफ्तार का गिरना और यूक्रेन पर रूस का आक्रमण है। आईएमएफ ने कहा है कि, सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने से भी विकास की रफ्तार प्रभावित हुई है।

वैश्विक विकास दर गिरने का अनुमान

वैश्विक विकास दर गिरने का अनुमान

जी20 वैश्विक अर्थव्यवस्था में 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है, लिहाजा आईएमएफ की चेतावनी और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि इस साल दुनिया में विकास दर की रफ्तार गिर जाएगी। आईएमएफ ने साल 2023 में वैश्विक विकास दर का अनुमान 2.7 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि, तमाम इकोनॉमिक इंडिकेटर्स से जो संकेत मिल रहे हैं, वो यही बता रहे हैं, कि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमा रहने वाला है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है। आईएमएफ के मुताबिक, सर्विस सेक्टर के साथ साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर भी कमजोर पड़ा है और सर्विसेज की एक्टिविटी भी धीमी हो चुकी है।

सप्लाई और डिमांड, दोनों हुआ कम

सप्लाई और डिमांड, दोनों हुआ कम

आईएमएफ की रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात ये है, कि रिपोर्ट में कहा गया है, कि सप्लाई और डिमांड दोनों में कही आई है, जो खरीददारों और प्रोड्यूसर्स के उदासीन होने का संकेत है। इसके साथ ही महंगाई दर में इजाफा होना इसे और खतरनाक बना देता है, जिसकी वजह से ग्लोबल इकोनॉमी के सामने जो संकट है, वो चिंता बढ़ाने वाले हैं और इस बात की पूरी संभावना है, कि आने वाला वक्त चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को लेकर भी चिंता जताई है, कि जिस रफ्तार से महंगाई दर में इजाफा हुआ है, वो अगर ऐसे ही बना रहा, तो फिर दुनियाभर में पॉलिसी रेट में इजाफा करेगा, जिससे आर्थिक स्थिति और भी ज्यादा खराब होती चली जाएगी।

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