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आखिर कैसे 5 साल पीछे चली गई है दुनिया? संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

जेनेवा, 08 सितंबरः दुनिया में फैली महामारी पर संयुक्त राष्ट्र की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी की वजह से मानव विकास कम से कम 5 साल पीछे हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खास तौर पर कोरोना महामारी को इसका जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि महामारी ने अनिश्चितता की वैश्विक लहर को हवा दी है।

लगातार दो साल आई गिरावट

लगातार दो साल आई गिरावट

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने घोषणा की है कि 30 साल पहले इसे बनाए जाने के बाद पहली बार, मानव विकास सूचकांक, देशों में जीवन की उम्मीदें, शिक्षा का स्तर और जीवन स्तर का माप दो साल कम हो चुका है। अर्थात जीवन स्तर में लगातार दो सालों 2020 और 2021 में गिरावट आई है। यूएनडीपी प्रमुख अचिम स्टेनर ने समाचार एजेंसी एएफपी को दिए इंटरव्यू में कहा है कि इसका मतलब है कि लोगों की जीवन प्रत्याशा में कमी हो रही है, हम समय से पहले मर रहे हैं, हम कम पढ़-लिख पा रहे हैं और हमारी आय भी कम हो रही है।

भविष्य को लेकर हताश, निराश हैं लोग

भविष्य को लेकर हताश, निराश हैं लोग

अचिम स्टेनर ने कहा कि इन तीन मापदंडों के तहत समझा जा सकता है कि इतने सारे लोग भविष्य के बारे में हताश, निराश और चिंतित क्यों महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 30 साल पहले बनाए जाने के बाद यह लगातार बढ़ता रहा, लेकिन साल 2020 में पहली बार ऐसा हुआ जब ये खिसकना शुरू हुआ और साल 2021 तक इसकी गिरावट जारी रही। इन दो सालों की गिरावट ने पांच सालों के लाभ को मिटा दिया।

कोरोना महामारी है प्रमुख कारण

कोरोना महामारी है प्रमुख कारण

अनिश्चित समय, अस्थिर जीवन के शीर्षक से बनी इस रिपोर्ट में कोरोना महामारी को वैश्विक उलफेर के लिए प्रमुख कारण जरूर माना है, लेकिन कई और कारक भी हैं जिन्होंने इसमें योगदान दिया है। रिपोर्ट कहती है कि राजनीतिक, वित्तीय और जलवायु से संबंधित संकटों की एक जटिल संख्या ने आबादी को ठीक होने का समय नहीं दिया है। अचिम स्टेनर ने कहा कि हमने पहले भी आपदाए झेली हैं। हमारे बीच पहले भी संघर्ष हो चुके हैं, लेकिन हम जिस चीज का अभी सामना कर रहे हैं वो मानव विकास के लिए एक बड़ा झटका है।

90 फीसदी लोग हैं प्रभावित

90 फीसदी लोग हैं प्रभावित

अध्ययन के मुताबिक यह झटका वास्तव में वैश्विक है जो दुनिया भर के 90 फीसदी से अधिक देशों को प्रभावित करता है। इस रिपोर्ट में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड सूची के शीर्ष पर बने हुए हैं वहीं, दक्षिण सूडान, चाड और नाइजर इस लिस्ट में सबसे नीचे हैं। महामारी के ढ़ाई साल बीत जाने के बाद अब जब कई देशों ने इससे उबरना शुरू किया है, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और दक्षिण एशिया सहित कई कैरिबिया के कई देशों में यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण उबरे संकट ने असर डालना शुरू कर दिया है। खाद्य संकटों को देखते हुए इन देशों में आने वाला वक्त एक नई त्रासदी लेकर आने वाला है।

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