Wagner Group: क्या वैगनर में इतनी ताकत है, कि पुतिन को सत्ता से फेंक सके? दक्षिणी सैन्य मुख्यालय पर किया कब्जा
पुतिन की सबसे बड़ी ताकत कहलाने वाले और यूक्रेन में रूस की तरफ से लड़ने वाले वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोजिन ने अब रूस के खिलाफ ही बगावत शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के मुताबिक येवगेनी प्रिगोजिन के लड़ाके राजधानी मॉस्को में घुस चुके हैं और राजधानी की सड़कों पर वैगनर ग्रुप के टैंक्स देखे जा रहे हैं। फिलहाल मॉस्को को हाई अलर्ट पर रख गया है और वहां तक पहुंचने वाले M-4 मोटर वे को ब्लॉक कर दिया गया है।

इस बीच वैगनर चीफ ने दावा किया है, कि वह यूक्रेन सीमा के करीब दक्षिणी रूस में रोस्तोव-ऑन-डॉन में है, और उसकी सेना के पास वहां सैन्य सुविधाओं और हवाई क्षेत्र का नियंत्रण में ले लिया है।
येवगेनी प्रिगोजिन ने एक वीडियो संदेश में दावा किया है, कि काफी रूसी सैनिक भी उनके समर्थन में हैं। टेलीग्राम पर पोस्ट एक ऑडियो नोट में प्रिगोजिन ने कहा कि जिन लोगों ने उनके लड़ाकों को मारा है और यूक्रेन युद्ध के दसियों हजार सैनिकों को मरवाया है, उन्हें दंडित किया जाएगा।
वैगनर ग्रुप के पलटवार के बाद अब यूक्रेन को नेस्तनाबूत करने का दावा करने वाले पुतिन के सामने खुद की सत्ता बचाने की चुनौती आ गई है। अब सवाल उठता है क्या वैगनर ग्रुप में इतनी ताकत है, कि पुतिन को सत्ता से फेंक सके?
वैगनर का मतलब 'भाड़े के लड़ाके' होता है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने जनवरी में बताया था कि वागनर ग्रुप के पास यूक्रेन में करीब 50 हजार लड़ाके हैं जो रूस की तरफ़ से लड़ रहे हैं।
हाल में ही जब रूस ने यूक्रेन के बखमुत शहर पर कब्जा किया था तो इसमें वैगनर ग्रुप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। न सिर्फ यूक्रेन बल्कि वैगनर ग्रुप की तैनाती क्राइमिया, सीरिया, लीबिया, माली और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में भी रही है।
यूक्रेन पर हमला करने से पहले वैगनर गुट के लड़ाके पूर्वी यूक्रेन में फॉल्स फ्लैग अभियानों को अंजाम दे रहे थे ताकि रूस को हमला करने का बहाना मिल सके।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वैगनर ग्रुप को दिमित्री उत्किन नाम के एक व्यक्ति ने 2014 में बनाया था। वैगनर ग्रुप में कई बटालियन हैं। वैगनर ग्रुप में कई बटालियन हैं। हर बटालियन में 400 लड़ाके हैं। इनके लड़ाकों के पास आधुनिक हाथियार होते हैं।
वैगनर ग्रुप में शामिल सभी लड़ाके दुर्दांत अपराधी रहे हैं। उनके पास बीते कुछ सालों में युद्ध का काफी अनुभव भी है। उनके पास रूसी सेना से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी मौजूद हैं। हालांकि फिर किसी प्राइवेट आर्मी के लिए रूसी सेना को हराना लगभग नामुमकिन है। फिर भी ये विद्रोह पुतिन के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही दुश्मन देश यूक्रेन में चल रहे अभियान को भी इस घटना से गंभीर झटका लगा है।












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