Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Explainer: हिंदुओं के काल्पनिक देश कैलासा को मिलेगी मान्यता? नित्यानंद कैसे जुटा रहा है दुनिया में समर्थन...

Nithyananda's Kailasa News: कभी भी किसी काल्पनिक देश ने इतनी परेशानी नहीं पैदा की, जितनी परेशानी कैलासा कर रहा है। पैराग्वे में एक अधिकारी को कैलासा के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद बर्खास्त कर दिया गया है।

"यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा" स्वयंभू बाबा नित्यानंद के दिमाग की उपज थी, जो कर्नाटक में अपने खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने के बाद भारत से भाग गया था। भगोड़े नित्यानंद ने 2019 में इक्वाडोर के तट पर एक द्वीप खरीदने के बाद यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा (यूएसके) की स्थापना करने का दावा कर दिया, जिसे उसने दुनिया का पहला हिंदू देश कहा।

इस काल्पनिक हिंदू देश का नाम तिब्बत में कैलाश पर्वत से प्रेरित है।

इसकी वेबसाइट इसे "दुनिया भर में विस्थापित हिंदुओं द्वारा बहाल किए जा रहे एक प्राचीन प्रबुद्ध हिंदू सभ्यता राष्ट्र के पुनरुद्धार" के रूप में वर्णित करती है।

नित्यानंद का ठिकाना अज्ञात है, लेकिन अज्ञात रहकर वो अपने कैलासा को मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है। क्योंकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि किसी देश का कोई बड़ा अधिकारी, किसी अज्ञात देश के साथ किसी एमओयू पर साइन कर ले, जैसा की पैराग्वे के अधिकारी ने किया है। और ये भी संभव नहीं है, कि संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में काल्पनिक देश कैलासा के प्रतिनिधियों को यूंही ना सिर्फ आमंत्रित कर दिया जाए, बल्कि देश के प्रतिनिधि कार्यक्रम में हिस्सा भी लें और अपनी बात भी रखें।

Nithyanandas Kailasa News

लिहाजा, आइए उन विवादों पर करीब से नज़र डालें, जिनमें कैलासा उलझा हुआ है और यह कैसे परेशानियां पैदा कर रहा है?

पराग्वे के अधिकारी सस्पेंड

पराग्वे सरकार के एक अधिकारी को यह खुलासा होने के बाद सस्पेंड दिया गया है, कि उन्होंने काल्पनिक देश कैलासा के प्रतिनिधियों के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि जब एमओयू पर दस्तखत किए गये, उस वक्त पैराग्वे के कृषि मंत्री भी मंच पर मौजूद थे।

लिहाजा, एक सेकंड के लिए अगर ऐसा मान लें, कि पैराग्वे के अधिकारी और सरकार को एमओयू साइन करने से पहले कैलासा के बारे में जानकारी नहीं थी, तो फिर ऐसा प्रतीत होता है, कि दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र के कई अन्य अधिकारियों को भी कैलासा के प्रतिनिधियों ने मूर्ख बनाया है, जिन्होंने कैलासा को एक दक्षिण अमेरिकी द्वीप के रूप में प्रस्तुत किया है।

पैराग्वे के अधिकारी अर्नाल्डो चमोरो थे और वो कृषि मंत्रालय के चीफ ऑफ स्टाफ थे, लेकिन यह खुलासा होने के बाद, कि उन्होंने एक काल्पनिक देश के साथ एमओयू साइन किया है, उनकी कुर्सी छीन ली गई।

इस एमओयू में दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में, दोनों "देशों" के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की परिकल्पना की गई थी। इसीलिए इस बात पर हैरानी होती है, कि आखिर कैलासा की हकीकत से पैराग्वे अनजान था, इसपर कैसे यकीन किया जाए?

Nithyanandas Kailasa News

इसके अलावा, पैराग्वे सरकार ने एमओयू में वादा किया था, कि वो संयुक्त राज्य कैलासा के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश का समर्थन करने के लिए सक्रित तौर पर "ईमानदारी से इच्छा और सिफारिश" करेगा। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए समझौते की एक प्रति के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में एक संप्रभु और स्वतंत्र राज्य के रूप में कैलासा को मान्यता देने की भी बात पैराग्वे ने की थी।

पैराग्वे मंत्रालय के लेटरहेड और आधिकारिक मुहर के साथ पूर्ण दस्तावेज़ में, कृषि मंत्रालय के चीफ ऑफ स्टाफ चमोरो ने लिखा था, कि "संयुक्त राज्य कैलासा के संप्रभु, माननीय नित्यानंद परमशिवम" को सलाम करता है और "हिंदू धर्म, मानवता और पैराग्वे गणराज्य के लिए उनके योगदान" की प्रशंसा करता है।"

एम चमोरो ने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा, काल्पनिक देश के प्रतिनिधियों ने चमोरो और कृषि मंत्री कार्लोस जिमेनेज से मुलाकात की।

हालांकि रेडियो इंटरव्यू के दौरान, चमोरो ने स्वीकार किया, कि उन्हें नहीं पता कि कैलासा कहां स्थित है और उन्होंने कहा, कि उन्होंने "समझौता ज्ञापन" पर हस्ताक्षर किए हैं, क्योंकि कैलासा ने पैराग्वे को सिंचाई सहित विभिन्न मुद्दों पर मदद करने की पेशकश की थी।

कैलासा के सोशल मीडिया अकाउंट्स में पोस्ट की गई तस्वीरों में काल्पनिक देश के प्रतिनिधियों को मारिया एंटोनिया और करपई नगर पालिकाओं के स्थानीय नेताओं के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए भी दिखाया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट ने इनमें से प्रत्येक हस्ताक्षर का जश्न मनाया गया है।

Nithyanandas Kailasa News

कैलासा की कारस्तानियों को जानिए

ऐसा नहीं है, कि कैलासा ने पहली बार किसी देश को ठगा है, बल्कि अब कैलासा की जालसाजियों का रिकॉर्ड तगड़ा बनने लगा है।

इसी साल मार्च महीने में, न्यू जर्सी के नेवार्क सिटी हॉल ने स्वीकार किया, कि जब उसने कैलासा के साथ "सिस्टर-सिटी" समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो उसके साथ धोखाधड़ी हुई थी।

नेवार्क और नकली "यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा" के बीच सिस्टर-सिटी समझौता 12 जनवरी को हुआ था और हस्ताक्षर समारोह नेवार्क के सिटी हॉल में हुआ था।

इसका खुलासा तब हुआ, जब यह पता चला कि 30 से ज्यादा अमेरिकी शहरों ने कैलासा के नकली राष्ट्र के साथ एक सांस्कृतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं और इन अमेरिकी शहरों में रिचमंड, वर्जीनिया से लेकर डेटन, ओहियो तक के शहर, ब्यूना पार्क, फ्लोरिडा तक शामिल हैं।

उत्तरी कैरोलिना ने फॉक्स न्यूज को बताया, कि "कैलासा के साथ हमारी घोषणाएं कोई समर्थन नहीं हैं। वे एक अनुरोध की प्रतिक्रिया हैं और हम अनुरोध की गई जानकारी को सत्यापित नहीं करते हैं।

हालांकि, फ़ॉक्स न्यूज़ ने इन राज्यों को यह कहकर दोषी ठहराया, क्या इन्होंने किसी भी तरह का कार्यक्रम आयोजित करने से पहले नकली कैलासा राष्ट्र के बारे में एक बार गूगल तक नहीं किया?

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, कि सिर्फ मेयर या नगर परिषद ही नहीं, बल्कि "संघीय सरकार चलाने वाले लोग" भी नकली राष्ट्र के झांसे में आ रहे हैं।

इसमें कहा गया है कि नकली गुरु के अनुसार, कांग्रेस के दो सदस्यों ने कैलासा को "विशेष कांग्रेस मान्यता" दी है। उनमें से एक कैलिफोर्निया की कांग्रेस महिला नोर्मा टोरेस हैं, जो सदन विनियोग समिति में हैं।

लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या ये तमाम लोग झांसे में आ रहे हैं, या वाकई कैलासा को समर्थन और मान्यता देने की कोई मुहिम चल रही है। क्योंकि इसपर यकीन करना काफी मुश्किल हो रहा है, कि अमेरिकी संसद के दो सांसद ने कैलासा को मान्यता दे दी है।

इसके अलावा, ओहियो से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ट्रॉय बाल्डरसन ने भी "अपनी दिव्य पवित्रता और हिंदू धर्म के पुजारी को कांग्रेस की मान्यता प्रदान कर दी है।"

यूनाइटेड नेशंस में भी पहुंचा कैलासा

इस साल की शुरुआत में, कैलासा के प्रतिनिधि जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समिति की बैठक में भी भाग लेने में कामयाब रहे हैं। कैलासा के प्रतिनिधियों ने फरवरी में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समिति की दो बैठकों में भाग लिया था। पहली बैठक, 22 फरवरी को महिलाओं के खिलाफ भेदभाव उन्मूलन समिति (सीईडीएडब्ल्यू) द्वारा निर्णय लेने वाली प्रणालियों में महिलाओं के समान और समावेशी प्रतिनिधित्व पर एक सामान्य चर्चा थी।

दूसरी बैठक, 24 फरवरी को आर्थिक, सामाजिक सांस्कृतिक अधिकारों और सतत विकास पर सामान्य टिप्पणी पर एक सामान्य चर्चा थी, जिसे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार समिति (सीईएससीआर) द्वारा आयोजित किया गया था।

विजयप्रिया नित्यानंद नाम की एक महिला के नेतृत्व में प्रतिनिधियों - जिन्होंने "संयुक्त राज्य कैलासा देश से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी राजदूत" होने का दावा किया, उन्होंने "हिंदू धर्म के सर्वोच्च पोंटिफ (एसपीएच)" के लिए सुरक्षा की मांग की।

उन्होंने दावा किया कि नित्यानंद को "सताया जा रहा है।" यानि, कैलासा के प्रतिनिधियों ने परोक्ष तौर पर भारत पर आरोप लगाया था, कि नित्यानंद को सताया जा रहा है, लिहाजा नित्यानंद को सुरक्षा दी जाए।

विजयप्रिया ने उस समय कहा था, कि "कैलासा हिंदुओं के लिए पहला संप्रभु राज्य है, जिसे हिंदू धर्म के सर्वोच्च पुजारी नित्यानंद परमशिवम द्वारा स्थापित किया गया है, जो प्रबुद्ध हिंदू सभ्यता और हिंदू धर्म की 10,000 स्वदेशी परंपराओं को पुनर्जीवित कर रहे हैं, जिसमें आदि शैव स्वदेशी कृषि जनजातियां भी शामिल हैं। जिसका हिंदू धर्म का सर्वोच्च मठाधीश भी नेता है।"

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+