15 वर्ष बाद अमेरिका पर बढ़ गया आतंकी खतरा और चुनौतियां
वाशिंगटन। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के 15 वर्ष बाद भी अमेरिका पर आतंकी हमलों का खतरा बरकरार है। अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो अमेरिका पर किसी छोटे से छोटे आतंकी हमले का खतरा बना हुआ है खासतौर पर देश में मौजूद आतंकी तत्वों से।

कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी बड़ी मुसीबत
अमेरिका में काउंटर-टेरर ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों पर इन दिनों खासा दबाव है। आईएसआईएस और अल कायदा जैसे आतंकी तत्वों से सहानुभूति रखने वाले कई संगठन नई कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी की वजह से अपनी साजिश को
अंजाम देने में लगे रहते हैं।
नेशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर के निक रैसम्यूसेन कहते हैं कि दिन पर दिन उनका काम और कठिन होता जा रहा है। निक उन लोगों में शुमार है जिन्हें काउंटर-टेररिज्म में काफी ताकतवर माना जाता है।
वह कहते हैं कि आज के दौर में स्मार्ट फोन एप्स और आसानी से मिलने वाले एनक्रिप्शन के अलावा आतंकी हर पल एक-दूसरे से कनेक्ट हैं।
अल कायदा के बाद आईएसआईएस
9/11 आतंकी हमलों को उन हमलों में से एक माना जाता है जिसने अमेरिका को अल कायदा और तालिबान के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक नए सिरे से शुरू करने की प्रेरणा दी थी।
आज 15 वर्ष बाद अमेरिका के लिए चुनौतियां और बढ़ गई है। इन चुनौतियों में आईएसआईएस सबसे अहम है जिसने सीरिया और इराक को अपने कब्जे में ले रखा है।
आईएसआईएस इतना ताकतवर हो गया है कि यूरोप और अमेरिका में अब उसके ऑपरेटिव्स मौजूद हैं। भले ही आतंकियों की संख्या कम हो और ये भले ही 9/11 के आतंकियों से कम स्तर पर हों, लेकिन यह अमेरिका में तबाही लाने के लिए काफी हैं।
आईएसआईएस के अलावा अल कायदा आज भी गले की हड्डी बना हुआ है। ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी के बिना आज यह संगठन फिलीपींस से लेकर अफ्रीका तक में मौजूद है। आज भी यह अमेरिका के लिए किसी भी पल बड़ा खतरा बन सकता है।
कई गुना है खतरा
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी साइबर एंड होमलैंड सिक्योरिटी के डायरेक्टर फ्रैंक किल्फुओ कहते हैं कि अब सीरिया से लेकर इराक तक आतंकी बहुत ही बड़े स्तर पर मौजूद हैं। यह वास्तविकता है और इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा। खतरा मौजूद है और यह वर्तमान समय में कई गुना है।
अमेरिका में पिछले वर्ष सेंट बर्नाडिनो वाली घटना ने साबित कर दिया था कि कैसे अमेरिका में मौजूद हिंसक आतंकी तत्व इंटेलीजेंस एजेंसियों के लिए कई गुना खतरा बन गए हैं।
अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसियां इस समय 1,000 ऐसे केसों में उलझी हैं जिन पर आगे चलकर चरमपंथी बनने का डर है।
एफबीआई के लिए पांच वर्ष तक चुनौती
अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि आईएसआईएस एक दिन जरूर हारेगा। आईएसआईएस में किसी भी तरह की टूट इसके आतंकियों को छिपने पर मजबूर कर सकती है।
वे कई वर्षों तक चुप रहने के बाद नए हमलों की साजिश करेंगे। एफबीआई के डायरेक्टर जेम्स कॉमे की मानें तो अगले पांच वर्षों तक एफबीआई के लिए आईएसआईएस का खतरा बरकरार रहेगा।
खतरनाक आतंकी जनसंख्या में छिप जाएंगे और कई आतंकी यूरोप जा सकते हैं। चरमपंथी विचारधारा आज भी एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।












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