'बांग्लादेश से भारत को बाहर कर देंगे', मोहम्मद यूनुस से मिलकर तुर्की ने किया ऐलान, दिल्ली के लिए नया सिरदर्द?
Turkey Bangladesh Relation: बांग्लादेश और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ऐतिहासिक गिरावट के बीच तुर्की ने फायदा उठाने की कोशिश करनी शुरू कर दी है और अब ढाका, अपने घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी के लिए तुर्की के साथ सहयोग करने पर विचार कर रहा है।
बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, जो लंबे समय से प्रधानमंत्री रही शेख हसीना के देश छोड़कर भागने के बाद अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, उन्होंने 9 जनवरी को ढाका के राजकीय अतिथि गृह जमुना में व्यापार मंत्री डॉ. ओमर बोलत के नेतृत्व में तुर्की के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

बांग्लादेश में भारत को रिप्लेस करेगा तुर्की? (Bangladesh-Turkey Relation)
मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश को दुनिया का आठवां सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बताते हुए कहा, कि उनकी सरकार देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने तुर्की से देश में निवेश करने के लिए कहा और सुझाव दिया, कि वे बांग्लादेश के युवा कार्यबल का उपयोग कारखानों को चलाने के लिए कर सकते हैं, जिससे उन्हें पूरे क्षेत्र में उत्पादों की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी।
चर्चा के दौरान, मोहम्मद यूनुस ने तुर्की से देश में डिफेंस इंडस्ट्री को विकसित करने में मदद करने के लिए अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी बांग्लादेश में लाने का आग्रह किया। मुख्य सलाहकार ने कहा, कि "आप टेक्नोलॉजी के डीलर हैं और आप यहां अपनी डिफेंस इंडस्ट्री बना सकते हैं। आइए शुरुआत करें... हम आपकी किसी भी जरूरत के लिए उपलब्ध हैं।"
तुर्की के व्यापार मंत्री डॉ. ओमर बोलत ने यह भी कहा, कि दोनों देश कपड़ा उद्योग से परे अपने सहयोग में विविधता ला सकते हैं, जो वर्तमान में बांग्लादेश से तुर्की का प्राथमिक आयात है। डिफेंस इंडस्ट्री के अलावा, बोलत ने बांग्लादेश और तुर्की के बीच आर्थिक सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि मशीनरी पर भी प्रकाश डाला है।
तुर्की और बांग्लादेश की बीच कारोबार कितना है?
वित्तीय वर्ष 2023-24 में, बांग्लादेश ने तुर्की को लगभग 581 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का माल निर्यात किया था, जबकि देश से उसका आयात लगभग 424 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का था। वहीं, तुर्की के व्यापार मंत्री ने प्रस्ताव दिया, कि अंकारा बांग्लादेश के आयात बाजारों में भारत और अन्य देशों की भूमिका निभा सकता है।
तुर्की के मंत्री ने कहा, "हम बांग्लादेश के आयात में भारत और अन्य बाजारों की जगह ले सकते हैं। सभी स्तरों पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग हो सकता है।"
आपको बता दें, कि वर्तमान में, बांग्लादेश के अलग अलग क्षेत्रों में तुर्की की 20 कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें कपड़ा और कॉटन उद्योग, सहायक उपकरण, रसायन, इंजीनियरिंग, निर्माण और ऊर्जा शामिल हैं। बांग्लादेश में काम करने वाली तुर्की कंपनियों में AYGAZ, तुर्की LPG कंपनी, कोका-कोला आइसेक और ARCILIK, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर निर्माता शामिल हैं, जिसने सिंगर बांग्लादेश लिमिटेड का भी अधिग्रहण किया है।

तुर्की और बांग्लादेश के बीच बढ़ रहे हैं संबंध
शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश, भारत विरोधियों के साथ संपर्क बढ़ा रहा है, जिनमें चीन और पाकिस्तान भी शामिल हैं। हाल ही में बांग्लादेश की सेना ने पहली बार पाकिस्तान की सेना के साथ सैन्य प्रशिक्षण के लिए ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जो 1971 के बाद पहली बार हुआ है।
फरवरी 2025 में शुरू होने वाला यह प्रशिक्षण दोनों देशों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है, कि वह अपनी धरती पर पाकिस्तानी सैन्य बलों की मेजबानी करेगा और ये एक ऐसा दृश्य होगा, जिसकी पहले कई बांग्लादेशियों ने कल्पना भी नहीं की थी।
इस समझौते से पहले दिसंबर 2024 में काहिरा में एक सम्मेलन के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस के बीच एक बैठक हुई थी। बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने आपसी हित के सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जो उनके संबंधों में एक नए अध्याय का संकेत है।
इस बीच, 5 जनवरी 2025 को, बांग्लादेश ने अपने जजों की भारत में ट्रेनिंग रद्द कर दी और यह एक ऐसा इशारा है, जो नई दिल्ली के साथ संबंधों में बढ़ते तनाव को दर्शाता है। तुर्की के शामिल होने से बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की का एक संभावित रणनीतिक गठजोड़ उभर रहा है और एक ऐसा गठबंधन बन रहा है, जो क्षेत्र में भारत के प्रभाव को संतुलित कर सकता है।
माना जा रहा है, कि बांग्लादेश ये कदम इसलिए उठा रहा है, ताकि वो भारत पर अपनी निर्भरता को कम कर सके।
हालांकि, तुर्की पहले से ही बांग्लादेश को हथियारों की सप्लाई करता रहा है, लेकिन अब हाल ही में बांग्लादेश और तुर्की रक्षा निर्माता ओटोकर ओटोमोटिव वी सवुनमा सनाय ए.एस. के बीच 26 तुलपर लाइट टैंक हासिल करने के लिए चल रही बातचीत के बारे में रिपोर्ट सामने आई हैं। कंपनी के अनुसार, तुलपर एक बहुमुखी प्लेटफॉर्म है जिसमें उच्च मारक क्षमता, मॉड्यूलरिटी और भविष्य की विकास क्षमता है, जिसे वर्तमान और भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
बांग्लादेशी सैन्य विश्लेषक तुर्की निर्मित हथियारों को उनकी विश्वसनीयता, आधुनिकता और सामर्थ्य के लिए काफी हाई रैंक करते हैं। 2010 के मध्य से, बांग्लादेश ने तुर्की से कम से कम 15 विभिन्न प्रकार के सैन्य उपकरण आयात किए हैं। यह देश को तुर्की सैन्य सामानों के लिए चौथा सबसे बड़ा बाजार बनाता है।
बांग्लादेश सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में ओटोकर कोबरा II पैदल सेना गतिशीलता वाहन (IMV), माइन-रेसिस्टेंट एम्बुश-प्रोटेक्टेड (MRAP) वाहन, ओटोकर कोबरा I लाइट आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल (AFV), RN-94 आर्मर्ड एम्बुलेंस, TRG-300 टाइगर MLRS और TRG-230 सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें (SSM) शामिल हैं।
हालांकि, बांग्लादेश को तुर्की के रक्षा निर्यात का मुकुट रत्न बायरकटर TB2 ड्रोन है। हाल ही में एक TB-2 ड्रोन ने तब ध्यान खींचा था, जब इसे भारतीय राज्य मेघालय की सीमा के पास देखा गया।
उस समय, बायरकटर TB2 ड्रोन के देखे जाने से भारत में रक्षा विशेषज्ञों में चिंताएं पैदा हो गई थीं, कुछ ने सरकार से निर्णायक कार्रवाई करने का आग्रह किया था। सख्त उपायों की माँग की गई थी, जिसमें तुर्की निर्मित ड्रोन को फिर से भारतीय सीमाओं के पास देखे जाने पर मार गिराने का संभावित विकल्प भी शामिल था।
बायरकटर टीबी2 यूसीएवी ने यूक्रेन, सीरिया, नागोर्नो-करबाख, इथियोपिया, बुर्किना फासो और माली सहित कई संघर्षों में अपनी उपयोगिता साबित की है। तुर्की में बने हथियारों के अपने शस्त्रागार में शामिल करने के अलावा, ढाका एक आधुनिक लड़ाकू जेट की खरीद पर भी विचार कर रहा है, जिसके दो प्रमुख दावेदार हैं: फ्रांसीसी राफेल और यूरोफाइटर टाइफून। बांग्लादेश के एक अधिकारी ने पहले यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा था, कि चूंकी भारतीय वायु सेना, राफेल को ऑपरेट करती है, इसलिए यूरोफाइटर टाइफून अब बांग्लादेश की भविष्य की वायु रक्षा जरूरतों के लिए ज्यादा संभावित विकल्प प्रतीत होता है। यानि, नजदीकी भविष्य में इस बात की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, कि भारत और बांग्लादेश के बीच अच्छे संबंध होंगे।












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