इन 5 वजहों के चलते तीसरा विश्व युद्ध दे रहा है दस्तक, जानिए क्यों पुतिन के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा
कीव/ वॉशिंगटन/ मास्को, 27 फरवरी। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच दुनियाभर के देश लगातार रूस पर दबाव बना रहे हैं कि वह इस युद्ध को खत्म करे और यूक्रेन से अपनी सेना को वापस बुलाए। इस दिशा में अलग-अलग देश लगातार रूस पर एक-एक करके प्रतिबंध लगा रहे हैं। हालांकि अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों ने रूस पर अलग-अलग कई प्रतिबंध लगाए लेकिन इसका रूस पर कोई खास असर होता नहीं दिख रहा था। जिसके बाद अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने रूस के कुछ बैंकों पर स्विफ्ट ट्रांजैक्शन का प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद माना जा रहा है कि यह रूस के ऊपर यह एक तरफ का वित्तीय परमाणु हमला है।


बाइडेन बोले- हमारे पास सिर्फ दो ही विकल्प
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी साफ तौर पर कहा है कि रूस पर इन प्रतिबंधों के अलावा दूसरा विकल्प तीसरा विश्व युद्ध ही है। बाइडेन ने कहा कि आपके पास दो विकल्प हैं, पहला या तो तीसरा विश्व युद्ध शुरू करिए, रूस के साथ युद्ध करिए या फिर रूस पर वो प्रतिबंध लगाए जाए जिससे रूस द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन की उसे कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन पर हमले के तत्कालीन और लंबे समय तक परिणाम भुगतेगा। इसके लंबे समय में परिणाम काफी गंभीर होंगे।

विदेशी मुद्रा भंडार फंसने से बढ़ेगी रूस की बेचैनी
दरअसल रूस को तकरीबन 40 फीसदी राजस्व तेल और गैस के निर्यात के बिजनेस से मिलता है। इसी के चलते रूस ने अपने विदेशी राजस्व भंडार को 630 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दिया है। ऐसे में स्विफ्ट ट्रांजैक्शन प्रतिबंध से रूस को विदेशों में इसे बेचने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। यही नहीं स्विफ्ट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध से रूस दूसरे देशों के साथ व्यापार नहीं कर पाएगा। उदाहरण के तौर पर अगर रूस को किसी दूसरे देश को हथियार बेचना है या खरीदना है तो उसे पैसों के लेनदेन में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

देश में प्रदर्शन से बढ़ेगा दबाव
अमेरिका और यूरोपियन यूनियन द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध के बाद रूस के राष्ट्रपति के पास विकल्प काफी कम हो जाएगे। ऐसे में संभव है कि राष्ट्रपति पुतिन कोई बड़ा कदम उठाए, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि पुतिन परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का भी फैसला ले लें। दरअसल स्विफ्ट ट्रांजैक्शन प्रतिबंध के बाद रूसी नागरिकों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा, जिसके बाद इस बात की पूरी संभावना है कि लोग अपनी ही सरकार के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने लगे। इस वित्तीय संकट में रूसी नागरिकों के दबाव में राष्ट्रपति पुतिन कोई बड़ा फैसला लेने पर मजबूर हो सकते हैं। साथ ही रूस में तख्ता पलट की संभावना भी बढ़ सकती है।

बेलारूस के साथ किया था परमाणु अभ्यास
राष्ट्रपति पुतिन के पास अपने देश में उठने वाली आवाज को दबाने के लिए सेना के इस्तेमाल के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। एक तरफ जहां देश के लोग खुद अपनी सरकार के खिलाफ सड़क पर होंगे, दूसरी तरफ वह यूक्रेन को पूरी तरह से अपने साथ लाने में विफल रहे और अब स्विफ्ट प्रतिबंध के बाद पुतिन पर भारी दबाव होगा, ऐसे में संभव है कि राष्ट्रपति पुतिन कोई बड़ा कदम उठाएं। रूस की राजनीतिक व्यवस्था की बात करें तो यह तरह से तानाशाही व्यवस्था है। लिहाजा राष्ट्रपति पुतिन परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह याद रखने वाली बात है कि हाल ही में रूस ने बेलारूस के साथ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की एक ड्रिल भी की थी। इस दौरान इस बात पर मंथन किया गया कि परमाणु हमले के दौरान कैसे रूसी नागरिकों और सैनिकों को इसके रैडिएशन के प्रभाव से बचाया जाए।

पहले ही दे चुके हैं साफ चेतावनी
पुतिन पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को एक समिट के दौरान साफ तौर पर कहा था कि अगर हमपर भारी प्रतिबध लगाया जाता है तो हम इसे युद्ध की कार्रवाई मानेंगे। पुतिन के इस बयान को उस समय यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव के साथ जोड़कर देखा गया था। पुतिन ने कहा था कि मुझे उम्मीद है कि हमारी आने वाली पीढ़ियां हमे इसके लिए गलत तरह से जज नहीं करेंगी। लिहाजा जिस तरह से स्विफ्ट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध लगाया गया है उसे पुतिन निसंदेह युद्ध की कार्रवाई मानेंगे।

स्विफ्ट ट्रांजैक्शन बैन के बाद विकल्प होंगे खत्म
ऐसे में पुतिन के पास स्विफ्ट ट्रांजैक्शन के प्रतिबंध को युद्ध की कार्रवाई मानने के लिए अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर वह इसे युद्ध की शुरुआत नहीं मानते हैं तो उनके देश में होने वाले प्रदर्शन और आने वाली वित्तीय समस्या काफी उनपर काफी भारी पड़ सकती है। लिहाजा पुतिन को रुस के खिलाफ इस कार्रवाई को युद्ध की कार्रवाई मानने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आता है। लिहाजा विश्व की शांति को इस समय जरूर एक बड़ा खतरा है। बहरहाल देखने वाली बात यह है कि पुतिन स्विफ्ट बैन के बाद क्या कदम उठाते हैं. पुतिन के कदम पर दुनियाभर के देशों की नजर रहेगी।












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