हवाई में लगी आग में जल गया भारत से मंगवाया गया पवित्र बरगद, 150 साल में बन गया था US का सबसे बड़ा पेड़
Hawaii Wildlife Fire: अमेरिका के द्वीप राज्य हवाई के जंगलों में लगी भीषण आग में 67 लोगों की मौत हो चुकी है और अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार बहती हवा की वजह से जंगल की आग की प्रचंडता कम होने का नाम नहीं ले रही है।
आग की वजह से हजारों घर जलकर खाक हो चुके हैं, तो सड़कों पर सैकड़ों गाड़ियों को राख के ढेर में तब्दील हुए देखा जा सकता है। ये आग हवाई के माउई के जंगलों में लगी है, जिसने भारी तबाही मचाई है। सैकड़ों एकड़ में जंगल खाक हो चुका है, जिसमें भारत से 150 साल पहले ले जाया गया पवित्र बरगद का पेड़ भी जल गया है।

भारत में पीपल और बरगद के पेड़ को पवित्र माना जाता है और उसे डेढ़ सौ साल पहले हवाई के जंगल में भारत से ले जाकर लगाया गया था, जो अमेरिका में सबसे बड़े पेड़ों में से एक बन गया था, लेकिन आग की वजह से बरगद के पेड़ को काफी नुकसान हुआ है।
1873 में लगाया गया था बरगद का पौधा
ऑनलाइन पोर्टल lahainatown.com के मुताबिक, हवाई के लोगों के बीच ये बरगद का पेड़ पनियाना के नाम से जाना जाता था और ये एक विशाल पेड़ बन चुका था, जिसमें 46 मोटे-मोटे तने थे। इस बरगद के पेड़ को 1873 में माउई के लाहिना शहर में उस वक्त लगाया गया था, जब ये सिर्फ 8 फीट का पौधा था।
1873 में लाहिना कोर्टहाउस और लाहिना हार्बर के सामने लगाया गया यह विशाल पेड़, संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़े बरगद के पेड़ों में से एक था, जो फ्रंट स्ट्रीट के साथ पूरे शहर के ब्लॉक के आकार का है। ये बरगद का पेड़ 60 फीट से ज्यादा ऊंचा था और ये स्थानीय लोगों के बीच काफी मशहूर भी था। लेकिन, आग लगने से इस पेड़ का बड़ा हिस्सा जल गया है और अब इसके बचने की संभावना काफी कम है।

लाहिना में आग से भारी तबाही
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐतिहासिक शहर लाहिना में आग की वजह से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। शहर के केंद्र में जो कुछ भी है, वह पूरी तरह से तबाह हो गया है। आग के कारण बहुमूल्य और विशाल बरगद के पेड़ के सारे पत्ते जल गये हैं।
दिलचस्प बात यह थी, कि बरगद के पेड़ ने इस साल अप्रैल में अपना 150वां जन्मदिन मनाया। हालांकि, ये बरगद का पेड़ अभी भी खड़ा है, लेकिन अब इसपर नाम मात्र के ही पत्ते बचे हैं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ने जांच के बाद उम्मीद जताई है, कि ये बरगद का पेड़ ठीक हो जाएगा, क्योंकि इसकी जड़ें नहीं जली हैं।
लाहिना रेस्टोरेशन फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक थियो मॉरिसन ने बीबीसी को बताया, कि "मुझे पूरा विश्वास है, कि ये बरगद का पेड़ फिर से हरा-भरा हो जाएगा। आग में जले हुए इस बरगद के पेड़ को मर जाते देखना, वास्तव में काफी मुश्किल है।"
बरगद का पेड़: लाहिना में एक प्रमुख मील का पत्थर
हवाई पर्यटन प्राधिकरण के मुताबिक, लाहिना शहर में इस बरगद के पेड़ को एक प्रमुख मील का पत्थर माना जाता है। इसके साथ ही, विशालकाय इस बरगद के पेड़ के नीचे हर दिन सैकड़ों लोग बैठते थे, गपशप करते थे और ये आने-जाने वालों को ठंडी छाया दिया करता था।
थियो मॉरिसन ने बीबीसी को कहा, "बरगद के पेड़ का मरना वास्तव में बहुत कठिन है।"
लाहिना रेस्टोरेशन फाउंडेशन के अनुसार, इस पेड़ में इसके विशाल मूल तने के अलावा 46 प्रमुख तने हैं और यह लगभग दो-तिहाई एकड़ क्षेत्र को छाया देता है। सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पेड़ के स्वास्थ्य और आकार का रखरखाव माउई काउंटी आर्बोरिस्ट कमेटी द्वारा किया जाता है।

माउई में जंगल की आग से 67 की मौत
माउई में विनाशकारी जंगल की आग ने अब तक कम से कम 67 लोगों की जान ले ली है और हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं। सरकार ने बयान में कहा है, कि "लाहिना की आग पर अभी तक काबू नहीं पाया गया है।"
इससे पहले, हवाई के गवर्नर जोश ग्रीन ने कहा कि हवाई के माउई द्वीप पर जंगल की आग से मरने वालों की संख्या 59 तक पहुंच गई है। सीएनएन से बात करते हुए, ग्रीन ने कहा, कि वे सभी मौतें खुले में हुईं, इमारतों में नहीं, "क्योंकि लोग आग से बचने की कोशिश कर रहे थे।" उन्होंने कहा, कि अभी और मौतें होंगी। जोश ग्रीन ने कहा, कि "बिना किसी शक के, काफी मौतें हो सकती हैं, हम नहीं जानते, अभी तक कितने लोग मारे गये होंगे।"












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