यूक्रेन युद्ध अगर अब रूस जीत भी जाता है, तो उसकी जीत किस तरह की होगी? पुतिन के हाथ क्या आएगा?

रूस की तैयारी भले ही काफी तेज गति से चल रही हो, लेकिन देखा जाए तो क्रेमलिन के पास जश्न मनाने के लिए बहुत कुछ नहीं है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर कब्जा करने के अपने उद्देश्य में नाकामयाब हो रहे हैं...

मॉस्को/कीव, मई 06: दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 9 मई को रूस ने जर्मनी को हराया था और हर साल की तरफ इस साल भी रूस विजय दिवस मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रहा है। रूस हमेशा से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों के आत्मसमर्पण को एक भव्य तमाशे की तरह मनाता है, जो कि प्रोजेक्ट पर आधारित है। जिसका मकसद होता है, रूस की स्थायी शक्ति के बारे में दुनिया को याद दिलाना, रूस की शक्तियों के बारे में दुनिया को दिखाना, अपने टैंक, बम और विनाशकारी हथियारों की प्रदर्शनी करना, जिसे रूस की सरकार "महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध" के रूप में मनाती है, जिसमें हिटलर की वजह से द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गये 2 करोड़ 40 लाख लोगों को श्रद्धांजलि देना भी शामिल रहता है। लेकिन, जो युद्ध अभी रूस लड़ रहा है, उससे उसे अब क्या हासिल होगा?

तमाशे के लिए तैयार मॉस्को

तमाशे के लिए तैयार मॉस्को

हाल के दिनों में रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के सामने सड़कों पर रूसी सैनिक रिहर्सल कर रहे हैं और संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं, कि शक्ति प्रदर्शन किस तरह का होने वाला है। रूस के शक्ति प्रदर्शन के दौरान एर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल शो स्टॉपर के तौर पर और 11,000 मार्चिंग फोर्स शामिल होगा। इसके साथ ही रूस की वायुसेना अपने फाइटर जेट्स को इस डिजाइन के साथ उड़ाएगी, ताकि वो Z की आकृति बनाए। आपको बता दें कि, यूक्रेनी सेना Z साइन बनी गाड़ियों के साथ ही यूक्रेन में हमले करती है।

जश्न मनाने लायक है रूस?

जश्न मनाने लायक है रूस?

रूस की तैयारी भले ही काफी तेज गति से चल रही हो, लेकिन देखा जाए तो क्रेमलिन के पास जश्न मनाने के लिए बहुत कुछ नहीं है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन पर कब्जा करने के अपने उद्देश्य में नाकामयाब हो रहे हैं और उस देश में नाकाम हो रहे हैं, जिसे उन्होंने 96 घंटों में जीतने की धमकी दी थी और उस देश में हार रहे हैं, जिसे वो मानकर चर रहे थे, कि ये लड़ाई असल में एक वॉकओवर होगा। सामरिक गलतियों के कारण रूस की सेना को ही विनाशकारी नुकसान हुआ है और ब्रिटेन और यूक्रेन का दावा है, कि पिछले दो महीने में रूस के 15 हजार सैनिक मारे जा चुके हैं। जबकि, दुनिया की नजर में रूस की सेना काफी ज्यादा आधुनिक और अच्छी तरह से सुसज्जित सेना थी, जिसने चौंकाने वाला बुरा प्रदर्शन किया है।

कई मोर्चों पर रूस रहा नाकाम

कई मोर्चों पर रूस रहा नाकाम

यूक्रेन में देखने को मिला है कि, रूस की सेना बुरी तरह से बिखरी हुई थी और यूक्रेनी सैनिकों ने काफी आसानी से रूसी सैनिकों के सप्लाई लाइन को ध्वस्त किया और माना जा रहा है, कि इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अपने बहुत छोटे विरोधी को काफी कम करके आंकना है और रूस को इसका गलत आकलन करना, कि पश्चिम के पास कोई विकल्प नहीं होगा, क्योंकि उसने परमाणु हमले की धमकी दी। एकीकृत पश्चिम ने यूक्रेन को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है और करोड़ों के हथियारों की आपूर्ति कर चुका है, लिहाजा रूस ने रणनीति बदली और राजधानी कीव से पीछे हटना शुरू किया और फिर से उसे पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई शुरू कर दी। लेकिन, फिर भी डोनबास जैसे छोटे क्षेत्र पर भी पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर 9 मई को जीत की जश्न की रैली में जीत की घोषणा करना असंभव लगता है। पिछले एक हफ्ते में, रूसी सैनिकों ने डोनबास में भी बढ़त हासिल करने में संघर्ष किया है, जहां पहले से ही रूस समर्थक अलगाववादी भरे पड़े थे।

रूस के जीत का मतलब क्या?

रूस के जीत का मतलब क्या?

जीत का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग चीजें हैं। पूरे यूक्रेन पर कब्जा करने में नाकाम रहने के बाद अब यह स्पष्ट नहीं है, कि इस बिंदु पर पुतिन के लिए जीत का क्या मतलब होगा? यह तय है, कि यूक्रेन को पश्चिमी देशों का समर्थन मिलता रहेगा, और यूक्रेन की सेना अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए जमकर संघर्ष करेंगे। किसी स्तर पर, कोई यह तर्क दे सकता है, कि यूक्रेन पहले ही रणनीतिक रूप से जीत चुका है, क्योंकि उसने नाटो को एकजुट किया और प्रभावी युद्ध में नेतृत्व का प्रदर्शन किया। अत्यधिक संख्या में रूसी सैनिकों की मौजूदगी के बाद भी यूक्रेनी सेना ने अपनी राजधानी को रूसियों के हाथों में जाने से रोका और यूक्रेनी सैनिकों ने ही रूसी सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

यानि...कोई नहीं जीतेगा युद्ध?

यानि...कोई नहीं जीतेगा युद्ध?

वर्तमान में जो हालात हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि, युद्ध अब एक आकस्मिक चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां दोनों पक्ष बिना किसी स्पष्ट लाभ के एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करेगा। लेकिन, रूस के लिए ये युद्ध कहां हैं? जिस युद्ध को शुरू कर पुतिन ने अपनी प्रतिष्ठा बर्बाद कर ली, देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया, फिर भी अपने किसी भी उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे, वो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 9 मई को "जीत" कैसे तय करेंगे? और आने वाले महीनों के लिए उसकी सैन्य संभावनाएं क्या हैं? अल जज़ीरा से बात करते हुए तीन रक्षा विशेषज्ञों ने भी इसी बात की तरफ इशारा किया है।

‘सच को तोड़ मरोड़ कर पुतिन ने किया पेश’

‘सच को तोड़ मरोड़ कर पुतिन ने किया पेश’

जॉर्जटाउन के सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में रिसर्च फेलो मार्गरीटा कोनाव का मानना है कि अपना चेहरा बचाने के लि अब पुतिन युद्ध की वास्तविकता से ध्यान भटकाने की कोशिश करेंगे और झूठी बयानबाजी करेंगे। जिसमें देश के लोगों के बीच राष्ट्रवाद का आह्वान होगा और यह तर्क दी जाएगी, कि यह नाटो ने रूस को युद्ध लड़ने पर मजबूर किया है, जबकि यूक्रेन एक वास्तविक देश नहीं है। उन्होंने कहा कि, "वह जोर देकर कहेंगे कि अमेरिका और नाटो रूस को अपमानित करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अपनी शक्ति को सीमित करने के लिए दुनिया भर में निरंतर हिंसा और आर्थिक मंदी का जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं'। यानि, देश के लोगों से झूठ बोंलेगे, जबकि उनकी हाथों में दिखाने के लिए कुछ नहीं होगा।

'सैन्य रूप से जीतने का एक लंबा रास्ता'

'सैन्य रूप से जीतने का एक लंबा रास्ता'

ट्रेसी जर्मन, जो किंग्स कॉलेज लंदन की प्रोफेसर हैं, उन्होंने अलजजीरा से बात करते हुए कहा कि, एक सैन्य और एक राजनीतिक जीत के बीच एक बड़ा अंतर है। युद्ध के मैदान में कोई जीत सकता है लेकिन राजनीतिक रूप से नहीं, लेकिन पुतिन, सैन्य रूप से जीतने से जीतने में भी बहुत दूर हैं।" इस कारण से उनका मानना है कि, रूसियों ने युद्ध के सबसे खराब नरसंहार द्वारा समतल किए गए रणनीतिक बंदरगाह मारियुपोल को "मुक्त" करने के बारे में घरेलू स्तर पर बड़ी धूमधाम से काम किया है। आक्रमण करने के लिए पुतिन का तर्क यूक्रेनियन को "नरसंहार" सरकार से मुक्त करना और उन्हें मदर रूस में बहाल करना था। निश्चित रूप से, इस रणनीतिक बंदरगाह को नियंत्रित करने से यूक्रेन के औद्योगिक और कृषि निर्यात में कमी आएगी, और रूस को अलगाववादी क्षेत्रों और क्रीमिया के बीच एक भूमि पुल बनाने में मदद मिलेगी। जिसको लेकर पुतिन जीत का दावा कर सकते हैं। लेकिन, हकीकत ये है, कि ये जीत रूस के लिए कोई मायने नहीं रखता है और हर बीतते दिन के साथ रूस की हार और भी ज्यादा होती जाएगी।

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