IMF नहीं दे रहा लोन, चीन, सऊदी, UAE का भी इनकार, क्या डिफॉल्ट होकर बच सकता है पाकिस्तान?
श्रीलंका मे पिछले साल अप्रैल में खुद को डिफॉल्ट घोषित कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक हालात श्रीलंका से मुकाबले काफी अलग है। पाकिस्तान की राजनीति ही देश की स्थिति को सुधारना नहीं चाहती है।

Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान सरकार लगातार देशवासियों को आश्वासन देती रहती है, लेकिन अभी तक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान सरकार को 1.2 अरब डॉलर की किश्त जारी नहीं की है, जबकि इसी आईएमएफ ने श्रीलंका और यूक्रेन के लिए लोन प्रोग्राम शुरू कर दिया है। आईएमएफ ने श्रीलंका के लिए बेलाऑउट पैकेज जारी कर दिया है और 330 मिलियन डॉलर की पहली किश्त श्रीलंका को बहुत जल्द मिल जाएगी। आईएमएफ के साथ बेलऑउट पैकेज जारी होने के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा है, कि अब श्रीलंका डिफॉल्ट लिस्ट से बाहर निकल रहा है, जबकि पाकिस्तान अभी भी आईएमएफ लोन के लिए हाथ-पैर मार रहा है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के पास अब क्या ऑप्शन बचे हैं, क्योंकि दोस्त देशों ने भी अब मदद करने से तौबा कर ली है।

पाकिस्तान के पास क्या हैं ऑप्शन?
पाकिस्तान का कहना है, कि आईए्मएफ प्रोग्राम के लिए उसका न्यूक्लियर हथियार भंडार पर कोई खतरा नहीं है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्योंकि आईएमएफ की तरफ से पाकिस्तान के सामने जो शर्तें रखी जा रही हैं, उनमें से कुछ शर्तों को देखकर यही लगता है, कि पर्दे के पीछे कोई ना कोई और बात जरूर है। जैसे, आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है, कि उसे लोन लेने से पहले सऊदी अरब, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और कतर से लिखित आश्वासन लेना होगा और आईएमएफ को दिखाना होगा, कि ये देश पाकिस्तान की वित्तीय मदद करने के लिए तैयार हैं। जाहिर है, ये शर्त पाकिस्तान के डिफॉल्ट होने के डर का एक वसीयतनामा है और अब इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, कि अगर आईएमएफ लोन नहीं देता है, तो फिर पाकिस्तान के पास क्या विकल्प होंगे?

"क्या डिफ़ॉल्ट के बाद श्रीलंका बेहतर है?"
श्रीलंका ने पिछले साल खुद को डिफॉल्ट घोषित कर दिया था और उसके बाद श्रीलंका ने आईएमएफ की तमाम शर्तें मान लीं। हालांकि, श्रीलंका के पास भारत जैसा मददगार साथी था, जिसने आईएमएफ से लोन दिलाने में अहम जिम्मेदारी निभाई और श्रीलंका का आईएमएफ प्रजेंटेंशन भी भारत के द्वारा ही दी गई थी। हालांकि, क्या पाकिस्तान के लिए श्रीलंका की ही तरफ खुद को डिफॉल्ट घोषित कर देना एक विकल्प होगा? डॉन अखबार से बात करते हुए पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के पूर्व अध्यक्ष शब्बर जैदी का भी यही मानना है। डॉन से बात करते हुए शब्बर जैदी ने कहा, कि "श्रीलंका सभी आर्थिक संकेतकों पर बेहतर कर रहा है। उनके उत्पादन में सुधार हो रहा है, उनके खर्च में सुधार हो रहा है और अब डिमांड-सप्लाई चेन में भी सुधार दिखने लगा है"। हालांकि, शब्बर जैदी आगे कहते हैं, कि "उनकी (श्रीलंका) राजनीति में उतार चढ़ाव पाकिस्तान की तरह नहीं है और डिफॉल्ट ने उन्हें देश की समस्याओं का अहसास कराया और उन्होंने कड़े फैसले लिए, जिसका असर अब उन्हें दिख रहा है।"

श्रीलंका बनाम पाकिस्तान...कैसी है स्थिति?
शब्बर जैदी का ये बयान, कि पाकिस्तान को खुद को डिफॉल्ट घोषित कर देना चाहिए, भले ही उनके देश में ज्यादातर लोगों को रास नहीं आ रहा है, लेकिन श्रीलंका की स्थिति की पाकिस्तान से तुलना करने पर लगता है, कि शब्बर जैदी की सोच काफी हद तक सही है, बशर्ते पाकिस्तान का राजनीतिक वर्ग श्रीलंका की तरह ही रहे और आपस में मार-काट ना मचाए। हालांकि, श्रीलंकन करेंसी अभी भी डॉलर के मुकाबले काफी गिरा हुआ है और पाकिस्तान की तुलना में उसका हाल अभी भी खराब है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से श्रीलंका की करेंसी अब स्थिर होने लगी है। पिछले साल अप्रैल महीने में श्रीलंका डिफॉल्ट कर गया था, लेकिन अब श्रीलंका की करेंसी स्थिर होने की तरफ बढ़ चुकी है। अप्रैल 2022 में एक डॉलर के मुकाबले श्रीलंकन करेंसी की वैल्यू 325 पर पहुंच गया था, जो अब 342 पर है। दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये में 54 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, श्रीलंका की भी कोशिश अब अपनी करेंसी को बाजार संचालित बनाने पर विचार कर रहा है और इसी वजह से श्रीलंकन करेंसी की वैल्यू और गिरी है, जबकि पाकिस्तान ने आईएमएफ के दबाव में आकर अपनी करेंसी को बाजार संचालित किया था और फिलहाल डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी करेंसी का वैल्यू 280 के आसपास रहता है।

महंगाई के क्या हैं हालात?
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, श्रीलंका की मुद्रास्फीति की दर पिछले साल लगभग 70% पर पहुंचने के बाद पिछले महीने भी कम हुआ है और लगातार पांचवें महीने कम हुआ है। इस महीने श्रीलंका की मुद्रास्फीति दर 50.6 प्रतिशत हो चुकी है। हालांकि, पाकिस्तान में अभी तक मुद्रास्फीति इतनी ज्यादा ऊंची नहीं हुई है, लेकिन पाकिस्तान का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के 30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, संवेदनशील मूल्य सूचकांक द्वारा मापी गई इसकी अल्पकालिक मुद्रास्फीति 16 मार्च को खत्म हुए सप्ताह के लिए 45.64 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। एफबीआर के पूर्व अध्यक्ष शब्बर जैदी कहते हैं, कि "श्रीलंका के बारे में मेरा विश्लेषण वह नहीं है, जो औसत पाकिस्तानी मानता है। श्रीलंका बहुत ही बुरे दौर से गुजरा है। हां, यह देश के लिए डिफ़ॉल्ट करने के लिए भयानक है, लेकिन मेरा सवाल यह है, कि दोनों देशों में तकनीकी अंतर क्या है? वे तेल का आयात नहीं कर सकते थे या क्रेडिट के खुले पत्र नहीं दे सकते थे और अब पाकिस्तान भी उसी दौर से गुजर रहा है।"

क्या श्रीलंका में खत्म हो चुके हैं बुरे हालात?
हालांकि, श्रीलंका में अब प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है, कि इसका मतलब ये नहीं है, कि श्रीलंका में अब सब ठीक है। देश में भले ही ईंधन खरीदने के लिए लंबी लाइनें नहीं लग रही हैं, लेकिन पांच में से दो परिवारों को अपनी कुल इनकम का 75 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खाने के सामान खरीदने पर खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, चैरिटी सेव द चिल्ड्रेन का अनुमान है, कि श्रीलंका के आधे परिवार अपने बच्चों के भोजन का सेवन कम कर रहे हैं। लेकिन, श्रीलंका इस स्थिति से निकलने के लिए सख्ततम फैसले लेने से भी बाज नहीं आ रहे हैं और आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज लेने के लिए हाल ही में श्रीलंका ने पॉलिसी रेट में 100 प्रतिशत का इजाफा किया है और श्रीलंका की जनता ने इसे कबूल भी किया है, क्योंकि उन्हें हालात सुधरते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि, जबकि श्रीलंका में चीजें स्थिर हो गई हैं, और वो पिछले साल के मुकाबले, काफी बेहतर स्थिति में पहुंच रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के संकेतकों के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है।

पाकिस्तान के आर्थिक हालात कैसे हैं?
मूडीज ने हाल ही में पाकिस्तान की रेटिंग को घटाकर सीएए3 कर दिया है। और मूडीज के रेटिंग के मुताबिक, सीए का मतलब डिफॉल्ट होने के काफी करीब होता है और सी रेटिंग का मतलब डिफॉल्ट हो जाना है। अब श्रीलंका सीए से एक कदम नीचे है। शब्बीर जैदी कहते हैं, कि "मैं यह नहीं कह रहा हूं, कि पाकिस्तान को डिफॉल्ट करना चाहिए, क्योंकि दिवालियेपन का भय एक अज्ञात का डर है"। उन्होंने कहा कि, "श्रीलंका जब गृहयुद्ध में फंसा था, उस वक्त हजारों लोग मारे गये थे, लेकिन श्रीलंका जब डिफॉल्ट हो गया, तो एक भी मौत नहीं हुई। डिफॉल्ट होना सिर्फ एक डर की तरह है।" शब्बीर जैदी ने कहा, कि "हमारे पास सॉवरेन डेट डिफॉल्ट नहीं है और ये तब होता है, जब सरकार अपने कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ होती है और तकनीकी रूप से हम (पाकिस्तान) डिफॉल्ट की स्थिति में हैं।" शब्बीर जैदी के मुताबिक, अर्जेंटीना जैसे कई देश भी डिफॉल्ट कर चुके थे, लेकिन अब वो तेजी से सुधार कर रहे हैं और उन देशों में अब विदेशी निवेश भी आने लगा है, जिससे उनकी करेंसी में भी सुधार हो रहा है।
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क्या पाकिस्तान को कर जाना चाहिए डिफॉल्ट?
हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि यदि कल पाकिस्तान खुद को डिफ़ॉल्ट घोषित कर देता है, तो जो कुछ भी देश में हो रहा है, जैसे उच्च मुद्रास्फीति दर, ईंधन की उच्च कीमत, अस्थिर एक्सचेंज रेट, और भोजन की कमी ...और भी बदतर हो जाएगी। श्रीलंका के उदाहरणों से प्रतीत होता है कि, उस स्थिति में, देश भूख और उदासीनता की स्थिति में डूब जाएगा, उधार के धन के आधार पर बेहतर कल की प्रतीक्षा करेगा। वहीं, पाकिस्तान के सामने कई तरह की और समस्याएं हैं, जैसे आतंकवाद। आतंकवाद की वजह से पाकिस्तान में विदेशी निवेश ना के बराबर है और श्रीलंका की 2 करोड़ की तुलना में पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ से ज्यादा है, लिहाजा पाकिस्तान के लिए स्थितियां काफी बुरी हो सकती हैं।












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