Charles Lieber: चीन से संबंध रखने के वाले हार्वर्ड के प्रोफेसर को सुनाई जाएगी सजा, बोले- कैंसर है, माफ कर दो
चार्ल्स लीबर लीबर ने चीन से अपने रिश्ते को अमेरिका से छिपाए रखा। वो ये साबित नहीं कर पाए की वुहान में उनका बैंक अकाउंट नहीं था। उन्हें 26 साल जेल की सजा सुनाई जा सकती है। इसके अलावा उन्हें जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

अमेरिका में डेढ़ साल पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केमिस्ट्री भूतपूर्व प्रोफेसर चार्ल्स लीबर को चीन संग रिश्ते रखने का दोषी पाया गया था। उन्होंने अमेरिकी अनुसंधान के भीतर चीन संचालित भर्ती कार्यक्रम से जुड़े होने की बात छिपाई थी। इसी मामले में उन्हें 26 अप्रैल को सजा सुनाई जा सकती है।
इस बीच चार्ल्स लीबर ने मैसाचुसेट्स में एक संघीय न्यायाधीश में एक याचिका दायर की है। इसमें 64 वर्षीय प्रोफेसर ने कहा है कि उन्हें कैंसर है जिसका कोई इलाज नहीं है। चीन से संबंध रखने के चलते पहले ही उनकी छवि बेहद खराब हो चुकी है। अब उन्हें माफ कर दिया जाए।
प्रोफेसर ने कहा कि सरकार से जानकारी छुपाने का उन्हें भारी पछतावा है। उन्होंने अपील की है कि अब उनकी जितनी भी जिंदगी बची है, चैन से जीने दिया जाए। बचाव पक्ष के वकील मार्क मुकासे ने कहा कि प्रोफेसर का चीन दौरा जो कि कुछ हफ्ते से अधिक का नहीं था, लीबर की जिंदगी तबाह कर कर गया।
चार्ल्स लीबर के वकील ने जजों को चार संभावित सजा में से एक तरीके से सजा देने का सुझाव दिया है। इसमें 6 महीने के लिए हाउस अरेस्ट या एक साल तक पुलिस की निगरानी में रहना शामिल है। चार्ल्स लीबर को दिसंबर 2021 में अधिकारियों को गलत बयान देने, गलत आयकर रिटर्न दाखिल करने और एक चीनी बैंक खाते की रिपोर्ट करने में विफल रहने का दोषी पाया गया था।
अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि चार्ल्स लीबर को वुहान विश्वविद्यालय के 2015-18 सीजन के एक प्रतिभा भर्ती प्रोग्राम में "सट्रैटेजिक साइंटिस्ट" के रूप में नियुक्त किया गया था। यह कार्यक्रम चीन की साइंटिफिक डेवलेपमेंट को बढ़ाने के लिए था।
इस दौरान, लीबर को हर महीने 50,000 अमेरिकी डॉलर और रहने के खर्च में लगभग 150,000 अमेरिकी डॉलर मिलते थे। इसके लिए लीबर का चीन में एक बैंक अकाउंट भी खुलाया गया था जहां उनका पैसा जमा होता था। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक प्रोफेसर ने इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को नहीं दी।
जनवरी 2020 में अमेरिकी न्याय विभाग के चाइना इनिशिएटिव प्रोग्राम के तहत लीबर पर आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रोफेसर की गिरफ्तारी हुई। अपनी गिरफ्तारी के बाद एफबीआई एजेंटों के साथ पूछताछ के दौरान लीबर ने स्वीकार किया कि उन्होंने मूर्खतापूर्ण काम किया।
गौरतलब है कि चीन से रिश्ते रखने की जांच होने के शुरुआत डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 में शुरू की थी। इसे चाइना इनिशिएटिव नाम दिया गया था। इसका उद्देश्य अमेरिकी अनुसंधान और उद्योगों में जीनी जासूसी रोकना और जासूसों को सजा देना था। चाइना इनिशिएटिव के तहत सरकार ने लगभग 2 दर्जन से भी अधिक रिसर्च स्कॉलरों को गिरफ्तार किया।
हालांकि बीते साल बाइडेन प्रशासन ने चाइना इनिशिएटिव प्रोग्राम को बंद कर दिया था। इस प्रोग्राम की डेमोक्रेट्स और अन्य नागरिक अधिकार समूहों द्वारा भारी आलोचना की गई थी। विरोधियों का तर्क था कि ये सरकार को न द्वारा बौद्धिक संपदा की चोरी की खोज में एशियाई अमेरिकियों को गलत तरीके से टार्गेट करने की अनुमति देता है।
वहीं चाइना इनिशिएटिव के समर्थकों का कहना था कि ये अभियान विज्ञान में अमेरिका की श्रेष्ठता को बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही ये अमेरिकी बौद्धिक संपदा और अमेरिकी रहस्यों को चुराने के चीन के प्रयासों को रोकता है।
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