चीन के सामने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट भी लाचार, कहा- उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार की नहीं कर सकते जांच
हेग। चीन में अत्याचार के शिकार के शिकार उइगर मुसलमानों (Uighur Muslims) को दुनिया ने उनके हाल पर छोड़ दिया है। इसकी वजह है कि चीन के सामने अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी बहुत ज्यादा महत्व नहीं रखतीं। ताजा मामला नीदरलैण्ड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय यानि इंटरनेशन क्रिमिनल कोर्ट की एक सुनवाई का है। उइगर मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार को लेकर हो रही एक सुनवाई में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के प्रॉसीक्यूटर (सरकारी वकील) ने कहा कि ये अदालत चीन पर लग रहे मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच नहीं कर सकती।

उइगर मुस्लिमों ने दायर किया था मामला
चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों पर हो रहा अत्याचार अब किसी से छिपा नहीं है। चीन ने शिनजियांग के लाखों मुसलमानों को खास तरह के शिविर बनाकर उसमें रखा गया है। बताया जाता है कि इसमें 10 लाख मुसलमान वर्तमान रह रहे हैं। वहीं हाल ही में आई खुफिया जानकारी में सामने आया था कि करीब 80 लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों को उनका सांस्कृतिक विकास करने के नाम पर डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। ये डिटेंशन सेंटर अब यातना शिविर में तब्दील हो चुके हैं। इन यातना शिविरों की सच्चाई चीन से किसी तरह भागकर दूसरे देशों में पहुंचे उइगर मुस्लिम खुद बयां करते रहे हैं।

आईसीसी ने कार्रवाई न करने की बताई वजह
चीन के मुस्लिमों पर अत्याचार को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता आवाज उठाते रहे हैं और जांच की मांग करते रहे हैं लेकिन चीन ने आरोपों से इनकार करते हुए लगातार जांच की मांग को खारिज करता रहा है। इसे लेकर ही चीन से भागकर दूसरे देशों में निर्वासित जीवन जी रहे ने न्याय की उम्मीद में उइगर मुस्लिमों ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उइगर मुसलमानों ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में जुलाई में चीन के खिलाफ सबूतों का लंबा डोजियर सौंपा था। इसमें बताया गया था कि कैसे 10 लाख उइगर मुसलमानों को इन शिविरों में रखा गया है। डोजियर में बताया गया है कि कैंप में उइगर महिलाओं की जबरन नसबंदी की जा रही है।
वहीं उइगर मुस्लिमों की इस याचिका पर प्रॉसीक्यूटर फॉटो बेनसाउदा के ऑफिस से कहा गया है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट इस मामले में कार्रवाई नहीं कर सकती है क्योंकि ये अपराध चीन के अंदर हुआ है और चीन हेग स्थिति इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का सदस्य नहीं है।

दो अन्य देशों पर भी कार्रवाई से इनकार
प्रॉसीक्यूटर ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि 'कथित अपराधों का जो मामला अदालत के सामने लाया गया है उसमें आरोपी अदालत के क्षेत्रीय अधिकार के अंतर्गत नहीं आता है।' वहीं इंटरनेशल कोर्ट की रिपोर्ट में आगे कहा गया है इसके साथ ही ताजिकिस्तान और कंबोडिया से उइगर मुस्लिमों के जबरन चीन निर्वासन के अलग-अलग दावों पर बढ़ने का इस समय कोई आधार नहीं है।
उइगर मुसलमानों का कहना था कि हालांकि ये निर्वासन चीन की धरती पर नहीं हुए हैं फिर भी इंटरनेशनल कोर्ट इस पर कार्रवाई कर सकती है क्योंकि ये ताजिकिस्तान और कंबोडिया के क्षेत्र में हुए हैं और ये दोनों इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं। उइगरों के वकील ने नए सबूतों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आईसीसी के एक बार फिर मामले पर विचार करने को कहा है।

आरोपों पर चीन का ये है कहना
वहीं चीन अपन ऊपर लग रहे मानव अपराधों के खिलाफ हमेशा इनकार करता रहा है। चीन का कहना है कि उत्तर पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में बनाए गए ये कैंप नौकरी के लिए प्रशिक्षण केंद्र हैं जिनका उद्येश्य लोगों को कट्टर विचारों से दूर रखना है। शिनजियांग से मिल रही रिपोर्टों और गवाहों के बयानों के आधार पर 10 लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को जबरन इन शिविरों में रखा गया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और इन शिविरों में रह चुके लोग इसे यातना शिविर (concentration camps) कहते रहे हैं।
बता दें कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसमें दुनिया भर के कई देश शामिल हैं। इनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं। इसका गठन 2002 में किया गया था। इस संस्था के पास दायर शिकायतों को लेकर कोई स्वतंत्र व्यवस्था नहीं है जो ये तय कर सके कि कोर्ट में न्यायाधीशों के सामने क्या प्रस्तुत किया जाएगा।












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