चीन की वजह से वांटेड आतंकवादी नहीं बन पाया है हाफिज सईद का बेटा, चुनाव लड़ रहे तल्हा सईद पर जानिए 5 फैक्ट्स
Hafiz Talha Saeed News: पाकिस्तान में 8 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के लिए मैदान सज चुका है और नामांकन प्रक्रिया भी खत्म हो चुकी है। वहीं, 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बेटा भी इस बार चुनाव लड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाफिज सईद ने एक राजनीतिक पार्टी का समर्थन किया है, जिसने पूरे पाकिस्तान में अपने उम्मीदवार उतारे हैं और इसके उम्मीदवारों में हाफिज सईद के बेटे और लश्कर-ए-तैयबा नेता हाफिज तल्हा सईद भी शामिल हैं।

आईये पांच फैक्ट्स में जानते हैं, कि कौन है हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद और वो क्या करता है?
1- हाफिज तल्हा सईद को लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) में अपने पिता के बाद नंबर 2 माना जाता है। पिछले साल भारतीय गृह मंत्रालय ने उसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत नामित आतंकवादी घोषित किया था। अधिसूचना में कहा गया है, कि तल्हा सईद भारत में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा भर्ती, धन संग्रह, योजना बनाने और हमलों को अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।
2- भारत, तल्हा सईद को संयुक्त राष्ट्र में भी सूचीबद्ध आतंकवादी के रूप में हाफिज सईद के बेटे को नामित कराने की भी कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने इस विषय पर भारत का समर्थन किया है, लेकिन हाफिज तल्हा को संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादी घोषित कराने की नई दिल्ली की बार-बार की कोशिशों को चीन ने रोक दिया है। चीन की वीटो की वजह से तल्हा सईद आतंकवादी घोषित नहीं हो पा रहा है।
3- हाफिज तल्हा सईद 2019 में तब सुर्खियों में आया था, जब उसकी हत्या की एक नाकाम कोशिश की गई थी, जिसमें एक लश्कर-ए-तैयबा के एक समर्थक की मौत हो गई थी और सात अन्य घायल हो गए थे। हाफ़िज़ तलहा को लाहौर में एक रेफ्रिजरेटर स्टोर में एक धार्मिक सभा में बोलना था, जब एक बम विस्फोट हुआ था। वो जख्मी तो हुआ था, लेकिन उसकी जान बच गई थी।
4- तल्हा सईद ने लाहौर के NA-122 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। इस सीट से चुनाव लड़ने वाला बड़ा नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और महान क्रिकेटर इमरान खान हैं, जो अब जेल में हैं।
5- हाफ़िज़ सईद, जो अब जेल में है। हालांकि, आतंकवादी जीवन के बीच उसने राजनीतिक करियर शुरू करने की भी काफी कोशिशें पहले की, लेकिन उसे ज़्यादा सफलता नहीं मिली है। उसने 2018 के चुनावों में अपनी अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक पार्टी से 265 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसके सभी उम्मीदवार चुनाव हार गये थे। इस बार वह पाकिस्तानी मरकज़ी मुस्लिम लीग नाम की एक नई पार्टी के साथ चुनाव में उतरा है और इस बार फिर से उसके उम्मीदवार सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।












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