पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने पुरस्कार लेने से किया इनकार, बताई वजह
स्टॉकहोम। स्वीडन की रहने वाली पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने मंगलवार को पर्यावरण पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण आंदोलन को जरूर है कि सत्ता में बैठे लोग विज्ञान को सुनें ना कि पुरस्कार को। ग्रेटा को नॉर्डिक काउंसिल द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सेरेमनी में सम्मानित किया गया है।

बता दें पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रेटा ने 'फ्राइडेज फॉर फ्यूचर' आंदोलन की शुरुआत की थी, जिसके तहत लाखों लोगों ने रैलियां निकाली थीं। उन्हें स्वीडन और नार्वे दोनों ने उनके प्रयासों के चलते पुरस्कार के लिए नामित किया था। जिसके बाद उन्होंने संगठन का पर्यावरण पुरस्कार जीता। ये संस्था हर साल इस पुरस्कार को देती है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब इस पुरस्कार की घोषणा हुई तो ग्रेटा के प्रवक्ता ने कहा कि वो इस पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेंगी। जिसमें उन्हें 52 हजार डॉलर भी दिए जा रहे हैं। उन्होंने अपने इस फैसले के बारे में इंस्टाग्राम पर बताया है। उन्होंने लिखा है, 'पर्यावरण आंदोलन को और अधिक पुरस्कारों की आवश्यकता नहीं है। हमें केवल इतना चाहिए कि हमारे राजनेता और वो लोग जो सत्ता में बैठे हैं, वो विज्ञान को सुनना शुरू कर दें।'
नॉर्डिक काउंसिल के पुरस्कार दिए जाने के लिए ग्रेटा ने धन्यवाद कहा। साथ ही उन्होंने नॉर्डिक देशों की पर्यावरण के प्रति कोई कदम नहीं उठाने को लेकर आलोचना की है। ग्रेटा ने कहा, 'डींगे मारने की या सुंदर शब्दों की जरूरत नहीं है, जब बात वास्तविक उत्सर्जन पर आती है, तो वह पूरी कहानी होती है।'
16 साल की ग्रेटा उस वक्त दुनिया की नजरों में आई थीं, जब उन्होंने अगस्त, 2018 में स्वीडन की संसद के बाहर हर शुक्रवार को आंदोलन करना शुरू किया। वो अपने साथ एक साइनबोर्ड लेकर बैठती थीं, जिसपर 'पर्यावरण के लिए स्कूल की हड़ताल' लिखा होता था।












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