Explained: जर्मनी ने भारतीयों का वीजा 20 हजार से बढ़ाकर किया 90 हजार, नौकरी का बड़ा दरवाजा खुला
India-Germany News: शुक्रवार को जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की, कि जर्मनी ने कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वार्षिक वीजा कोटा 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने का फैसला किया है।
इस चार गुना वृद्धि से दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यावसायिक संबंध तो बेहतर होंगे ही, साथ ही यह कदम जर्मनी में बढ़ती उम्र की आबादी के कारण होने वाली श्रम की कमी की भरपाई के लिए भी उठाया गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में जर्मनी की लगभग 27% आबादी 60 वर्ष या उससे ज्यादा की उम्र की हो चुकी है, जो 2030 तक 35% तक पहुंचने की उम्मीद है। बढ़ा हुआ कोटा नर्स और बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों की देखभाल, ट्रक ड्राइवरों और इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्रों में मध्यम स्तर की नौकरियों जैसे क्षेत्रों में काम आएगा।
जर्मनी ने भारतीयों के लिए खोला नौकरी का दरवाजा
वहीं, इस घोषणा के बाद नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए, जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बैरबॉक ने कहा, "भारतीय समाज में, बहुत से युवा कुशल लोग श्रम बाजार को आगे बढ़ा रहे हैं। जर्मनी में, हमें श्रमिकों की आवश्यकता है। यह भारत और जर्मनी के लोगों के लिए जीत की स्थिति हो सकती है।"
जर्मन अकादमिक एक्सचेंज सर्विस (DAAD) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 के शीतकालीन सेमेस्टर के दौरान भारत से 49,483 अंतर्राष्ट्रीय छात्र जर्मनी में अध्ययन कर रहे थे। यह पिछले वर्ष की तुलना में 15% की वृद्धि दर्शाता है, जिससे भारतीय चीन को पीछे छोड़ते हुए देश में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा समूह बन गए हैं।
वहीं, भारत और जर्मनी द्वारा 2022 में हस्ताक्षरित प्रवासन और गतिशीलता समझौते के बारे में बात करते हुए, बैरबॉक ने कहा, कि उन्होंने जर्मनी आने वाले छात्रों और पेशेवरों की संख्या में 25% की वृद्धि दर्ज की है, और संभावना और भी ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों की है।
भारतीयों के लिए जर्मन भाषा सीखना जरूरी
जर्मन श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्री ह्यूबर्टस हील ने कहा, कि उनके देश ने हाल ही में देश में आप्रवासन के लिए कानूनी आवश्यकताओं का एक नया ढांचा स्थापित किया है, जिसमें वीजा डिजिटलीकरण कार्यक्रम और नौकरी चाहने वालों और व्यवसायों को जोड़ना शामिल है। जबकि वीजा वेटिंग टाइम भी कम कर दिया गया है, जो लोग लंबे समय तक जर्मनी में रहना और काम करना चाहते हैं, उन्हें आप्रवासन और अन्य लाभों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा, कि जर्मनी में अध्ययन या काम करने में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए जर्मन भाषा में दक्षता होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, कि जर्मन अधिकारी जानते हैं, कि भारतीय अमेरिका और ब्रिटेन जैसे अंग्रेजी बोलने वाले देशों को पसंद कर सकते हैं। लेकिन भारतीयों के लिए जर्मन सीखना जरूरी है, ताकि वे कई तरह की नौकरियों में काम कर सकें।
उन्होंने कहा, "हमारे आर्थिक हित में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हमारे देश में अधिक से अधिक लोग जर्मन भाषा सीखें।"
हील ने भारत को एक "आदर्श भागीदार" बताया, क्योंकि यह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जिसके पास बहुत अधिक कार्यबल है।
उन्होंने कहा, कि जर्मनी में कुशल श्रमिकों को आकर्षित करने में "अच्छी प्रगति" हुई है, खासकर "उन क्षेत्रों में जहां हमें उनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है और वो चिकित्सा, नर्सिंग देखभाल और आईटी से जुड़े क्षेत्र हैं"।
वहीं, जर्मनी के चांसलर स्कोल्ज़ ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, "हमारा उद्देश्य आपके देश से जर्मनी के लिए और भी अधिक कुशल श्रमिकों को उत्साहित करना है।" उन्होंने जर्मन बिजनेस 2024 के 18वें एशिया-पैसिफिक सम्मेलन के दौरान कहा, "पिछले एक साल में ही जर्मनी में काम करने वाले भारतीयों की संख्या में 23,000 का इजाफा हुआ है।" उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला, कि वर्तमान में जर्मन विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े समूह का प्रतिनिधित्व भारतीय छात्र कर रहे हैं, जो जर्मन श्रम बाजार के लिए उनके महत्व पर जोर देता है।
उन्होंने डिजिटलीकरण और तेज वीजा एप्लीकेशन प्रोसेस के माध्यम से वीज़ा आवेदन प्रक्रिया में सुधार करने की योजना की भी घोषणा की, ताकि अनुभव को और जर्मनी में काम करने के माहौल को भारतीयों के लिए और ज्यादा अनुकूल बनाया सके। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जर्मनी का लक्ष्य ऐसे लोगों का प्रवासन कम करना है, जिन्हें जर्मनी की सरकार कुशल कार्यबल का हिस्सा नहीं मानती है।
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