जर्मनी में अब वैध होगा गांजा, घरों में पौधे उगा सकेंगे लोग, बिल को कैबिनेट की मंजूरी, सरकार ने बताया ये कारण
जर्मनी में कैबिनेट ने बुधवार को मारिजुआना यानि कि गांजा के उपयोग और खेती को वैध बनाने के लिए एक विवादास्पद विधेयक पारित किया।
इस बिल का उद्देश्य गांजा की कालाबाजारी पर लगाम लगाना है ताकि हानिकारक चीजों का इस्तेमाल रोका जा सके और इसके ग्राहकों की संख्या में भी कमी लाई जा सके।
इस कानून के पारित हो जाने के बाद व्यस्क निश्चित जगह से 25 ग्राम या प्रतिमाह 50 ग्राम तक गांजा ले सकते हैं। इतना ही नहीं, नए कानून के मुताबिक लोग घरों में अधिकतम तीन पौधे भी उगा पाएंगे।

जर्मनी में चांसलर ओलाफ शॉल्त्स की सेंटर-लेफ्ट सरकार को उम्मीद है कि इस नए कानून से गांजे की कालाबाजारी पर अंकुश लग पाएगा और उपभोक्ता दूषित मारिजुआना से बच पाएंगे। इतना ही नहीं, यह न्याय प्रणाली के लिए काम का बोझ भी कम करेगा।
हालांकि सरकार के इस कानून को लेकर देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टियों ने चेतावनी दी है कि यह मारिजुआना के उपयोग को बढ़ावा देगा।
न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि सरकार की इस योजना से न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम होने के बजाय बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने अंदेशा जताया कि सरकार द्वारा गांजा वैध करने से ये काफी लोगों तक पहुंच जाएगा। लोगों के इसके आदी होने से इसकी खपत तेज होगी जिससे काला बाजार में गांजे की मांग और बढ़ सकती है।
संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य निगरानी संस्था ने मार्च में कुछ ऐसी ही बयान दिया था कि गांजा के उपयोग को वैध बनाने के लिए सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों से इसकी खपत और कैनबिस से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ गई हैं।
यदि विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो जर्मनी यूरोप में सबसे उदार कैनबिस कानूनों वाले देशों में से एक बन जाएगा। नीदरलैंड लंबे वक्त से गांजा पीने के इच्छुक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। इससे पहले यूरोपीय देश डेनमार्क ने भी गांजे को वैध बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन संसद ने इसे खारिज कर दिया।












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