निज्जर की हत्या को लेकर G20 में हंगामा करना चाहते थे पीएम ट्रूडो, US-UK समेत किसी सहयोगी ने नहीं दिया साथ
कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो भारत पर दबाव बनाने में असफल हो गए हैं। कनाडा और भारत के बीच जारी विवाद में किसी भी सहयोगी देश ने कनाडा का साथ नहीं दिया। जस्टिन ट्रूडो द फाइव आइज (FVEY) के एक भी देश के शीर्ष नेताओं को मनाने में नाकामयाब साबित हुए हैं।
ये दावा अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने किया है। आपको बता दें कि द फाइव आइज (FVEY) एक खुफिया जानकारियां साझा करने का एक गठबंधन है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को हुई जी-20 समिट से पहले खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या का मामला को उठाना चाहते थे।
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो चाहते थे कि फाइव आईज गठबंधन के सदस्य संयुक्त रूप से जांच निष्कर्षों की घोषणा करें जो कथित तौर पर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की मौत में 'भारत सरकार के एजेंटों' की कथित भूमिका की ओर इशारा करते हैं।
इसके लिए उन्होंन अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों से पिछले दरवाजे से बातचीत भी की थी। लेकिन, कोई भी ट्रूडो का साथ देना तो दूर इस मुद्दे पर भारत की निंदा तक नहीं करना चाहता था।
ट्रूडो ने इसके लिए अमेरिकी अधिकारियों को खूब मनाने की कोशिश की थी। ट्रूडो चाहते थे कि अमेरिका निज्जर के हत्या को सार्वजनिक रूप से गलत ठहराए। वाशिंगटन पोस्ट ने एक अमेरिकी अधिकारी का बिना नाम लिए बताया कि उनकी सरकार ने पीएम ट्रूडो की इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया।
अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अभी भी कीमत पर भारत की नारजगी मोल नहीं ले सकता। एशिया में चीन के सामने कोई ठहर सकता है तो वह सिर्फ भारत है। ऐसे में चीन को रणनीतिक तौर पर रोकने के लिए अमेरिका को भारत की बेहत जरूरत है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में आगे लिखा है कि ट्रूडो ने अमेरिका से मिले इनकार के बाद ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भी बातचीत की। हालांकि, दोनों ने ही भारत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया।
निज्जर की हत्या की आलोचना के लिए पीएम ट्रूडो ने FVEY देशों को मनाने की भरपूर कोशिश की मगर सभी सदस्यों ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब भारत जी-20 जैसे प्रमुख इवेंट का आयोजन कर रहा है। इस मौके पर वे ऐसा कदम उठाने में सहज नहीं हैं।












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