सऊदी अरब की यमन पर बमबारी, अमेरिका के खड़े हुए कान और बढ़ी चिंता

वाशिंगटन। सऊदी अरब और गठबंधन सेनाओं की तरफ से यमन में की गई बमबारी से अमेरिका चिंता में आ गया है। क्‍योंकि अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ हाल ही में 8000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की हथियारों की डील की है।

saudi arab bomed on yemen

इस डील से पहले भी अमेरिका के ऊपर सवाल उठ रहे थे। पिछले शनिवार को सऊदी अरब और गठबंधन सेनाओं की तरफ से की गई यमन के साना में बमबारी से 100 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई थी।

अमेरिका की सऊदी अरब के साथ इस डील को लेकर कई अमेरिकी सांसदों ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यह डील एक तरह से सऊदी अरब और गठबंधन सेनाओं के युद्ध अपराध को समर्थन देने जैसा है। पिछले कई सालों से सऊदी अरब और यमन के बीच युद्ध जारी है। इसमें यमन के हजारों निर्दोष नागरिकों की जान जा चुकी है।

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक अमेरिकी सरकार के कई अधिकारियों को इस बात पर शक था कि सऊदी अरब की सेना और गठबंधन सेनाएं सिर्फ हाउॅथी आतंकियों को ही अपना निशाना बनाएंगी और इसमें निर्दोष नागरिक नहीं मारे जाएंगे।

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साथ ही अमेरिकी सरकार के अधिवक्‍ता भी इस बात पर एकमत नहीं थे कि अमेरिका को सऊदी अरब की इस कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए या नहीं। अगर अमेरिका ऐसा करता है तो अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के तहत वो एक युद्ध को समर्थन देने की स्थिति में अमेरिका आ सकता है। साथ ही अमेरिका के सरकारी अधिवक्‍ता के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी सेना से कानूनी तौर पर पूछताछ का सामना करना पड सकता है।

रॉयटर्स के पास मौजूद ईमेल में जिस बात का हवाला दिया गया है उससे इस बात की पुष्टि होती दिख रही है कि लीबिया के पूर्व राष्‍ट्रपति चॉर्ल्‍स टेलर ऐसे ही युद्ध अपराध के ट्रॉयल का सामना कर रहे हैं। रॉयटर्स को ये दस्‍तावेज फ्रीडम ऑफ इंफॉरमेशन एक्‍ट के तहत प्राप्‍त किए हैं।

अमेरिकी सीनेट ने अमेरिकी सरकार के उस प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी थी जिसके तहत सऊदी अरब को 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा के टैंक और अन्य सैन्य उपकरण बेचे जाने थे। अमेरिकी सीनेट में इस प्रस्ताव के पक्ष में 71 वोट पड़े और इस प्रस्ताव को रोकने के लिए 27 वोट पड़े थे। सऊदी अरब वर्ष 2015 से अभी तक अमेरिका से 22 अरब डॉलर से ज्‍यादा के हथियार खरीद चुका है।

अमेरिकी सरकार के इस प्रस्ताव पर रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल और डेमोक्रेटिक पॉर्टी के सीनेटर क्रिस मर्फी ने रोक लगाने की मांग की। उन्होंने हवाला दिया कि पिछले 18 महीनों से यमन युद्ध झेल रहा है। अमेरिका अगर अरब को हथियारों को बिक्री करेगा तो इस क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ने लगेगी।

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इससे पहले पेंटागन ने 9 अगस्त को सऊदी अरब को 130 अब्रामस बैटल टैंक्‍स और 20 ऑर्मोड रिकवरी व्‍हीकल और अन्‍य सैन्‍य उपकरण बेचने की घोषण की थी। डिफेंस सिक्‍योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी ने बताया कि जनरल डायनमिक्‍स कॉर्प इन हथियारों को सऊदी अरब को बेचेगाा पॉल, मर्फी के अलावा अन्य विरोधियों ने इस डील के साथ-साथ सऊदी अरब सरकार की आलोचना की। उन्‍होंने सऊदी अरब की तरफ से यमन के खिलाफ युद्ध को लेकर आलोचना की थी। साथ ही कहा कि सऊदी अरब का रिकॉर्ड इस्‍लााम की कट्टटरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला बताया था।

सीनेटर मर्फी ने कहा कि अगर आप कट्टरवाद को पूरी दुनिया में फैलने से रोकना चाहते थे तो आपको सऊदी अरब में जिस तरह से इस्‍लाम की ब्रांडिग की जा रही है उसको भी रोकना होगाा यह भी कट्टरवाद का एक हिस्‍सा है।

आपको बताते चलें कि सऊदी अरब और यमन के बीच छिड़े युद्ध में अ​ब तक 10,000 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं। साथ ही 30 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

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