France riots explained: कौन था 17 साल का मुस्लिम लड़का नाहेल, जिसकी हत्या पर जल रहा है फ्रांस?
France riots explained: फ्रांस में मंगलवार को 17 साल के लड़के नाहेल की उस वक्त मौत हो गई थी, जब उसपर ट्रैफिक पुलिस ने गोली चला दी थी। नाहेल पर एक गोली चलाई गई, जो उसे हाथ से पार होती हुई, उसके सीने में जा लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
नाहेल की मौत के बाद पहले तो उसके जनाजे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया गया, लेकिन कुछ ही देर में इस प्रदर्शन ने उग्र रूप लेना शुरू कर दिया और एक दिन बीतते-बीतते फ्रांस जलने लगा। ताजा हालात ये हैं, कि पूरे फ्रांस को जलाया जा रहा है। हजारों गाड़ियां जला दी गई हैं और शॉपिंग मॉल्स में लूटपाट की जा रही। फ्रांस में 17 वर्षीय मुस्लिम लड़के की मौत अब मजहबी रंग ले चुका है और देश के मुसलामान, फ्रांस को फूंकने के लिए उतारू हैं।

फ्रांस की सरकार ने हिंसा रोकने के लिए 50 हजार से ज्यादा पुलिस जवानों को उतार दिया है, लेकिन हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस जवानों पर पत्थरबाजी की जा रही है, दुकानों को लूटा जा रहा है और फ्रांस में अब आपातकाल लगाने की चर्चा शुरू हो गई है। दंगे को रोकने में अभी तक नाकाम रहने वाले राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पैरेट्स के लिए चेतावनी जारी करते हुए, बच्चों को घरों में ही रखने की अपील की है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने दंगा भड़कने के लिए सोशल मीडिया को भी जिम्मेदार ठहराया है।
नाहेल कौन था?
17 साल का लड़का नाहेल अपनी मां का इकलौता बच्चा था और अपने स्कूल में रग्बी का खिलाड़ी था। इसके अलावा, वो सामानों की डिलीवरी का भी काम करता था।
बीबीसी के अनुसार, इलेक्ट्रीशियन के रूप में करियर बनाने के लिए उसने सुरेसनेस के एक कॉलेज में एडमिशन लिया था और वो मैनटेरे शहर में अपनी मां मौनिया रहता था। अल्जीरियाई मूल के लड़के नाहेल के पिता मोरक्को मूल के थे।
बीबीसी के मुताबिक, उसके कॉलेज का एटेंडेंस अच्छा नहीं था। हालांकि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, लेकिन पुलिस को उसके बारे में पता था। वहीं, रेयर फाउंडेशन की रिसर्च जर्नलिस्ट ऐमी मेक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि नाहेल का इतिहास आपराधिक रहा है और करीब 15 क्रिमिनल मामलों में उसका नाम था। ऐमी मेक ने लिखा है, कि ड्रग्स तस्करी के एक मामले में भी पुलिस को उसपर गहरा शक था, इसलिए पुलिस उसको संदिग्ध मान रही थी और इसीलिए देश की पुलिस को उसके बारे में जानकारी थी।
कैसे शुरू हो गया विरोध प्रदर्शन?
नाहेल की दुखद मौत के बाद फ्रांस की पुलिस की तरफ से एक माफी नामा जारी की गई थी और ट्रैफिक पुलिस ने उससे पूछताछ को एक सामान्य सुरक्षा जांच बताया। वहीं, मौके से मिले सीसीटीवी फूटेज में दिखता है, कि पुलिस के रोकने के बाद नाहेल अपनी मर्सडीज बेंच कार को भगाने की कोशिश करता है।
सीसीटीवी से पता चलता है, कि नाहेल की कार बस लेन में खड़ी थी और बस लेन से हटाने के लिए ही ट्रैफिक पुलिस के जवान उसके पास आए थे। लेकिन उसकी मौत के बाद फ्रांस में दंगे शुरू हो गये। फ्रांस की ट्रैफिक पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि वो रेड लाइट तोड़कर भाग रहा था, और उस वक्त ही उसे रोका गया था, जिसकी वजह से वो ट्रैफिक में फंस गया था।
पुलिस अधिकारी प्राचे की प्रारंभिक जांच के अनुसार, फ्रांस की ट्रैफिक पुलिस ने बंदूक का इस्तेमाल गाड़ी रूकवाने के लिए किया था और ये गैर-कानूनी काम था और ट्रैफिक पुलिस अधिकारी पर प्रारंभिक जांच के बाद स्वैच्छिक हत्या का आरोप लगाया गया है। वहीं, प्रारंभिक आरोप दायर करने वाले जांच मजिस्ट्रेटों को आरोपी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी पर कदाचार का भी शक हो रहा है, लिहाजा उन्होंने मामले की सुनवाई से पहले गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
फ्रांस में हिंसा की आग कितनी फैली है?
पुलिस ने दंगाइयों की मोर्चाबंदी, आग की लपटों और आतिशबाजी की घटनाओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, पानी की बंदूकों और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कम से कम 200 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए 50 हजार पुलिस जवानों को प्रभावित इलाकों में भेजने की घोषणा की है।
फ्रांस के करीब दर्जन भर से ज्यादा शहरों और कस्बों में हिंसा हो रही है। वहीं, फ्रांस के अलावाबेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स भी हिंसा शुरू हो गई है। ब्रुसेल्स में एक दर्जन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, वहीं फ्रांस में 1200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्ता किया गया है। इस्लामकि समूहों ने राजधानी पेरिस के कई इलाकों में सुरक्षा कर्मियों पर बम फेंके हैं।
वहीं, मार्सिले शहर में फ्रांस के प्रसिद्ध प्राचीन लाइब्रेरी को जला दिया गया है, जहां हजारों बहुमूल्य किताबें रखी थीं। जबकि, लौवर संग्रहालय को लूट लिया गया है। दर्जनों शॉपिंग मॉल्स को भी लूट लिया गया है और फ्रांस में हर तरफ सिर्फ अराजकता की स्थिति है।
वहीं, फ्रांस की पुलिस भी सवालों के गंभीर घेरे में है। पिछले साल, फ्रांसीसी पुलिस ने उन 13 लोगों की जान ले ली थी, जिन्होंने यातायात रोकने में सहयोग करने से इनकार कर दिया था, इनमें से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से आते थे। इस वर्ष नाहेल सहित तीन अन्य व्यक्तियों की भी इसी तरह की स्थितियों में मृत्यु हो गई। मिनेसोटा पुलिस द्वारा जॉर्ज फ्लॉयड की गोली मारकर हत्या के बाद, फ्रांस में इंसाफ की मांग उठ रही है। वहां नस्लीय असमानता के ख़िलाफ़ भी प्रदर्शन हुए हैं।












Click it and Unblock the Notifications