चीन को घेरने चले थे, आपस में ही उलझे दोस्त देश, फ्रांस ने कहा- अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया ने पीठ में 'छूरा घोंपा'
ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर पनडुब्बी करार को फ्रांस ने अपने साथ सबसे बड़ा धोखा बताया है। फ्रांस ने कहा है कि दोस्त ने ही उसके साथ विश्वासघात किया है।
पेरिस, सितंबर 16: चीन को घेरने की कोशिश में लगे सभी दोस्त देश अपनी अपनी स्वार्थ में ऐसे उलझे हैं कि सभी एक दूसरे से लड़ रहे हैं। फ्रांस ने गुरुवार को कहा है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने उसे सबसे बड़ा धोखा दिया है। दरअसल, दोस्तों के बीच अविश्वास का ये माहौल तब बना है, जब ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच पनडुब्बियों को लेकर समझौता किया गया है, जिसका प्रमुख उद्येश्य प्रशांत क्षेत्र में चीन के उदय पर रोक लगाना है, लेकिन इस समझौते के चक्कर में फ्रांस को बहुत बड़ा नुकसान हो गया है, जिसके बाद फ्रांस ने अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया के उस कदम को विश्वासघात बताया है।

फ्रांस को गुस्सा क्यों आया?
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया पहले फ्रांस के साथ डीजल से चलने वाली पनडुब्बियों को लेकर डील कर चुका था। 2016 में ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बीच 16 पनडुब्बियों को लेकर डील किया गया था। लेकिन, अब जब अमेरिका और ब्रिटेन के साथ न्यूक्लियर पनडुब्बी के लिए ऑस्ट्रेलिया ने करार कर लिया है, तो उसने फ्रांस के साथ अपने करार को रद्द कर दिया है, जिसके फ्रांस सरकार की तरफ से भारी नाराजगी दिखाई गई है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन ने फ्रांस रेडियो को दिए बयान में बताया है कि, ''यह वास्तव में पीठ में एक छुरा घोंपने जैसा है। हमने ऑस्ट्रेलिया के साथ विश्वास का रिश्ता स्थापित किया था, ऑस्ट्रेलिया ने इस विश्वास को धोखा दिया है।" उन्होंने कहा, "मैं आज बहुत गुस्से में हूं, और कड़वा हूं... यह ऐसा कुछ नहीं है जो सहयोगी एक-दूसरे के साथ करते हैं।"

अमेरिका पर भड़का फ्रांस
फ्रांस के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर भी अपने गुस्से का इजहार किया है और कहा है कि, ''यह एकतरफा, अचानक और अप्रत्याशित निर्णय डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा फैसलों की याद दिलाता है।'' दरअसल, फ्रांस के विदेश मंत्री ले ड्रियन ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जिक्र करते हुए ये बता कही, जिन्होंने कई अप्रत्याशित फैसले लिए थे, जिससे यूरोप काफी ज्यादा परेशान हुआ था। ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस की नौ-सेना ग्रुप के साथ, जिसमें फ्रांस की आंशिक हिस्सेदारी थी, उसके साथ पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियों का निर्माण करने के लिए करार किया था। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बीच 2016 में करीब 50 अरब डॉलर में करार किया गया था। और अब ये डील रद्द होने के बाद फ्रांस को बहुत बड़ा झटका लगा है और ये झटका उसके ही दोस्त देशों ने दिया है। जिससे फ्रांस तिलमिलिया हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया-ब्रिटेन-अमेरिका में रक्षा समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बुधवार को एक नए रक्षा समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाला पनडुब्बी बेड़ा मिलेगा। इसके निर्माण में ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका और ब्रिटेन मदद करेगा। यह कदम भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बारे में बढ़ती चिंताओं को रेखांकित करता है, जहां फ्रांस भी अपने हितों की रक्षा करना चाहता है, जिसमें न्यू कैलेडोनिया और फ्रेंच पोलिनेशिया के विदेशी क्षेत्र शामिल हैं।

चर्चा में था ऑस्ट्रेलिया के साथ करार
फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच जब ये करार किया गया था, उस वक्त फ्रांस के विदेश मंत्री ले ड्रियन ने इस डील को फ्रांस के नौसैनिक यार्ड के लिए "सदी का अनुबंध" कहा था। और जब उनसे इस बाबत आज सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ''वाशिंगटन ने पेरिस को "धोखा" दिया है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने रेडियो से कहा कि, "स्थिति का आपका विश्लेषण कमोबेश सही है।" उन्होंने कहा कि फ्रांस और उसके सहयोगी बीजिंग की बढ़ती क्षेत्रीय ताकत के सामने "सुसंगत और संरचित हिंद-प्रशांत नीति" पर काम कर रहे हैं।

'फ्रांस के साथ विश्वासघात'
फ्रांस के विदेश मंत्री ने अमेरिका के ऊपर विश्वासघात करने का आरोप लगा है और कहा है कि "हमें स्पष्टीकरण की जरूरत होगी। हमारे पास करार के कागजात हैं''। उन्होंने कहा कि, आस्ट्रेलियाई लोगों को हमें यह बताने की जरूरत है कि वे इस डील से कैसे बाहर निकल सकते हैं''। वहीं, फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने कहा कि हमारे साथ डील अचानक रद्द कर ऑस्ट्रेलिया ने अपना सबसे खराब चेहरा दिखाया है और अमेरिका ने दिखा दिया है कि वो अपने सहयोगियों के साथ कैसा व्यवहार करता है। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री ने कहा कि, "भू-राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में यह काफी गंभीर है''। फ्रांस के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया की काफी निंदा की है और उसके कदम को अफसोसजनक बताया है। ऐसे में दोस्त देशों के बीच मची ये लड़ाई कहां जाकर खत्म होगी, कहा नहीं जा सकता है।












Click it and Unblock the Notifications