विदेशियों की हर तीन महीने पर स्वास्थ्य जांच करेगा रूस
मास्को, 20 दिसंबर। रूस में एक कानून में संशोधन किया जा रहा है जिसके तहत विदेशियों की हर तीन महीने में स्वास्थ्य जांच की जाएगी. यह जांच संक्रामक रोगों जैसे सिफलिस, एचआईवी, लेप्रोसी, टीबी और कोविड-19 जैसी बीमारियों के लिए की जाएगी.
कानून के मुताबिक देश में रहने वाले सभी विदेशियों औ उनके परिजनों को यह जांच करानी होगी. उन्हें नशीली दवाओं के लिए भी जांच करानी होगी और अपनी उंगलियों के निशान व बायोमीट्रिक फोटो भी अधिकारियों को देने होंगे.

बच्चों की भी होगी जांच
नए नियम 6 वर्ष से ऊपर के बच्चों पर भी लागू होंगे. उन्हें भी यौन रोग सिफलिस और नशीली दवाओं के लिए जांच करानी होगी. अगर किसी को पॉजीटिव पाया जाता है तो उसका वीसा रद्द कर दिया जाएगा और उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया जाएगा. इसके अलावा जो लोग 90 दिन से ज्यादा रूस में रहना चाहते हैं उन्हें अब वीसा आवेदन के साथ एचआईवी नेगेटिव होने का सबूत भी देना होगा.
रूस की सरकार ने यह नहीं बताया है कि इन नये नियमों का मकसद क्या है लेकिन कानून के प्रस्तावित मसौदे के साथ संलग्न पत्र में कहा गया है कि देश में बेलारूस, किरगिस्तान, मोल्डोवा और उज्बेकिस्तान के 25 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं जिनकी कभी कभार ही स्वास्थ्य जांच की जाती है.
इस पत्र कहा गया है कि रूस में घुसकर खतरनाक संक्रामक रोगों को फैलाए जाने का खतरा है. लेकिन बेलारूस के लोगों को इस कानून से बाहर रखा गया है जो शायद इस वजह से हो सकता है बेलारूस और रूस एक संघ हैं. बेलारूस के नागरिकों को रूस जाने के लिए वीसा नहीं लेना पड़ता. और यदि वे वहां काम करना चाहते हैं तो उनके लिए नियम अन्य लोगों के मुकाबले आसान हैं.
नए नियमों पर आपत्ति
कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठनों ने इन नियमों पर आपत्ति जताई है. जर्मन-रशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (एएचके रशिया) के थॉर्स्टन गुटमान कहते हैं कि वह महीनों से इन नए नियमों को लागू ना किए जाने के लिए कोशिश कर रहे हैं लेकिन कामयाब नहीं हो पाए हैं.
गुटमान ने डॉयचे वेले को बताया, "शुरू में तो नियम यह बनाया जाने वाला था कि विदेशी जब भी रूस में प्रवेश करेंगे उन्हें ये जांच करानी होंगी. अब यह हर तीन महीने पर कराए जाने की बात कही जा रही है."
जांच कैसे होगी इस पर फैसला रूसी अधिकारी करेंगे. मॉस्को में रहने वाले विदेशियों को जांच कराने के लिए जखारोवो स्थित माइग्रेशन सेंटर जाना होगा जो 60 किलोमीटर दूर है. रूस में काम करने वाले एक जर्मन नागरिक ने बताया कि ये नियम उसे नामंजूर हैं. इस व्यक्ति ने कहा, "अगर मुझे हर तीसरे महीने अपने फेफड़ों का एक्सरे कराना होगा तो मैं जर्मनी में ही कोई नौकरी खोज लूंगा. मेरे ख्याल से बहुत से लोग ऐसा ही महसूस करते हैं."
कम से कम दस अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एक अपील जारी कर इन नियमों का वापस लेने की मांग की है. इसके अलावा अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने रूस की सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि इस कानून के गंभीर नतीजे हो सकते हैं.
रिपोर्टः सर्गेई गुशा
Source: DW
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