काली मौत: दुनिया में फिर ब्यूबोनिक प्लेग महामारी फैलने का गंभीर खतरा, शीर्ष रूसी डॉक्टर की चेतावनी
रूस की शीर्ष डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि दुनिया में फिर से ब्यूबोनिक प्लेग फैलने की आशंका है और हर देश को फौरन इस महामारी को रोकने के लिए सख्त कोशिशें शुरू करनी चाहिए।
मॉस्को, अक्टूबर 12: हमारी दुनिया पिछले कई महीनों से कोरोना महामारी से परेशान है, लेकिन रूस की एक शीर्ष और प्रतिष्ठित डॉक्टर ने ये दावा कर पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है, कि एक बार फिर से ब्लैक डेथ नाम से मशहूर महामारी ब्यूबोनिक प्लेग फैल सकता है और ये पूरी दुनिया में कोरोना से भी भयंकर तरीके से कोहराम मचा सकता है। रूसी शीर्ष डॉक्टर की चेतावनी के बाद पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय में अफरातफरी मच गई है और डॉक्टरों ने बेहद गंभीरता से इस बीमारी को रोकने के लिए सरकारों से अपील करना शुरू कर दिया है।

ब्यूबोनिक प्लेग फैलने की चेतावनी
जलवायु परिवर्तन के कारण ब्यूबोनिक प्लेग काफी खतरनाक तरीके से वापसी कर रहा है, रूस के शीर्ष डॉक्टर की चेतावनी से दुनिया सहम गई है। रूस की शीर्ष डॉक्टरों में शुमार अन्ना पोपोवा ने ब्लैक डेथ से उत्पन्न खतरे की चेतावनी देते हुए दावा किया है कि, ग्लोबल वार्मिंग के कारण इसकी वापसी हो रही है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक 'जोखिम' है। रूसी की शीर्ष डॉक्टर अन्ना पोपोवा ने कहा कि, "हम देखते हैं कि प्लेग हॉटस्पॉट की सीमाएं ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन, और पर्यावरण पर अन्य मानवजनित प्रभावों के साथ बदल रही हैं।" उन्होंने कहा कि, ''हम जानते हैं कि दुनिया में प्लेग के मामले बढ़ रहे हैं।'

20 करोड़ लोगों की मौत
रूस की शीर्ष डॉक्टर डॉ अन्ना पोपोवा ने कहा कि, मनुष्यों में फैलने पहले ही इसे रोकने के लिए बेहद सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि अगर ये महामारी एक बार इंसानों में फैल जाएगी, तो फिर ये पूरी मानव सभ्यता के ऊपर खतरा बन जाएगा। आपको बता दें कि, 'काली मौत' के नाम से कुख्यात ये महामारी अब तक तीन बार हमारी दुनिया में फैल चुकी है। 14वीं शताब्दी में जब ये बीमारी एक बार फिर से हमारी दुनिया में फैली थी, उस वक्त ब्यूबोनिक प्लेग की वजह से करीब 5 करोड़ लोग पूरी दुनिया में मारे गये थे। वहीं, जब यह महामारी अगली बार दुनिया में फैली, तो इसने यूरोप की एक तिहाई आबादी को खत्म कर दिया था और अगली बार ब्यूबोनिक प्लेग सिर्फ एक छोटे से इलाके में फैला था, जिसमें करीब 80 हजार लोगों की मौत हो गई थी।

कुछ सालों में दिखे हैं लक्षण
रूस की शीर्ष डॉक्टर डॉ अन्ना पोपोवा ने कहा कि हाल के सालो में चीन, रूस और अमेरिका में ब्यूबोनिक प्लेग के कुछ मामले देखे गये हैं और अब इस बात की काफी ज्यादा आशंका है, कि ये महामारी तेजी से फैल सकती है। डॉक्टर अन्ना पोपोवा ने कहा कि, इससे पहले कि ये महामारी लाखों लोगों को मार दे, हमें इसे रोकने के लिए विश्वस्तर पर काफी सख्त कदम उठाने होंगे। डॉ. अन्ना पोपोवा ने कहा कि, इस महामारी का सबसे ज्यादा खतरनाक रूप अफ्रीकी देशों में देखने को मिल सकता है और अफ्रीकी देशों में इस प्लेग के फैलने का खतरा पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है, लिहाजा अफ्रीकी देशों में हमें फौरन स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने और सख्त इस प्लेग पर सख्त नजर रोकने की जरूरत है।

यूनेस्को ने भी किया आगाह
आपको बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र की बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था यूनेस्को ने इस साल अगस्त में अफ्रीका में ब्यूबोनिक प्लेग के फिर से वापसी को लेकर चेतावनी जारी की थी। एक महीने पहले ही ब्यूबोनिक प्लेग का पता चलने के कारण मंगोलियन लेग में होने वाली सिल्क वे रैली को रद्द कर दिया गया था। रूस ने पिछले साल मंगोलिया और चीन के साथ अपनी सीमाओं पर 'ब्लैक डेथ' को फैलने से रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे। वहीं, साइबेरिया के तुवा और अल्ताई गणराज्यों में सीमावर्ती क्षेत्रों में दसियों हजार लोगों को टीका लगाया गया था। रूस में अल्ताई पर्वत के उकोक पठार पर इस महामारी का एक मरीज करीब 60 सालों के बाद मिला था, जिसने रूस को टेंशन में डाल दिया था। आपको बता दें कि, ब्यूबोनिक प्लेग एक जीवाणु रोग है जो जंगली जानवरों पर रहने वाले पिस्सू द्वारा फैलता है और यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह 24 घंटे से भी कम समय में एक वयस्क को मार सकता है।

क्या होती है ब्यूबोनिक प्लेग महामारी
ब्यूबोनिक प्लेग, प्लेग का सबसे आम रूप है और संक्रमित पिस्सू (एक तरह का कीड़ा, जो जंगली जानवरों के शरीर पर पाया जाता है) के काटने से फैलता है। ये संक्रमण लिम्फ नोड्स नामक प्रतिरक्षा ग्रंथियों में फैलता है, जिससे वे सूज जाते हैं और पीड़ित के शरीर में असहनीय दर्द होने लगता है। वहीं, शरीर में कई जगहों पर घाव निकल आते हैं, जिसका दर्द सहना मरीजों के लिए मौत के समान हो जाता है। ब्यूबोनिक प्लेग का काफी ज्यादा संक्रामक बीमारी है, जो जानवरों से ही इंसानों में आता है। कई इलाकों में जहां लोग जंगली जानवरों को मारकर खाते हैं, उन इलाकों में ब्यूबोनिक प्लेग फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

फेफड़ों को कर देता है खत्म
ब्यूबोनिक प्लेग जिस बैक्टीरिया की वजह से होता है, उसका नाम यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम होता है और यह बैक्टीरिया इंसानों के शरीर के लिंफ नोड्स, ब्लड और फेफड़ों पर सीधा हमला करता है। इस संक्रमण के शिकार मरीजों की उंगलियां और नाक सड़कर काली हो जाती हैं। आम भाषा में इस प्लेग को गिल्टीवाला प्लेग भी कहा जाता है, जिसमें मरीजों में शुरूआती लक्षण के तौर पर काफी तेज बुखार, शरीर में असहनिय दर्द होने लगता है। इस महामारी में मरने का दर काफी ज्यादा होता है।

ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षण
ब्यूबोनिक प्लेग के शिकार मरीजों को दो से तीन दिनों में गिल्टियां निकलने लगती हैं और मरीजों को काफी तेज फीवर हो जाता है। मरीजों के तेज ठंढ़ लगती है और सिर और शरीर में तेज दर्द होना शुरू हो जाता है। मरीजों को उल्टी आने लगता है और मतली आने लगता है। आम तौर पर इसके फैलने के बारे में डॉक्टरों को कहना है कि, ये प्लेग सबसे पहले चूहों के मरने के बाद फैलता है। चूहों के मरने के बाद इस प्लेग का बैक्टीरिया पिस्सुओं में आता है और ये पीस्सू जंगलों में रहने वाले जानवरों के शरीर में चिपक जाते हैं। जब इन जानवरों का शिकार कोई आदमी करता है तो ये पीस्सू उसे काट लेता है और पीस्सू में मौजूद बैक्टीरिया उस इंसान के खून में चला जाता है। आम तौर पर डॉक्टरों का कहना है कि, जिन इलाकों में तेज गति से चूहे मरने लगते हैं, उन इलाकों में दो से तीन हफ्ते में ब्यूबोनिक फैलने का खतरा तेज होने लगता है।

2010 से 2015 में भी फैली थी महामारी
आपको बता दें कि, 2010 से 2015 के बीच ब्यूबोनिक प्लेग के करीब 3248 मामले सामने आये थे, जिनमें से 584 लोगों की मौत हो गई। यानि आप समझ सकते हैं कि इस महामारी का मृत्युदर कितना ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूबोनिक प्लेग के ज्यादातर मामले रिपल्बिकन ऑफ कॉन्गो, मैडागास्कर और पेरू में आए थे। वहीं बात अगर दूसरे देशों की बात करें, तो 1970 से 1980 के बीच ब्यूबोनिक प्लेग के कई मरीज चीन, भारत रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिणी अमेरिकी देशों में ब्यूबोनिक प्लेग के मरीज मिले थे।

पहले था जस्टिनियन नाम
रिपोर्ट के मुताबिक, छठवी शताब्दी से लेकर आठवीं शताब्दी तक ब्यूबोनिक प्लेग को जस्टिनियन प्लेग कहा जाता था और उस वक्त 200 सालों में इस प्लेग की वजह से ढाई करोड़ से पांच करोड़ लोग मारे गये थे। जब 14वीं शताब्दी में दोबारा से इस महामारी का हमला हमारी दुनिया में हुआ था, उस वक्त ये काफी ज्यादा भयंकर था और इस बीमारी की वजह से 1347 में करीब 5 करोड़ लोग मारे गये थे और उसी वक्त इस बीमारी को ब्लैक डेथ नाम दिया गया था। 1894 में जब ब्यूबोनिक प्लेग फिर से फैला था, तब इसका असर हांगकांग के आसपास देखा गया था और तब करीब 80 हजार लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, बात भारत की करें तो 1994 में भारत के पांच राज्यों में ब्यूबोनिक प्लेग के करीब 700 संक्रमित मिले थे, जिनमें से 52 मरीजों की मौत हो गई थी। ये प्लेग करीब 5 हजार साल पुराना है।
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