FATF की बैठक में फ्रांस लेगा पाकिस्तान से बदला! ब्लैक लिस्ट हो सकता है पाकिस्तान
पाकिस्तान भले कहता है कि उसने एफएटीएफ के ज्यादातर शर्तों को पूरा कर दिया है लेकिन पाकिस्तान में कट्टरपंथ और ज्यादा बढ़ा है।
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान को लगातार फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स यानि एफएटीएफ ने अपनी ग्रे लिस्ट में ही रखा हुआ है और इसी महीने एफएटीएफ की अगली बैठक होने जा रही है, जिसमें तय किया जाना है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकाल लिया जाए या फिर उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। हालांकि, पाकिस्तान का दावा है कि उसने एफएटीएफ की ज्यादातर शर्तों को पूरा कर दिया है लेकिन क्या वास्तव में पाकिस्तान के दावों में दम है, ये एक बड़ा सवाल है। वहीं, फ्रांस से पंगा लेकर पाकिस्तान बुरी तरह से फंसता दिखाई दे रहा है, क्योंकि एफएटीएफ की पिछली बैठक में भी फ्रांस की वजह से ही पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा गया था।

ब्लैक लिस्ट होगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान भले लाख दावे कर ले कि उसने आतंकियों को लेकर कड़े कदम उठाए हैं लेकिन पाकिस्तान की कथनी और करनी में भारी अंतर है। पाकिस्तान भले कहता है कि उसने एफएटीएफ के ज्यादातर शर्तों को पूरा कर दिया है लेकिन आतंकी संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान ने कार्रवाई नहीं की है। अभी भी पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग की जाती है। वहीं, पाकिस्तान ने चाल चलते हुए कई आतंकी संगठनों के नाम बदल दिए और नये नाम के साथ उन्हीं आतंकियों को आर्थिक मदद के साथ साथ खुफिया मदद देता रहा, जिनपर यूएन ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में क्या पाकिस्तान का एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकलना संभव हो पाएगा? भारत के डिफेंस एक्सपर्ट एनपी. सिंह ने वन इंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि 'पाकिस्तान कह रहा है कि वो एफएटीएफ की शर्तों को पूरा कर रहा है लेकिन पाकिस्तान का एक्शन जमीनी स्तर पर दिख नहीं रहा है। भारत के साथ पाकिस्तान ने भले ही सीमा पर सीजफायर किया है लेकिन आतंकियों की फंडिंग अभी भी जारी है, ऐसे में उम्मीद कम है कि एफएटीएफ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से निकालेगा'

फ्रांस से पंगा पड़ेगा महंगा?
पिछले कुछ महीनों में फ्रांस को लेकर पाकिस्तान के नेताओं ने काफी भड़काऊ बयान दिए। पाकिस्तान की राजनीतिक और कट्टरवादी संगठन पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक ने फ्रांसीसी राजदूत को पाकिस्तान से बाहर निकालने को लेकर खूनी प्रदर्शन किया था और कई लोग मारे गये थे। वहीं, पाकिस्तान संसद में फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकालने को लेकर विधेयक भी लाया गया था। जबकि, पिछले साल पाकिस्तानी संसद में फ्रांस से राजदूत को वापस बुलाने का प्रस्ताव भी पास हुआ था। हालांकि ये अलग बात है कि फ्रांस में पाकिस्तान का राजदूत था ही नहीं और ये बाद इमरान सरकार को पता ही नहीं थी। एफएटीएफ पर फ्रांस का कंट्रोल है और फ्रांस को याद है कि पाकिस्तान ने फ्रांस की राजनीति को लेकर कैसे कैसे बयान दिए थे। हालांकि, भारतीय डिफेंस एक्सपर्ट एनपी सिंह का मानना है कि 'फ्रांस एक लोकतांत्रिक देश है और वो बदले की भावना से कोई कार्रवाई नहीं करेगा। लेकिन, फ्रांस के साथ भारत के काफी अच्छे संबंध हैं, ऐसे में फ्रांस भारत की नजरों से भी पाकिस्तान को देख सकता है। लेकिन, असली बात ये है कि क्या पाकिस्तान ने एफएटीएफ के शर्तों को पूरा किया है, तो उसका जवाब है नहीं। ऐसे में फ्रांस नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकाला जाए'

यूरोपीय देशों से खराब संबंध
पाकिस्तान में बढ़ती कट्टरपंथी विचारधारा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार को लेकर यूरोपीयन देश भी पाकिस्तान से काफी नाराज हैं। पिछले महीने यूरोपियन यूनियन ने बैठक के दौरान पाकिस्तान को दिए गये व्यापारिक वरीयता को लेकर समीक्षा करना शुरू कर दिया है, जिसका जबाव देने के लिए अब इमरान खान ने मुस्लिम देशों से इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक साथ आने की अपील की थी। यूनाइटेड नेशंस और कुछ अमेरिकन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को काफी प्रताड़ित किया जा रहा है और अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसके साथ ही ईशनिंदा के नाम पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को जेल में डाल दिया जाता है और फिर उन्हें प्रशासन के जरिए प्रताड़ित किया जाता है। जिसके बाद यूरोपियन यूनियन की पार्लियामेंन्ट्री बैठक में पाकिस्तान को व्यापारिक वरीयता दिए जाने को लेकर समीक्षा किए जाने की बात की गई है। यूरोपियन देश पाकिस्तान की ईशनिंदा कानून के खिलाफ हैं। यूरोपियन संसद की बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव काफी ज्यादा बहुमत से स्वीकार किया गया था है।

पाकिस्तान के खिलाफ यूरोपीयन देश
पिछले महीने यूरोपीयन यूनियन से पाकिस्तान को बड़ा झटका मिला था और एफएटीएफ में यूरोपीयन देश ही हैं, लिहाजा माना यही जा रहा है कि पाकिस्तान को यूरोपीयन देश ग्रे लिस्ट से नहीं निकालेंगे। वहीं, डिफेंस एक्सपर्ट एनपी सिंह का कहना है कि 'पाकिस्तान को लेकर अब यूरोपीयन देशों का नजरिया काफी बदल गया है। पाकिस्तान बात बात पर इस्लामिक कार्ड खेलता है और अपने ही देश में अल्पसंख्यकों को काफी प्रताड़ित करता है। जबकि यूरोपीयन देश लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में यकीन रखते हैं। ऐसे में उम्मीद यही की जानी चाहिए कि सिर्फ एफएटीएफ में ही यूरोपीयन देश पाकिस्तान के खिलाफ खड़े नहीं होंगे बल्कि आने वाले वक्त में पाकिस्तान को यूरोपीयन देश कई और व्यापारिक झटके देंगे।'आपको बता दें कि पाकिस्तान को 2018 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रखा गया था। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 29 एक्शन प्लान की लिस्ट सौंपी थी जिसमें पाकिस्तान को देश में फैले आतंकी गतिविधियों पर एक्शन लेने की बात कही गई थी। इस लिस्ट को पूरा करने के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर किया जाएगा।












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