अमेरिकी खुफिया अधिकारी का दावा, तालिबान की वजह से भारत पर बहुत बड़ा खतरा, अमेरिका जिम्मेदार
पूर्व अमेरिकी सीआईए अधिकारी ने दावा किया है कि तालिबान भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह है और अफगानिस्तान की वर्तमान हालात के लिए अमेरिका जिम्मेदार है।
वॉशिंगटन, सितंबर 06: अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ कई ऑपरेशन को अंजाम दे चुके पूर्व सीआईए अधिकारी ने भारत को लेकर काफी बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी और अफगानिस्तान एंटी टेरेरिज्म प्रमुख के तौर पर काम कर चुके डगलस लंडन ने कहा है कि तालिबान को लेकर भारत की चिंताएं स्वाभाविक हैं, क्योंकि तालिबान भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

सीआईए प्रमुख का दावा
2016-18 के दौरान दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया में आतंकवाद निरोध के लिए सीआईए के प्रमुख के रूप में अफगानिस्तान में संचालन की देखरेख करने वाले डगलस लंदन ने प्रमुख घटनाओं और घटनाओं के बारे में जिक्र किया है। उन्होंने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद दक्षिण एशिया में बने हालत और बदली राजनीतिक घटनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं हैं। डगलस लंडन अमेरिका के पूर्व राष्ट्र्पति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अफगानिस्तान को लेकर काम कर चुके हैं। वहीं, कई सालों तक अमेरिकी राष्ट्रपति को अफगानिस्तान में आतंकवाद को लेकर ब्रीफिंग दी थी। उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान के उदय के बाद उसे भारत के लिए चिंता की बड़ी वजह बताई है, वहीं उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि तालिबान को पाकिस्तान का पूरा समर्थन मिल रहा है।

खुफिया विफलता से भी बदतर
सीआईए के दिग्गज अधिकारी रह चुके डगलस लंडन, जो 34 साल की सेवा के बाद 2019 में रिटायर्ड हुए हैं, उन्होंने तर्क देते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में जो हुआ, वह एक खुफिया विफलता से भी बदतर था और हक्कानी नेटवर्क के पाकिस्तानी सेना के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को उजागर करता है। डगलस लंडन ने सीआईए में अपने कार्यकाल को लेकर एक संस्मरण प्रकाशित किया है, जिसका नाम ''द रिक्रूटर: स्पाईंग एंड द लास्ट आर्ट ऑफ अमेरिकन इंटेलिजेंस'' है। इसमें उन्होंने लिखा है कि किस तरह से 2020 का यूएस-तालिबान शांति समझौता अमेरिका के द्वारा किया गया सबसे खराब समझौता था। उन्होंने कहा है कि, ''ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले जैसे वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने अफगानिस्तान में तालिबान की जीत का आंकलन करने में नाकामयाब रहे, जो उनकी खुफिया विफलता का संकेत देता है।'' उन्होंने लिखा है कि 'आप तर्क दे रहे हैं कि यह उससे कहीं ज्यादा बुरा है।"

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से समझौता
पूर्व सीआईए अधिकारी ने कहा है कि ''डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन, दोनों राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में मैने देखा है कि अफगानिस्तान नीति में जिस गणित का इस्तेमाल किया गया है, वो घरेलू राजनीतिक विचारों से प्रभावित था''। उन्होंने कहा कि ''अफगानिस्तान में अमेरिका को रहना है या फिर अफगानिस्तान से अमेरिका को निकल जाना है, इसका आंकलन करते वक्त सुरक्षा के मुद्दों को दरकिनार किया गया''। उन्होंने लिखा है कि '' मेरी राय में फैसले लेने में जिन बातों का ध्यान रखा गया है, उसने अफगानिस्तान की स्थिति और प्रभाव को खुफिया विफलता से भी ज्यादा बदतर बना दिया है।'' उन्होंने लिखा है कि ''जनरल मार्क मिले ने कहा है कि उन्हें नहीं लगा था कि सिर्फ 11 दिनों में अफगानिस्तान सरकार गिर जाएगी, वो एक पॉलिटिकल ड्रामा वाला बयान है''।












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