Apple की सुप्रीमेसी खत्म! अब हर डिवाइस में चलेंगे C-Type चार्जर, इसे चुने जाने की वजह जानिए
यूरोपीय संघ ने यह निर्णय लिया है कि है कि मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, टैबलेट कैमरा, ई-रीडर, ईयर बड्स, पोर्टेबल स्पीकर और कुछ अन्य डिवाइसों में एक ही तरह का चार्जिंग पोर्ट- यूएसबी-सी हो। इससे भारी मात्रा में ई-कचरा रोका जा सकेगा
यूरोपीय संघ ने यह निर्णय लिया है कि हर डिवाइस में एक ही तरह का चार्जिंग पोर्ट- यूएसबी-सी हो। इससे भारी मात्रा में ई-कचरा रोका जा सकेगा।
बर्लिन, 08 जूनः यूरोपीय संघ ने यह निर्णय लिया है कि 2024 से सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में एक जैसे चार्जर का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी कि आने वाले समय में मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट कैमरा, ई-रीडर, ईयर बड्स, पोर्टेबल स्पीकर और बाकी अन्य डिवाइसों में भी एक ही तरह का चार्जर होगा। यह यूएसबी-सी चार्जर होगा, जो फिलहाल एप्पल और गूगल समेत कुछ नए मॉडल के लिए ही उपबल्ध है।

C-टाइप चार्जर को वरीयता
फिलहाल बाजार में इस वक्त कई तरह के चार्जरों का उपयोग हो रहा है। इसमें एपल का लाइटनिंग, माइक्रो यूएसबी व यूएसबी सी-टाइप चार्जर प्रमुख हैं। लेकिन यूएसबी सी-टाइप को इसकी सुलभता के लिए और इसे अपेक्षाकृत तेज मानते हुए अपनाया गया है। हालांकि यूरोपीय संघ में फिलहाल यह सहमति अस्थायी है और इसे औपचारिक अनुमति मिलनी बाकी है।

एपल कंपनी के लिए झटका
इसे एपल कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि वह अपने डिवाइस के चार्जर बाकियों से न केवल अलग रखता है, बल्कि कीमत भी ऊंची होती है। एप्पल लंबे समय से इस विचार का विरोध करते हुए आया है। एपल का तर्क है कि डेटेड इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का अनुचित उपयोग इनोवेशन को प्रभावित करता है और उपयोगकर्ताओं को नए चार्जर में बदलने के लिए मजबूर करने से इलेक्ट्रॉनिक कचरे का पहाड़ बन सकता है।

मौजदा उपकरण पर फैसला लागू नहीं
यूरोपीय यूनियन ने एप्पल के विचार से असहमति रखते हुए पूरी दुनिया में एक जैसे चार्जर रखने पर का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब एपल को अपने उत्पाद जैसे आईफोन, आईपैड आदि के लिए अपने चार्जिंग पोर्ट बदलने बदलने होंगे। हालांकि यूरोपीय संघ का यह फैसला मौजूदा उपकरणों पर लागू नहीं होगा। अर्थात ऐसे उपकरण जो 2024 से पहले बाजार में उपलब्ध हैं, वे पुराने चार्जर के साथ ही बेचे जा सकेंगे।

ई-वेस्ट में आएगी कमी
यूरोपीय संघ का कहना है कि इन नए नियमों से लोगों को नए चार्जर पर गैरजरूरी खर्च नहीं करना होगा। इससे उसके 45 करोड़ उपभोक्ताओं को सलाना 250 मिलियन यूरो यानी लगभग दो अरब रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कचरे में भी सालाना 11,000 टन की कमी आएगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक स्मार्टफोन को बनाने में करीब 86 किलो और एक लैपटॉप को बनाने में लगभग 1,200 किलो अदृश्य कचरा निकलता है।
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