यूरोपीय संघ ने भारत पर थोपी एंटी-सब्सिडी ड्यूटी
नई दिल्ली, 17 मार्च। यूरोपीय संघ ने कहा है कि भारत और इंडोनेशिया में बने स्टील उत्पादों पर कर बढ़ाया जाएगा क्योंकि इन देशों के उत्पादकों को "अनुचित सब्सिडी" का लाभ मिलता है. यूरोपीय कमीशन ने इस बारे में एक जांच की थी जिसके बाद उत्पादों पर 'सब्सिडी-विरोधी' कर लगाने का फैसला लिया गया है. बुधवार को संघ की पत्रिका में बताया गया कि 4.3 प्रतिशत से 21.4 प्रतिशत के बीच कर लगाया जाएगा. यह कर पहले से मौजूद डंपिंग विरोधी ड्यूटी के अतिरिक्त होगा.

आयोग ने कहा कि नए कर 17 मार्च से ही लागू हो जाएंगे और इनका मकसद एसरआईनॉक्स वह आउटओकम्पू जैसे यूरोपीय उत्पादकों को हो रहे नुकसान से राहत पहुंचाना है. यूरोपीय संघ के व्यापार प्रमुख व्लादिस डोंबरोवस्कीस ने कहा, "आज हम भारत और इंडोनेशिया में सरकार समर्थित अन्यायपूर्ण सब्सिडी के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, जो इस अहम क्षेत्र में काम कर रहे हमारे कामगारों और उद्योगों को आहत कर रही हैं."
40 प्रतिशत तक हो जाएगी ड्यूटी
एंटी-सब्सिडी की दर भारत के लिए 7.5 प्रतिशत और इंडोनेशिया के लिए 21 प्रतिशत तय की गई है. बीते नवंबर में ही इन दोनों देशों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई थीं. भारत के लिए एंटी डंपिंग ड्यूटी 13.9 फीसदी से 35.3 प्रतिशत और इंडोनेशिया के लिए 10.2 प्रतिशत से 20.2 प्रतिशत है.
नए फैसले का असर इंडोनेशिया की कंपनी आईआरएनसी और भारत की जिंदल स्टील आदि पर पड़ेगा. आईआरएनसी पर 21.4 फीसदी अतिरिक्त कर लगेगा और उसे कुल 30.7 प्रतिशत आयात कर देना होगा. इसी तरह भारत की जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड और जिंदल स्टेनलेस हिसार लिमिटेड पर 4.3 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगेगा और उसे कुल 14.3 प्रतिशत ड्यूटी देनी होगी.
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यूरोपीय आयोग ने कहा कि कर्ज, कर में छूट और सस्ते कच्चे माल के रूप में इन कंपनियों को सब्सिडी मिल रही है. इस कच्चे माल में वे उत्पाद भी शामिल हैं जिनके निर्यात पर पाबंदियां हैं. इसके अलावा आयोग का कहना है कि इंडोनेशिया के स्टील उद्योग को चीन से भी मदद मिल रही है, जिसे बदले में इंडोनेशिया के निकल निर्यात से फायदा मिलता है.
'चीन पहुंचा रहा है नुकसान'
यूरोपीय संघ ने दूसरी बार चीन द्वारा अन्य देशों में उपबल्ध कराई जा रही सब्सिडी की जांच की है. 2020 में संघ ने चीन की कंपनियों द्वारा मिस्र में सहयोग से बनाए जा रहे ग्लास फाइबर उत्पादों पर ड्यूटी लगाई थी.
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इस बारे में डोंबरोवस्कीस ने कहा कि चीन की अंतरराष्ट्रीय सब्सिडी योजनाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे सीधे तौर पर हमारे उद्योग के लिए खतरा हैं. उन्होंने कहा, "निर्यात पाबंदियों के आधार पर दी जाने वाली सब्सिडी सबसे ज्यादा नुकसानदायक हैं क्योंकि वे कच्चे माल की कीमतों को बहुत ज्यादा घटा देती हैं और स्वस्थ प्रतिद्वन्द्विता के खिलाफ हैं. विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार ही समानता लाने के लिए इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है."
वीके/एए (रॉयटर्स, डीपीए)
Source: DW
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