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पहले बुखार, नाक से खून और फिर मौत... इक्वेटोरियल गिनी में मारबर्ग वायरस से 9 लोगों की जान गई, मचा हड़कंप

मारबर्ग वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के भी होश उड़ा दिए हैं। WHO भी मारबर्ग वायरस की दस्तक के बाद अलर्ट मोड में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे लेकर मंथन करने के लिए आपात बैठक बुला ली है।

What is Marburg disease

Image: Oneindia

दुनिया अभी तक कोरोना वायरस के विनाशकारी परिणामों से जूझ रही है इस बीच एक अफ्रीकी देश में एक खतरनाक वायरस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इक्वेटोरियल गिनी में मारबर्ग वायरस के पहले मामले की पुष्टि की है। इससे देश में कम से कम 9 लोगों की मौत होने की पुष्टि की गई है। इसे लेकर देश में हड़कंप मच गया है।

7 फरवरी को मिली पहली सूचना

इक्वेटोरियल गिनी के स्वास्थ्य मंत्री अयाकाबा के मुताबिक 7 फरवरी को पहली बार एक अज्ञात बीमारी के संक्रमण की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच के बाद पता चला कि इस अज्ञात बीमारी के संक्रमण से मरने वालों में वो लोग शामिल थे, जिन्होंने एक अंतिम संस्कार समारोह में हिस्सा लिया था। इसके बाद देश के अधिकारियों ने उन दो गांवों के आसपास आवाजाही पर रोक लगा दी, जो सीधे तौर से संक्रमित लोगों से जुड़े हैं। संक्रमण फैलने से रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।

एक्शन मोड में आया WHO

कोरोना से भी खतरनाक माने जा रहे इस मारबर्ग वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के भी होश उड़ा दिए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन मारबर्ग वायरस की दस्तक के बाद अलर्ट मोड में आ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे लेकर मंथन करने के लिए आपात बैठक बुला ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से बुलाई गई आपात बैठक में मारबर्ग वायरस के कारण बने हालात के साथ ही इसकी रोकथाम के उपायों पर भी मंथन किया जाएगा।

बीमारी के क्या हैं लक्षण?

इस रक्तस्रावी बुखार से हुई मौतों के बाद इक्वेटोरियल गिनी प्रशासन ने 200 लोगों को क्वारंटाइन किया है। अब तक की जानकारी के मुताबिक मारबर्ग वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक है। ये वायरस बेहद तेजी से फैलता है और यह इबोला वायरस के परिवार से ही संबंधित है। इस वायरस से संक्रमण की स्थिति में बुखार आता है और फिर नाक से खून आने लगता है। इसके साथ ही पीड़ित के जोड़ों में दर्द भी होता है। जानकारी के मुताबिक इस बीमारी से संक्रमित लोगों की कुछ ही घंटों में मौत हो सकती है।

संक्रमित होने पर मृत्यु तय

WHO के मुताबिक मारबर्ग वायरस रोग एक अत्यधिक विषाणुजनित रोग है जो रक्तस्त्रावी बुखार का कारण बनता है। मारबर्ग वायरस को इसकी उच्च मृत्युदर की वजह से बेहद खतरनाक माना जा रहा है। मारबर्ग वायरस से संक्रमण की स्थिति में मृत्यु दर 88 फीसदी है। यानी कि इस वायरस से संक्रमित होने की सूरत में पीड़ित की मौत लगभग तय है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस से संक्रमण की स्थिति में हेमरेजिक फीवर होता है जो काफी तेजी से फैलता है।

पहले भी आ चुके हैं मामले

WHO मुताबिक पहले भी इस वायरस के मामले सामने आ चुके हैं। साल 1967 में भी इसके मामले सामने आए थे। फ्रैंकफर्ट और बेलग्रेड में इस वायरस को एक साथ दो मामले देखे गए। यह रोग युगांडा के अफ्रीकी हरे बंदरों से जुड़ा बताया जाता है। इसका वाहक चमगादड़ बताया जाता है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक यह वायरस माइन्स तथा गुफाओं में लंबे वक्त तक रहने के कारण होता है।

मारबर्ग रोग के लक्षण क्या हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सबसे पहले तेज बुखार आता है। ठंड लगना, जी मिचलाना, सिरदर्द, ठंड लगना, बेचैनी के साथ ही शरीर पर लाल रैशेज का पड़ना भी मारबर्ग वायरस से संक्रमण के लक्षण हैं। संक्रमण की स्थिति में उल्टी के साथ ही सीने में दर्द, गले में सूजन, पेट दर्द और डायरिया के लक्षण भी नजर आ सकते हैं। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में पीलिया के लक्षण भी नजर आ सकते हैं। पैंक्रियाज में सूजन, अचानक वजन घटना, लिवर फेल होने के साथ ही पीड़ित मल्टी ऑर्गन फेलियर का भी शिकार हो सकता है।

मारबर्ग रोग का टीका उपलब्ध है?

अब तक मारबर्ग वायरस रोग से बचने के लिए वैज्ञानिक किसी टीके का इजाद नहीं कर पाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती चरण में प्रायोगिक टीके पर काम चल रहा है। मारबर्ग वायरस से हुई बीमारी का अभी तक इलाज संभव नहीं हो पाया है। वर्तमान में चिकित्सक इम्यून थैरेपी, ड्रग थैरेपी सहित अन्य तरीकों से इसका मूल्यांकन करने में जुटे हुए हैं।

कैमरून की भी बढ़ी चिंता

इक्वेटोरियल गिनी के पड़ोसी देश कैमरून की भी चिंता मारबर्ग वायरस को लेकर बढ़ गई है। कैमरून ने इसे फैलने के खतरे को देखते हुए अपनी सीमा के पास आवाजाही पर रोक लगा दी है। कैमरून के स्वास्थ्य मैलाची मनौदा ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बीमारी के संक्रमण को लेकर जांच की जा रही है।

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